ताज़ा खबर
 

‘बैंक हड़ताल से एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के लेनदेन पर असर’

हड़ताल से नकदी जमा कराने और निकासी के लिए चेक समाशोधन का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई स्थानों से एटीएम में भी नकदी नहीं होने की खबरें मिली हैं।

Author नई दिल्ली | February 28, 2017 8:08 PM
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) की अपील पर एक दिनी राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान इलाहाबाद में इलाहाबाद बैंक की एक शाखा पर तैनात सुरक्षाकर्मी। (PTI Photo/28 Feb, 2017)

उद्योग मंडल एसोचैम ने मंगलवार (28 फरवरी) को कहा कि सरकारी बैंकों की एक दिन की हड़ताल से करीब 1.3 लाख करोड़ रुपए का फॉरेक्स और अन्य समाशोधन कारोबार प्रभावित हुआ। एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा, ‘अखिल भारतीय स्तर की बैंक हड़ताल से करीब 1,600 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं दिये जा सकने का अनुमान है।’ उन्होंने कहा कि केंद्र को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए जिससे बढ़ती गैर-निष्पादित आस्तियों पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही निचले स्तर के ऋण उठाव को सुधारा जाना चाहिए। हड़ताल की वजह से सरकारी बैंकों की शाखाएं आज (मंगलवार, 28 फरवरी) या तो बंद रहीं या उनमें कोई कामकाज नहीं हुआ। हड़ताल से नकदी जमा कराने और निकासी के लिए चेक समाशोधन का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई स्थानों से एटीएम में भी नकदी नहीं होने की खबरें मिली हैं।

यूनियनों की हड़ताल से सरकारी बैंकों में कामकाज पर असर, एटीएम में भी नकदी नहीं

बैंक यूनियनों के एक वर्ग की हड़ताल के कारण मंगलवार (28 फरवरी) को सरकारी बैंकों की तमाम शाखाएं या तो बंद रहीं या उनमें काम कामकाज नहीं हुआ। देश के विभिन्न स्थानों से एटीएम में नकदी नहीं होने की खबरें मिली हैं। ऑल इंडिया बैंक इम्पलॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने हड़ताल के सफल रहने का दावा करते हुए कहा कि सभी शाखाएं आज (मंगलवार, 28 फरवरी) बंद रहीं। एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि लोग बैंकों में किसी तरह का लेनदेन मसलन पैसा जमा कराना या निकालना या किसी तरह का अन्य कामकाज नहीं कर पाए। सरकारी खजाने का लेनदेन भी संभवत: नहीं हुआ। आयात और निर्यात लेनदेन प्रभावित हुआ। मनी मार्केट में भी परिचालन नहीं हुआ। मनी ट्रांसफर और नकदी का हस्तांतरण भी नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने मंगलवार (28 फरवरी) को अपना परिचालन खुला रखा था लेकिन कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने की वजह से समाशोधन का काम भी नहीं हो पाया।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन (यूएफबीयू) के तहत कुछ निजी क्षेत्र के बैंक भी हड़ताल में शामिल हुए। बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगों मसलन बढ़ते डूबे कर्ज के लिए शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, श्रम सुधारों का विरोध तथा स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया था। करूड़ वैश्य बैंक और फेडरल बैंक ने कहा कि बैंक की स्टाफ यूनियन और ऑफिसर्स एसोसिएशन यूएफबीयू के बैनर तले हड़ताल में हिस्सा ले रही हैं। फेडरल बैंक ने कहा कि बैंक की शाखाओं पर संभवत: नियमित कामकाज प्रभावित हुआ। लेकिन उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक के एटीएम और डिजिटल चैनल काम कर रहे हैं। निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एक्सिस बैंक हड़ताल में शामिल नहीं हुए। वेंकटचलम ने कहा कि कई स्थानों पर एटीएम में पैसा नहीं होने की खबर है। वहीं कुछ बैंकों के पास एटीएम के लिए काफी कम नकदी है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) की अपील पर इस हड़ताल से विभिन्न बैंकों की शाखाओं में धन के नकद जमा और आहरण तथा चेकों के समाशोधन का काम बुरी तरह प्रभावित बताया गया। यूएफबीयू में नौ बैंक यूनियनें शामिल हैं जिनमें भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से संबंधित नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) तथा नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफीसर्स (एनओबीओ) भी हैं लेकिन बीएमएस से संबद्ध ये दोनों ही संगठन आज (मंगलवा, 28 फरवरी) की हड़ताल में शामिल नहीं हैं। वेंकटचलम ने कहा, ‘प्रबंधकों और आईबीए (इंडियन बैंक्स एसोसिएशन) की हठधर्मिता और संवेदनहीनता के कारण हमें इस हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन लोगों ने नोटबंदी के दौरान बैंक कर्मियों की ओर से अतिरिक्त समय तक दी गयी सेवाओं के लिए अलग से भुगतान किए जाने की हमारी मांग पर बातचीत करना भी उचित नहीं समझा।’

बीएमएस से सम्बद्ध एनओबीडब्ल्यू के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा, ‘यह हड़ताल अनावश्यक थी क्योंकि आईबीए ने मार्च के पहले सप्ताह में यूनियनों को बातचीत के लिए बुला रखा है और ग्रैच्युटी के बारे में भी सरकार ने मानसून सत्र में कानून में संशोधन का आश्वासन दे रखा है। हड़ताल टाली जा सकती थी।’ भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक हैं। इनका कुल बैंकिंग सेवा बाजार के तीन चौथाई कारोबार पर नियंत्रण है।

SBI के ATM से निकले 2000 रुपए के ‘चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया’ के नोट

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App