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जेटली को इस सत्र में जीएसटी पारित होने की उम्मीद कम

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को संकेत दिया कि हो सकता है संसद के मौजूदा सत्र में सरकार वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित न करा पाए लेकिन दिवालिया विधेयक को राज्यसभा में पेश करेगी..

Author नई दिल्ली | December 20, 2015 12:15 AM
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (FILE)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को संकेत दिया कि हो सकता है संसद के मौजूदा सत्र में सरकार वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित न करा पाए लेकिन दिवालिया विधेयक को राज्यसभा में पेश करेगी। जीएसटी पारित कराने में देरी के लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को भारत को आर्थिक नरमी के दौर में देखने में परपीड़ा का सुख मिलता है। लेकिन इसके कारण देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बुधवार को खत्म हो रहे शीतकालीन सत्र के आखिरी तीन दिन में राज्यसभा में मध्यस्थता व सहमति विधेयक और वाणिज्यिक अदालत संबंधी विधेयक को आगे बढ़ाएगी।

उद्योग मंडल फिक्की की 88वीं सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि जीएसटी में देरी किसी और वजह से कराई जा रही है। और वजह सिर्फ यह है कि हम नहीं कर सके तो दूसरे को ऐसा क्यों करना चाहिए? उन्होंने कहा कि दोषपूर्ण जीएसटी लागू करने के बजाय देर से लाया गया उचित जीएसटी ही बेहतर होगा। उन्होंने कहा- वह अभी भी विपक्ष से अपील करेंगे कि वे जीएसटी विधेयक में शुल्क दर को संविधान में शामिल करने की अपनी जिद छोड़ दें। संविधान में शुल्क का उल्लेख भावी पीढ़ी की गर्दन पर बोझ होगा।

इस बीच, कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि जीएसटी इस सत्र में पारित नहीं होने जा रहा है। यह सही समय नहीं है। एक अप्रैल, 2016 से लागू करने का समय कोई अटल नहीं है। जीएसटी विधेयक राज्यसभा में अटका है। वहां सत्तारूढ़ राजग सरकार के पास बहुमत नहीं है। कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। सरकार ने एक अप्रैल, 2016 से जीएसटी लागू करने की योजना बनाई थी। यह पूछने पर कि क्या कांग्रेस दिवालिया विधेयक का समर्थन करेगी, शर्मा ने कहा- जो भी जरूरी है, उपयुक्त है, हम इसे पारित कराए जाने के पक्ष में हैं।

आनंद शर्मा ने उम्मीद जताई कि जीएसटी हकीकत बनेगा लेकिन सरकार को देशहित में विपक्षी दलों की चिंता का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा- विपक्षी पार्टी का सहयोग कोई रबर स्टांप की तरह नहीं कि सरकार जो चाहती हो, वही वे करें। हमने जीएसटी तैयार किया और देश के पास वस्तु व सेवा कर होगा।

जेटली ने कहा कि बुधवार को खत्म हो रहे शीतकालीन सत्र के आखिरी तीन दिन काफी अहम हैं। ये बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। मैं इन तीन दिन में कुछ सुधारों को आगे बढ़ाने की कोशिश करूंगा। ये महत्त्वपूर्ण सुधार हैं जिसकी हम कोशिश करेंगे। मुझे उम्मीद है कि कोई भी फिर से ‘लेकिन’ शब्द के जरिए देश के हित को प्रभावित नहीं करेगा। लोकसभा ने वाणिज्यिक अदालतें, हाई कोर्टों में वाणिज्यिक प्रभाग व वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग विधेयक और मध्यस्थता व सहमति (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया है। उन्होंने कहा- यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि जीएसटी अच्छा है। हम जीएसटी प्रस्ताव लेकर आए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि जहां तक भारतीय राजनीति का सवाल है यह ‘लेकिन’ बड़ा खतरनाक शब्द है। इस विधेयक को स्वतंत्रता के बाद से अब तक अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में सुधारों की सबसे बड़ी पहल माना जा रहा है।

वैश्विक बाजारों में जिंसों की कम कीमत के बारे में उन्होंने कहा कि वस्तुओं के दाम कम रहना ऐसा दौर है जो भारत के लिए आमतौर पर अनुकूल है। यह जितना लंबा खिंचता है, उतना बेहतर होगा। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए कच्चे तेल में नरमी से देश की वित्तीय स्थिति में मदद मिलती है। उन्होंने कहा- हमारा आयात बिल कम हुआ है। धन का बड़ा हिस्सा जो हमने अर्जित किया, उसका उपयोग दूसरी जगह किया गया। तेल कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई करने में कामयाब रहीं। इसी वजह से वैश्विक नरमी के विपरीत हालात के बावजूद हमारे वित्तीय आंकड़े इतने अच्छे कभी नहीं रहे।

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