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वित्त मंत्री जेटली बोले, कर्ज महंगा होने अर्थव्यवस्था धीमी पड़ेगी

अरुण जेटली ने कहा, ‘‘भारत वृद्धि दर्ज कर रहा है इसलिए सामाजिक सुरक्ष के मानक बढ़ने चाहिए। सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण तत्व है भारत को पेंशन आधारित समाज बनाना।’’

Author नई दिल्ली | Updated: March 29, 2016 2:29 AM
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (पीटीआई फाइल फोटो)

पीपीएफ और डाकघर आधारित लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को कम करने के हाल के निर्णय को उचित ठहराते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत में ब्याज दरों का स्तर असाधारण रूप से ऊंचा है और यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं तो भारत की अर्थव्यवस्था के सबसे सुस्त अर्थव्यवस्था बन जाने का खतरा है। जेटली ने कहा, ‘‘अल्प बचत योजनाओं पर मौजूदा 8.7 प्रतिशत की कर-मुक्त ब्याज दर अंत में वास्तव में 12-13 प्रतिशत बैठती है। इसके अनुरूप कर्ज की दर तरह ब्याज दर 14-15 प्रतिशत तक होगी क्यों कि रिण पर ब्याज जमाओं पर ब्याज से कुछ ऊपर ही रहता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ लघु बचतों पर भारत की ब्याज दरें असाधारण रूप से ऊंची हैं। ब्याज दर ऊंची होने से वृद्धि अवरुद्ध होती है। ’’
लोकभविष्य निधि (पीपीएफ) निवेशों पर 8.7 प्रतिशत कर मुक्त ब्याज दर की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि कर लाभ को भी मिलाकर देखें तो इस पर ब्याज दर वास्तव में 12.5- 13 प्रतिशत बैठती है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में आपको कहां 12.5 प्रतिशत ब्याज का प्रतिफल मिलता है। इसलिए यदि जमा दर 12.5 प्रतिशत हुई तो रिण दर क्या होगी, 14-15 प्रतिशत..? यदि रिण पर ब्याज दर 14-15 प्रतिशत हो तो आप दुनिया की सबसे सुस्त अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।’’

जेटली ने कहा कि किसी भी देश में ऐसा नहीं हो सकता कि रिण पर ब्याज जमा दरें से कम हों और जमा पर ब्याज ऊंचा हो। दोनों एक-दूसरे जुड़े हैं। गौर तलब है कि सरकार ने 18 मार्च को पीपीएफ पर ब्याज दर घटाकर 8.1 प्रतिशत, किसान विकास पत्र पर ब्याज दर 8.7 प्रतिशत से घटाकर 7.8 प्रतिशत, सुकन्या समृद्धि योजना के खातों पर ब्याज 9.2 प्रतिशत से घटाकर 8.6 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर ब्याजदर 9.3 प्रतिशत से घटाकर 8.6 प्रतिशत करने की घोषणा की जो एक अप्रैल से लागू होंगी।

इस सवाल पर कि क्या यह अलोकप्रिय फैसला नहीं है, तो वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘यदि आज रिण पर ब्याज दर 14-15 प्रतिशत रहती है तो यह सबसे अलोकप्रिय फैसला होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था को नष्ट करना सबसे अलोकप्रिय बात होगी। दीर्घकालिक रूप से कम ब्याज दर सभी के हित में है।’’ उन्होंने उल्टा सवाल किया, ‘ जब कोई व्यक्ति आवास रिण लेने के लिए बैंक में जाता है तो उसे कर्ज नौ प्रतिशत पर मिलना चाहिए या 15 प्रतिशत पर?… कौन सा फैसला अलोकप्रिय माना जाएगा।’’

जेटली ने कहा कि भारत में कई तरह की योजनाएं रखनी जरूरी हैं जिनमें अलग-अलग ब्याज दरें हों। उन्होंने कहा, ‘‘8.1 प्रतिशत की ब्याज दर भी एक अच्छी ब्याज दर। दुनिया में किसी और जगह से बेहतर है क्योंकि यह कर मुक्त है। 8.1 प्रतिशत कर मुक्त ब्याज दर वास्तविक रूप से 12.2 प्रतिशत है। यह कोई छोटी ब्याज दर नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को एक ऐसी व्यवस्था करनी है जिसमें ब्याज दर और तर्कसंगत हो सके और बैंक उसका का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘और आप यह भी न भूलें कि जब आपको 8.7 प्रतिशत ब्याज दर मिलती थी तब मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत थी। मुद्रास्फीति अब पांच प्रतिशत से नीचे है तो असल में आपको मिलने वाली वास्तविक ब्याज दर बढ़ गयी है।’’ जेटली ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की 60 प्रतिशत राशि पर कर लगाने का उद्देश्य था लोगों को कुल राशि निकालने के प्रति हतोत्साहित करना। इसका लक्ष्य था लोगों को कर मुक्त पेंशन योजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना ताकि भारत को पेंशन आधारित समाज बनाया जा सके। चौतरफा आलोचना के बीच इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत वृद्धि दर्ज कर रहा है इसलिए सामाजिक सुरक्ष के मानक बढ़ने चाहिए। सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण तत्व है भारत को पेंशन आधारित समाज बनाना।’’ उन्होंने कहा कि ईपीएफ से निकासी पर कर का मूल प्रस्ताव था, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को ऐसी प्रणाली में तब्दील करना कि आय अर्जि करने वाली अवधि में आप योगदान करते हैं और आपको सेवानिवृत्ति पर कर रियायत मिलती है। आपको अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों पूरी करने के लिए एकमुश्त बड़ी राशि मिलती है जो कर मुक्त होती है। शेष 60 प्रतिशत एन्यूइटी हो जाती है और यह भी करमुक्त है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपके उत्तराधिकारियों को जो विरासत में मिलेगा वह भी कर मुक्त होगा। मैंने सिर्फ यही बदलाव किया कि लोगों को पूरी राशि एक साथ खर्च करने के प्रति हतोत्साहित किया। इसलिए यदि आप पूरी राशि एक बार में खच करना चाहते हैं तो आपको 60 प्रतिशत कर अदा करना होगा।’’

जेटली ने कहा कि ईपीएफ से निकासी को फिर से कर मुक्त बना दिया गया है पर और यही सुविधा अब एनपीएस में भी करमुक्त निकासी की सुविधा दे दी गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘और मेरा मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एनपीएस को अपनाना चाहिए। एनपीएस का मतलब अन्य विकसित देश की तरह व्यवस्था से है जिसमें आप आय अर्जित करने की उम्र में (पेंशन कोष में) योगदान करते हैं और सेवानिवृत्ति पर आपको कुछ एकमुश्त राशि मिलती है और फिर आप को मासिक पेंशन मिलती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि लोगों को सेवानिवृत्त के बाद अपनी मासिक पेंशन का इंतजाम करना चाहिए और इस लिहाज से मुझे ईपीएफ योजना के बारे में भी कोई अफसोस नहीं है।’’ मंत्री ने कह कि कई लोगों ने उन्हें कहा कि यह दरअसल अच्छी योजना है। उन्होंने कहा, ‘‘साल भर बाद मैं यह बताऊंगा कितने लोगों ने एनपीएस का विकल्प चुना। ध्यान रहे, एनपीएस सरकार की किसी भी अन्य योजना के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफा दे रही है।’’

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