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लॉकडाउन में आयुष्मान भारत स्कीम के तहत इलाज कराने वालों की संख्या 51 पर्सेंट तक घटी, जरूरी मेडिकल सेवाएं हुईं प्रभावित

Ayushman Bharat Scheme Beneficiaries: परिवार को 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कवरेज देने वाली इस स्कीम के तहत कैंसर के इलाज के लिए भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में लॉकडाउन की अवधि में 64 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

आयुष्मान भारत स्कीम के तहत क्लेम में आई 51 पर्सेंट की कमी

Ayushman Bharat Scheme Benefits: कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए लागू हुए 10 सप्ताह लंबे लॉकडाउन के दौरान आयुष्मान भारत स्कीम के तहत लाभ लेने वालों की संख्या आधे से ज्यादा कम हो गई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में 51 फीसदी तक की कमी देखने को मिली है। यही नहीं इस स्कीम के तहत कैंसर के इलाज और अन्य जरूरी सेवाओं में कहीं ज्यादा गिरावट आई है। एक परिवार को 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कवरेज देने वाली इस स्कीम के तहत कैंसर के इलाज के लिए भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में लॉकडाउन की अवधि में 64 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

इसके अलावा डिलिवरी के लिए गर्भवती महिलाओं के भर्ती होने की दर में भी 26 फीसदी की कमी आई है। ‘लॉकडाउन के दौरान आयुष्मान भारत योजना’ नाम से तैयार की गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। आयुष्मान भारत स्कीम का संचालन करने वाली संस्था नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले लॉकडाउन के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लाभ लेने की दर में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि स्कीम के लाभार्थियों की संख्या में आई गिरावट के राज्यवार आंकड़ों में भी बड़ा अंतर है। असम, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में स्कीम का लाभ लेने वालों की संख्या में 75 फीसदी की कमी आई है। हालांकि उत्तराखंड, पंजाब और केरल जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 25 फीसदी ही है।

आइए बिंदुवार जानते हैं, कैसे लॉकडाउन के दौरान कैसे कम हुआ आयुष्मान भारत स्कीम का आंकड़ा…

लॉकडाउन से पहले के 12 सप्ताहों से तुलना करें तो लॉकडाउन की अवधि के दौरान आयुष्मान भारत स्कीम के क्लेम में 51 पर्सेंट की कमी देखने को मिली है।

राज्यवार आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। उत्तराखंड, पंजाब और केरल जैसे राज्यों में यह गिरावट 25 पर्सेंट तक की ही है। वहीं असम, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 75 पर्सेंट तक का है।

यह आंकड़ा उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान सरकारी अस्पतालों में इलाज की बजाय आयुष्मान के लाभार्थियों ने निजी चिकित्सालयों को तरजीह दी है।

लॉकडाउन की अवधि के दौरान पहले से तय सर्जरी, कैटारेक्ट के ऑपरेशंस और जॉइंट रिपेल्समेंट्स में 90 पर्सेंट तक की कमी आई है।

लॉकडाउन की इस अवधि के दौरान इलाज के मामले घटने के चलते आयुष्मान भारत स्कीम के 1,000 करोड़ रुपये कम खर्च हुए हैं, जो इस स्कीम के तहत तय सालाना बजट के 15 फीसदी के बराबर है।

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