AY 2026-27 ITR Filing: असेसमेंट ईयर 2026-27 (AY 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग शुरू हो चुकी है। ई-फाइलिंग पोर्टल एक्टिव हो गया है और कुछ आईटीआर फॉर्म भी नोटिफाई किए जा चुके हैं। लेकिन जल्दी रिफंड पाने की उम्मीद में जल्दबाजी में रिटर्न भरना इस बार भारी पड़ सकता है।

आइए जानते हैं वे 3 आम गलतियां, जिनकी वजह से AY 2026-27 में आपका इनकम टैक्स रिफंड लेट हो सकता है…

AIS, फॉर्म 26AS और TDS डिटेल्स अपडेट होने से पहले ITR फाइल करना पड़ सकता है भारी

रिफंड में देरी का एक बड़ा कारण AIS, फॉर्म 26AS और TDS सर्टिफिकेट में रिकॉर्ड किए गए टैक्स डेटा को मिलाए बिना बहुत जल्दी फाइल करना है। बैंक, एम्प्लॉयर, म्यूचुअल फंड और दूसरी रिपोर्टिंग एंटिटी फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के हफ्तों बाद तक टैक्स की जानकारी अपडेट करती रहती हैं।

आम तौर पर इन गलतियों की वजह से दिक्कत आती है:

– सैलरी या फिक्स्ड डिपॉजिट का TDS फॉर्म 26AS में न दिखना
– ब्याज से हुई आय (Interest Income) की गलत जानकारी
– म्यूचुअल फंड या शेयरों से हुए कैपिटल गेन में अंतर
– AIS में डुप्लीकेट या अधूरी एंट्रीज़

अगर आप सभी एंट्रीज सही दिखने से पहले अपना रिटर्न फाइल करते हैं, तो आयकर विभाग का सिस्टम आपके ITR और रिकॉर्ड के बीच मिसमैच का पता लगा सकता है।

उदाहरण के लिए अगर आपके एम्प्लॉयर ने TDS काटा है, लेकिन फाइलिंग के समय वह अभी तक Form 26AS में नहीं दिख रहा है, तो हो सकता है कि सिस्टम तुरंत पूरा टैक्स क्रेडिट शुरू न करे, इसलिए आगे की जांच हो सकती है और रिफंड में देरी हो सकती है।

इसलिए टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले सभी टैक्स स्टेटमेंट के पूरी तरह अपडेट और रिकंसाइल होने तक इंतजार करना चाहिए, खासकर सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स को जो Form 16 और AIS डेटा पर निर्भर हैं।

गलत बैंक अकाउंट डिटेल्स डालना

ITR में गलत बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड या बंद अकाउंट की जानकारी देना रिफंड में बड़ी देरी की वजह बन सकता है। कई टैक्सपेयर्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट नहीं करते या PAN से लिंक्ड अकाउंट इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में रिफंड फेल हो सकता है और फिर रिफंड री-इश्यू रिक्वेस्ट डालनी पड़ती है, जिसमें अतिरिक्त समय लगता है।

इसलिए ITR फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका एक्टिव बैंक अकाउंट PAN से लिंक्ड और पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड हो।

इनकम रिपोर्टिंग, डिडक्शन या कैपिटल गेन में अंतर

अगर ITR में दिखाई गई आपकी इनकम, कैपिटल गेन या दूसरे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन AIS और फॉर्म 26AS के डेटा से मैच नहीं करते, तो रिफंड में देरी हो सकती है और टैक्स नोटिस भी आ सकता है।

कई टैक्सपेयर्स गलत ITR फॉर्म चुन लेते हैं। उदाहरण के लिए, एक्टिव या इंट्रा-डे ट्रेडिंग को बिजनेस इनकम माना जाता है, जिसके लिए ITR-3 जरूरी होता है, लेकिन लोग इसे कैपिटल गेन दिखाकर गलत फॉर्म भर देते हैं। ऐसे मिसमैच पर सिस्टम ऑटोमैटिक नोटिस भेज सकता है।

हालांकि, गलती होने पर रिवाइज्ड रिटर्न या ऑनलाइन रेक्टिफिकेशन के जरिए इसे सुधारा जा सकता है।

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आयकरदाताओं के लिए यह खबर बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (AY 2026-27) यानी फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए सभी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं। विभाग ने ITR-1 से ITR-4 फॉर्म 30 मार्च को जारी किया था, जबकि ITR-2, ITR-3, ITR-5, ITR-6, ITR-7 और अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने के लिए ITR-U फॉर्म 12 मई को नोटिफाई किए गए।

अब रिटर्न फाइलिंग सीजन शुरू हो चुका है और ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों को उनका Form-16 भी मिलना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि त्रुटियों से बचने के लिए अंतिम समय में फॉर्म भरने से बचें। यहां पढ़ें पूरी खबर…

[ डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और यह कोई प्रोफेशनल टैक्स सलाह नहीं है। टैक्स कानून और सिस्टम सरकार द्वारा बार-बार बदले जाते हैं। पढ़ने वालों को कोई भी फाइनेंशियल फैसला लेने से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिशियल नोटिफिकेशन से डिटेल्स वेरिफाई कर लेनी चाहिए या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेनी चाहिए। ]