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विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं करने वालों को अंजाम भुगतना होगा: अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन लोगों ने विदेशों में जमा काले धन के बारे में अनुपालन समयसीमा के भीतर घोषणा नहीं की है, उन्हें इसका परिणाम..

Author नई दिल्ली | October 5, 2015 14:03 pm
अरुण जेटली ने कहा कि जिन लोगों ने विदेशों में जमा काले धन के बारे में अनुपालन समयसीमा के भीतर घोषणा नहीं की है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा।(पीटीआई फाइल फोटो)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन लोगों ने विदेशों में जमा काले धन के बारे में अनुपालन समयसीमा के भीतर घोषणा नहीं की है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा क्योंकि सरकार को सूचना के स्वत: आदान-प्रदान के जरिये उनकी संपत्ति के बारे में सूचना मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने योजना का लाभ उठाया है, अब वे आराम से सो सकते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में जिस 6,500 करोड़ रुपए के काले धन का जिक्र किया, वह लीकटेंस्टाइन के एलजीटी बैंक तथा जिनीवा स्थित एसएसबीसी के खाताधारकों से जुड़ा अवैध धन है। वहीं अनुपालन समयसीमा के तहत कुल 3,770 करोड़ रुपए के कालेधन के बारे में जानकारी सामने आयी।

जेटली ने कहा कि सरकार की नीति कर ढांचों को युक्तिसंगत बनाना, कम कमाई करने वाले लोगों के हाथों में और धन पहुंचाना, समाज के हर तबकों द्वारा ‘प्लास्टिक मनी’ के उपयोग को बढ़ावा एवं प्रोत्साहन देना और और उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है जो निरंतर अघोषित आय का उपयोग कर रहे हैं।

अपने फेसबुक पोस्ट में वित्त मंत्री ने घरेलू कालेधन की समस्या से निपटने के लिये सरकार की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने कहा कि एक निश्चित सीमा से ऊपर नकद सौदों के लिये पैन को अनिवार्य बनाकर सरकार इस बुराई से निपटेगी। उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित सीमा से अधिक नकद लेन-देन में पैन कार्ड की अनिवार्यता को देखते हुए सरकार लाभ की स्थिति में है।’’

तीस सितंबर को समाप्त अनुपालन समयसीमा के भीतर विदेशों में पड़ी अघोषित संपत्ति के बारे में की गयी घोषणा का जिक्र करते हुए अरुण जेटली ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने इस अवधि के दौरान संपत्ति की घोषणा की, उनके खिलाफ कालाधन कानून के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी….ये लोग अब चैन की नींद सो सकते हैं।’’

कालाधन कानून के तहत 90 दिन की मिली अनुपालन अवधि का लाभ उठाते हुए 638 लोगों ने 3,770 करोड़ रुपए की अघोषित आय की घोषणा की। जिन लोगों के पास विदेशों में अघोषित संपत्ति है और वे इसकी घोषणा करने में विफल रहे, उनके बारे में जेटली ने कहा, ‘‘उन्हें इस कानून के दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्हें 30 प्रतिशत कर और 90 प्रतिशत जुर्माना देना होगा….साथ ही उनके खिलाफ अभियोजन चलाया जाएगा और जहां उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है। यह भविष्य में भारत से धन के प्रवाह को लेकर एक प्रतिरोधक के रूप में काम करेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘….अत: जिन लोगों के पास विदेशों में अवैध संपत्ति है और जो घोषणा करने में विफल रहे हैं, उन्हें अपने बारे में भारतीय कर प्राधिकरण के पास सूचना आने का जोखिम है।’’

घरेलू कालेधन पर जेटली ने कहा कि इसका बड़ा हिस्सा अब भी भारत में ही है। उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए हमें राष्ट्रीय रुख में बदलाव लाने की जरूरत है जहां प्लास्टिक मुद्रा एक नियम बन जाए और नकद अपवाद।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस समस्या को दूर करने के लिये सरकार इस बदलाव को प्रोत्साहन देने के लिये विभिन्न प्राधिकरणों के साथ काम कर रही है। भुगतान के लिये बड़ी संख्या में ‘गेटवे’ के आने, इंटरनेट बैंकिंग, भुगतान बैंक तथा ई-वाणिज्य कंपनियों से बैंकों के जरिये लेन-देन और ‘प्लास्टिक मनी’ का उपयोग बढ़ेगा।’’

