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अनलॉकडाउन में राहत नहीं मिलने से बिहार के व्‍यापारी असंतुष्‍ट

बिहार में लाकडाउन जैसा ही अनलाकडाउन है। कोई खास बदलाव व छूट के बगैर ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कह दिया " लाकडाउन राज्य में 9 जून से खत्म किया जा रहा है

सांकेतिक फोटो।

बिहार में लाकडाउन जैसा ही अनलाकडाउन है। कोई खास बदलाव व छूट के बगैर ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कह दिया ” लाकडाउन राज्य में 9 जून से खत्म किया जा रहा है। हालांकि यह नियम अगले एक हफ्ते के लिए ही है। क्योंकि पूरी तरह से कोरोना का खतरा टला नहीं है। लाॅकडाउन के दौरान राज्य में सुबह 5 बजे से 2 बजे तक बाजार खोलने की अनुमति थी। अब उसे बढ़ाकर शाम 5 बजे तक किया गया है। साथ ही निजी वाहनों से यात्रा करने पर रोक हटाई गई है। व्यापारी इस छूट पर सवाल उठा रहे हैं। क्या सुबह 5 बजे जूते-चप्पल या कपड़े की दुकानें खोली जा सकती है। इतनी सुबह न कर्मचारी आते हैं और न ग्राहक।

मगर जारी दिशानिर्देश के मुताबिक दुकानों का वर्गीकरण कर एक दिन छोड़कर खोलने की अनुमति बरकरार रखी गई है। स्कूल-कालेज, कोचिंग, संस्थान, माल, सिनेमा हॉल, धार्मिक स्थल,क्लब, जिम, पार्क , उद्यान पहले की तरह बंद रहेंगे। सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक आयोजन पर पाबंदी जारी रहेगी। शादी और श्राद्ध में 20 से ज्यादा लोगों के शामिल होने पर प्रतिबंध पूर्व की तरह कायम रखा गया है। साथ ही शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 5 बजे तक 10 घंटे का कर्फ्यू लगा रहेगा। फल-सब्जी, मांस-मछली, किराना-दूध, दवा दुकानें रोजाना खुलेगी। होटल-रेस्टुरेंट होम डिलीवरी के लिए खुले रह सकते हैं। ग्राहकों को बैठाकर खिलाने पर रोक जारी है।

पहले की तरह राज्य के ज़िलों में धारा 144 लागू रहेगी। बाजार शाम 5 बजे तो सरकारी कार्यालय शाम 4 बजे तक खुलेंगे। वह भी 50 फीसदी हाजिरी के साथ। लाकडाउन में कर्मचारियों की उपस्थिति 25 फीसदी ही थी।

ईस्टर्न बिहार चेंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अशोक भिवानीवाला बताते हैं कि लाकडाउन में भी एक दिन छोड़कर और सुबह 5 बजे से 2 बजे तक दुकानें खोलने की इजाजत थी। अब तीन घंटे बढाकर शाम 5 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। मगर सुबह 5 बजे न कर्मचारी और न ही ग्राहक आते हैं। ऐसे में व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। यदि यह समय सुबह आठ बजे से शाम 7 बजे भी होता तो राहत मिलती। फल-सब्जी बगैरह खाने के सामान बेचने का समय ठीक माना जा सकता है। मगर कपड़े, जूता-चप्पल, सेनेटरी सामान बगैरह के लिए उचित नहीं है। बिहार चेंबर आफ कॉमर्स ने भी इसी तरह छूट की मांग मुख्यमंत्री से की है।

विवाह समारोह और श्राद्ध में 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति बरकरार रखी गई है। डीजे और बैंडबाजे या बारात जुलूस निकालने पर भी रोक जारी रखी गई है। भागलपुर कोतवाली चौक के आजाद बैंड बाजा के मास्टर अब्दुल कहते हैं कि दो जून की रोटी के लिए लाले पड़े हैं। परिवार के 45 सदस्य भुखमरी के शिकार हो गए हैं। सरकार से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। अभी शादी-विवाह का मौसम है। पर सब बेरोजगार हो गए हैं।

आम लोग उलटे सवाल करते हैं कि यह कैसा अनलाकडाउन है? हालांकि राज्य में 11 महीने के बाद सक्रिय मरीजों की संख्या 8 हजार से कम हो गई है। स्वास्थ्य महकमा के मुताबिक मंगलवार 8 जून तक सक्रिय मरीजों का आंकड़ा 7897 बताया गया है। जो बड़ी राहत की बात है। मगर खतरा अभी टला नहीं है। सरकार की कोशिश है कि यह आंकड़ा शून्य हो जाए। इसलिए हल्की ढिलाई के साथ लाकडाउन खत्म करने की ओर बढ़ा गया है। भागलपुर के ज़िलाधीश सुब्रत कुमार सेन बताते हैं। ग़ांव और शहरों में टीकाकरण वाहन घूम रहे हैं। टेस्टिंग का काम भी चल रहा है। इसी का नतीजा है कि विगत 24 घंटे में भागलपुर में केवल छह मरीज ही सामने आए हैं। सरकारी नियमों का पालन करने से ही मामलों पर काबू पाया जा सका है।

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