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सिंचाई के लिए हर तरह की मदद देंगे किसानों को: जेटली

जेटली ने कहा कि केंद्र ने सिंचाई आधारभूत ढांचा तैयार करने और उसमें सुधार के लिए अपना योगदान किया है तथा नाबार्ड को बड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त कोष बनाने को कहा गया है।

Author नई दिल्ली | April 4, 2016 22:51 pm
वित्त मंत्री अरुण जेटली। (पीटीआई फोटो)

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ग्रामीण भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने और अगले कुछ वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने के केंद्र के लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम करने की सोमवार को वकालत की। इसके लिए सिंचाई को मुख्य उपकरण बताते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मुकाबले सिंचाई परियोजनाएं वृद्धि के लिहाज से तत्काल नतीजे देती हैं।

जेटली ने चौथे भारत जल सप्ताह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अनियमित मौसम सहित दूसरी वजहों से आने वाली चुनौतियों से राज्य सरकारें अकेले मुकाबला नहीं कर सकतीं और वादा किया कि केंद्र उन्हें ऐसे प्रयासों में मदद करेगा। जेटली ने कहा कि पूरी कवायद का मकसद यह है कि जब मानसून कमजोर हो, तब भी बारिश पर निर्भर क्षेत्र वंचित नहीं रहें, उन्हें तब भी अच्छी फसल का लाभ मिले और यही इसका सार तत्व होने वाला है।

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की ओर से योगदान दिया जाएगा और इसलिए आज हमारे मूल लक्ष्यों में से एक लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में ग्रामीण आबादी की आय दोगुनी करना है। अगर उसे दोगुना करना है तो इसके लिए सिंचाई सहित विभिन्न उपकरण हैं जिनका उपयोग हम यह सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं कि संसाधनों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में हो। जेटली ने कहा कि पिछले दो साल मानसून के कमजोर रहने के कारण काफी चुनौतीपूर्ण रहे। उन्होंने कहा कि इस कारण अर्थव्यवस्था में काफी मामूली वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति का असर सेवा और विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ा क्योंकि इसने भारत की 55 फीसद आबादी की क्रय शक्ति को प्रभावित किया। उन्होंने पानी के संरक्षण और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई परियोजनों के सृजन की आवश्यकता को रेखांकित किया। जेटली ने कहा कि सिंचाई पूरी तरह से राज्य का विषय है और केंद्र राज्यों को ऐसी परियोजनाएं पूरा करने के लिए मदद देगा ताकि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। अपने संबोधन में जेटली ने शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई परियोजनाओं और उसके बाद हासिल कृषि विकास के लिए गुजरात व मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा- सिंचाई में निवेश से आपको लगभग तुरंत नतीजे मिलते हैं। अगर आप राजमार्ग, सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डा, बिजली आदि के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हैं तो विकास व विनिर्माण में यह योगदान दे, इसका असर दिखने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई ऐसा क्षेत्र है जहां आपने अगर अभी निवेश किया तो आप अगले सीजन में इसका असर देख सकते हैं। इसलिए जिन राज्यों ने सिंचाई में निवेश किया है, उन्होंने वास्तव में विकास प्रक्रिया में योगदान किया है।

जेटली ने कहा कि केंद्र ने सिंचाई आधारभूत ढांचा तैयार करने और उसमें सुधार के लिए अपना योगदान किया है तथा नाबार्ड को बड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त कोष बनाने को कहा गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अधूरे कार्यों को 2017 तक जल्दी पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जहां तक सेवा क्षेत्र का सवाल है, भारतीय अर्थव्यवस्था ‘‘काफी अच्छा’’ कर रही है।  वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि मांग की समस्या दुनिया भर में है, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र धीरे धीरे गति पकड़ रहा है। जेटली ने अफसोस जताया कि देश ने पानी के संरक्षण पर जोर नहीं दिया और कई नदियां सूख रही हैं। उन्होंने जल संरक्षण प्रयास शुरू करने का सुझाव दिया।

इस सत्र में केंद्रीय मंत्रियों उमा भारती, बीरेंद्र सिंह, राधा मोहन सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, सांवर लाल जाट, इजराइल के कृषि मंत्री उरी एरियल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उमा भारती ने देश भर में भूमिगत जल स्तर में सुधार के लिए बजटीय आवंटन 60 करोड़ रुपए से बढ़ा कर 6000 करोड़ रुपए करने के केंद्र के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2107 तक राज्यों के साथ 40 सिंचाई परियोजनाएं पूरा करेगा, जबकि पहले 23 ऐसी परियोजनाओं को पूरा करने का फैसला किया गया था।

उन्होंने जल सप्ताह के लिए भारत के सहयोगी इजराइल की भी जल प्रबंधन के क्षेत्र में कामयाबी के लिए सराहना की और कहा कि वह गुरु है जो दुनिया को सिखा सकता है कि किस प्रकार पानी बचाया जाए। एरियल ने आश्वासन दिया कि उनका देश पानी से जुड़े मुद्दों और प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए भारत के साथ सहयोग करेगा।

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