फेसबुक पर ‘राजग सरकार का कालाधन के खिलाफ अभियान’ शीर्षक से अपने पोस्ट में जेटली ने कहा कि जिनेवा स्थित एचएसबीसी बैंक, जिनेवा की सूची के तहत दर्ज राशि तथा अनुपालन खिड़की के जरिये घोषित आय की तुलना घरेलू कालेधन से संबद्ध छूट योजनाओं से करना उचित नहीं है।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘एचएसबीसी में 6,500 करोड़ रुपए की आकलित आय तथा अनुपालन सुविधा के दौरान 3,770 रुपए की घोषित आय को किसी क्षमादान योजना के तहत आय नहीं मानी जानी चाहिए। घरेलू कालाधन के लिये क्षमदान योजना तथा उक्त राशि की तुलना ठीक नहीं है। घरेलू कालाधन की समस्या से अलग से निपटा जाएगा और इसके लिये स्वतंत्र रूप से कदम उठा रही है।’’

मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में कहा था कि सरकार कालेधन की समस्या से निपटने के लिये सरकार का प्रयास जारी है और लोगों ने 6,500 करोड़ रुपए की अघोषित आय के बारे में जानकारी दी है। यह धन सरकारी खजाने में आएगा और इसका उपयोग गरीबों की भलाई के लिये किया जाएगा।’

विदेशी काला धन पर अनुपालन के लिए इसी तीस सितंबर को समाप्त हुई 90 दिन की समयसीमा में 3,770 करोड़ रुपए की घोषित आय के बाद कुछ तबकों की तरफ से यह आलोचना की गयी कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जो राशि बतायी, वह घोषित राशि से कम है।

जेटली ने कहा कि पूर्व में कर की ऊंची दर से कर चोरी को प्रोत्साहन मिला। उन्होंने कहा, ‘‘अफसोस की बात है कि पूर्व की हमारी कर प्रणाली से कर चोरी को बढ़ावा मिला। जब राज्य अपने लोगों से यथोचित कर लेता है, वे अपनी आय के बारे में ईमानदारी से जानकारी देते हैं। देश में आजादी के बाद शुरुआती दशकों में कर की दरें काफी ऊंची थी, इससे लोग कर चोरी का रास्ता अपनाया। वहीं कर चोरी का पता लगाने के मामले में राज्य की क्षमता सीमित थी।’’

जेटली ने कहा कि धीरे-धीरे भारत कर की नरम दर की ओर आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘‘राजग सरकार की यह रणनीति है कि छूट सीमा बढ़ाकर तथा राजकोषीय नीति के जरिये बचत को प्रोत्साहित कर मध्यम और कम आय वाले समूह के पॉकेट में ज्यादा-से-ज्यादा धन रखा जाए। इससे खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में और धन आएगा। खपत बढ़ाने से अप्रत्यक्ष कर की मात्रा बढ़ती है।’’

जेटली ने कहा कि भारत को निवेश का अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने के लिये सरकार अगले चार साल में कंपनी कर घटाकर 25 प्रतिशत प्रतिशत करने तथा सभी प्रकार की छूटें समाप्त करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विदेशों में रखे गये कालेधन के खिलाफ अपने अभियान में सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिये रणनीति तैयार की है और राजग सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कालेधन के खिलाफ अभियान पर नजर रखने के लिये विशेष जांच दल गठित कर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को क्रियान्वित किया गया।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि वहीं पूर्व संप्रग सरकार विभिन्न कारणों का हवाला देकर तीन साल तक उच्चतम न्यायालय के निर्देश के क्रियान्वियन से बचती रही। उन्होंने कहा कि कर चोरी के मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिये सरकार ने कई कदम उठाये हैं।

जेटली ने कहा, ‘‘प्रधानममंत्री ने देश के निवासियों द्वारा विदेशों में रखे गये कालेधन से निपटने के लिये जी-20 बैठक में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिये पहल की। जी-20 पहल का मकसद बैंकिंग लेन-देन में गोपनीयता को खत्म करना तथा घरेलू कर अधिकारियों को देश के नागरिकों के सौदों के बारे में तत्काल जानकारी उपलब्ध कराना है।’’

भारत सरकार ने अमेरिका के विदेश खाता कर अनुपालन कानून (एफएटीसीए) के तहत उसके साथ परस्पर सहयोग के करार पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके तहत भारत और अमेरिका अपने-अपने नागरिकों द्वारा एक दूसरे के यहां क्षेत्र में किये गये सौदों के बारे में वास्तविक समय में जानकारी देंगे।

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