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सत्यम घोटाले में राजू बंधुओं को 7 साल की कैद

सत्यम घोटाले के सरगना बी. रामलिंग राजू और उसके भाई बी. रामा राजू को यहां की एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पांच-पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। गौरतलब है कि छह साल पहले 7,000 करोड़ रुपए के सत्यम घोटाले ने कारपोरेट जगत को […]

Author April 10, 2015 8:11 AM

सत्यम घोटाले के सरगना बी. रामलिंग राजू और उसके भाई बी. रामा राजू को यहां की एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पांच-पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। गौरतलब है कि छह साल पहले 7,000 करोड़ रुपए के सत्यम घोटाले ने कारपोरेट जगत को हिला कर रख दिया था।

विशेष जज बीवीएलएन चक्रवर्ती ने पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी वाडलामणि श्रीनिवास, प्राइसवाटरहाउस के पूर्व अंकेक्षक सुब्रमणि गोपालकृष्णन और टी. श्रीनिवास सहित आठ अन्य लोगों को सात साल की सजा सुनाई है। इन पर अलग-अलग राशि के जुर्माने लगाए गए।

दस आरोपियों को आपराधिक षडयंत्र रचने और धोखाधड़ी सहित अन्य अपराधों का दोषी करार दिया गया। आइटी उद्योग के कभी नामचीन हस्ती रहे 60 वर्षीय रामलिंग राजू और पूर्व कर्मचारी जी. रामकृष्ण को धारा 201 के तहत दोषी करार दिया गया।

हैदराबाद जोन के पुलिस अधीक्षक (सीबीआइ) वी. चंद्रशेखर के मुताबिक, राजू के एक अन्य भाई बी. सूर्यनारायण राजू और पूर्व आंतरिक मुख्य अंकेक्षक वीएस प्रभाकर गुप्ता को छोड़कर अन्य सभी आठ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 और 477ए के तहत दोषी ठहराया गया।

यद्यपि लेखा-जोखा में फर्जीवाड़ा करीब 7,000 करोड़ रुपए का था लेकिन कंपनी के निवेशकों को अनुमानित 14,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और राजू व उनके अन्य सहयोगियों को 1,900 करोड़ रुपए का बेजा लाभ हुआ।

रामलिंग राजू और उनके भाई व सत्यम के पूर्व प्रबंध निदेशक बी. रामा राजू को अमानत में खयानत से जुड़ी धारा 409 के तहत भी दोषी पाया गया। सभी 10 आरोपी अदालत में मौजूद थे जहां फैसला सुनाए जाने के समय मीडिया को जाने की अनुमति नहीं थी। फैसला सुनाने के बाद जज ने सीबीआइ को सभी आरोपियों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया।

सत्यम घोटाला 7 जनवरी, 2009 को तब उजागर हुआ था, जब कंपनी के संस्थापक और तत्कालीन चेयरमैन रामलिंग राजू ने कथित तौर पर कंपनी के बही-खातों में छेड़छाड़ करने और कई सालों से मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की बात स्वीकार की थी।

इसके दो दिन बाद आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग द्वारा राजू, उसके भाई रामा राजू व अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया था।

करीब छह साल पहले शुरू हुए मुकदमे में लगभग 3,000 दस्तावेज चिह्नित किए गए और 226 गवाहों से पूछताछ की गई। रामलिंग राजू के अलावा अन्य आरोपियों में बी. रामा राजू, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी वाडलामणि श्रीनिवास, पूर्व पीडब्ल्यूसी अंकेक्षक सुब्रमणि गोपालकृष्णन व टी. श्रीनिवास, सूर्यनारायण राजू, पूर्व कर्मचारी जी. रामकृष्ण, डी. वेंकटपति राजू व श्रीसैलम और सत्यम के पूर्व आंतरिक मुख्य अंकेक्षक वीएस प्रभाकर गुप्ता शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि बाद में महिंद्रा एंड महिंद्रा के स्वामित्व वाली कंपनी टेक महिंद्रा द्वारा सत्यम का अप्रैल, 2009 में अधिग्रहण कर लिया गया।

सत्यम का सत्य सामने:

* सत्यम घोटाला 7 जनवरी, 2009 को तब उजागर हुआ था, जब कंपनी के संस्थापक और तत्कालीन चेयरमैन रामलिंग राजू ने कथित तौर पर कंपनी के बही-खातों में छेड़छाड़ करने और कई सालों से मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की बात स्वीकार की थी।

* लेखा-जोखा में फर्जीवाड़ा करीब 7,000 करोड़ रुपए का था पर कंपनी के निवेशकों को अनुमानित 14,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और राजू व उनके अन्य सहयोगियों को 1,900 करोड़ रुपए का बेजा लाभ हुआ।

* सत्यम घोटाले के इस बहुचर्चित केस में रामलिंग राजू के अलावा बी. रामा राजू, वाडलामणि श्रीनिवास, सुब्रमणि गोपालकृष्णन, टी. श्रीनिवास, सूर्यनारायण राजू, जी. रामकृष्ण, डी. वेंकटपति राजू, श्रीसैलम और वीएस प्रभाकर गुप्ता दोषी करार दिए गए।

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