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दिल्ली में अब आटो परमिट घोटाला

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को आॅटो रिक्शा के नए परमिट देने में अनियमितताओं के लिए शनिवार को निलंबित कर दिया गया..

Author नई दिल्ली | Updated: December 27, 2015 5:10 AM
नई दिल्ली में बारिश के दौरान राजपथ से गुजरता एक ऑटोरिक्शा। (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को आॅटो रिक्शा के नए परमिट देने में अनियमितताओं के लिए शनिवार को निलंबित कर दिया गया। शनिवार सुबह आठ बजे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद परिवहन उपायुक्त एस रॉय बिस्वास, निरीक्षक मनीष पुरी और यूडीसी अनिल यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस मामले को सीबीआइ को सौंपा जाएगा। सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा, ‘यह मामला सीबीआइ को सौंपा जाएगा। यह सरकार किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी’।

वहीं दिल्ली भाजपा ने आटो परमिट देने में हुई गड़बड़ियों के लिए परिवहन मंत्री गोपाल राय के इस्तीफे की मांग की है। परमिट में अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि परमिट घोटाला दिल्ली सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार का जीता जागता सबूत है। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि 23 दिसंबर को मुझे परिवहन विभाग के बुराड़ी प्राधिकरण में ऑटो रिक्शा चालकों को आशयपत्र जारी करने में अनियमितता से जुड़ी कुछ शिकायतें मिली। इसके बाद अगले दिन मैंने संयुक्त आयुक्त (परिवहन) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और मामले की जांच का आदेश दिया।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार शाम कुछ आॅटो रिक्शा चालकों ने मुख्यमंत्री को संदेश भेजकर अनियमितताओं की जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार इसके बाद केजरीवाल ने राय से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि यह मामला पहले से ही उनके संज्ञान में है। अधिकारी ने कहा कि परिवहन मंत्री ने पहले ही मामले की प्रारंभिक जांच करवा ली थी और इसमें दो तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि परिवहन मंत्री के आदेश के बावजूद आशय पत्र कालानुक्रमिक क्रम में सौंपने के बजाय खास चालकों को सौंपे गए और पत्रों को आवेदनकर्ता के बजाय किसी तीसरे आदमी या अनाधिकृत व्यक्ति को दे दिया गया।

उन्होंने बताया कि इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक की। इसके बाद परिवहन विभाग की ओर से अब तक जारी किए गए 932 आशय पत्रों को रद्द करते हुए इन अधिकारियों को निलंबित किया गया। साथ ही आशय पत्र जारी करने के काम पर भी रोक लगा दी गई।

ऑटो चालकों ने की थी शिकायत

  • शुक्रवार शाम कुछ ऑटो रिक्शा चालकों ने मुख्यमंत्री को संदेश भेजकर अनियमितताओं की जानकारी दी। इसके बाद केजरीवाल ने गोपाल राय से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि यह मामला पहले से ही उनके संज्ञान में है।
  • एक अधिकारी ने कहा कि परिवहन मंत्री ने पहले ही मामले की प्रारंभिक जांच करवा ली थी और इसमें दो तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं।
  • प्रारंभिक जांच में पाया गया कि परिवहन मंत्री के आदेश के बावजूद आशय पत्र कालानुक्रमिक क्रम में सौंपने के बजाय खास चालकों को सौंपे गए और पत्रों को आवेदनकर्ता के बजाय किसी तीसरे आदमी या अनाधिकृत व्यक्ति को दे दिया गया।

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