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बजट 2016: सरकार चली गांव की ओर, गरीब किसान से प्यार, मध्य वर्ग पर मार

पहली बार मकान खरीदने वालों को 35 लाख रुपए तक के कर्ज पर 50,000 रुपए सालाना अतिरिक्त ब्याज छूट का लाभ मिलेगा। लेकिन इसके लिए शर्त है कि मकान का मूल्य 50 लाख रुपए से अधिक नहीं हो।

Author नई दिल्ली | March 1, 2016 02:43 am
लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अरुण जेटली। (पीटीआई फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि सोमवार को उनकी भी परीक्षा होगी। उनका आशय वित्त वर्ष 2016-17 के आम बजट से था। कारपोरेट और मध्य वर्ग के चेहरों पर बेशक मुस्कान न आई हो पर गरीब और किसान की नजर में जरूर मोदी पास हुए हैं। बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक तरफ ढांचागत और सामाजिक क्षेत्र को तरजीह दी तो दूसरी तरफ इस बार सारा फोकस गरीब और किसान पर ही रखा है। तंबाकू उत्पादों पर महंगाई की मार फिर पड़ी है तो डायलसिस के उपकरण सस्ते किए गए हैं।

लेकिन महंगी कार खरीदने वालों को ज्यादा रजिस्ट्रेशन टैक्स के अलावा टीडीएस भी देना पड़ेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ने से उनकी सेहत बिगड़ रही है। पर जेटली ने उनके लिए 25 हजार करोड़ रुपए के बजट का बंदोबस्त कर साफ कर दिया है कि सरकार देश के आर्थिक विकास में उनकी अहमियत को नजरअंदाज नहीं कर सकती। रोजगार बढ़ाने के लिए कौशल विकास के कार्यक्रम पर बजट में पूरा ध्यान दिया गया है। साथ ही अपने उद्यम लगाने वालों को भी प्रोत्साहन दिया है।

बिहार विधानसभा चुनाव के प्रतिकूल नतीजों से शायद सरकार ने सबक लिया है। विधानसभा चुनाव तो इस साल और अगले साल बजट से पहले और भी कई राज्यों में होंगे। इस नाते मोदी सरकार को पूंजीपतियों की हितैषी बताने वालों को जेटली ने जुबान खोलने का मौका ही नहीं दिया। शहरी आबादी, रईसों और कारपोरेट को छोड़ मोदी सरकार इस बार बजट में गांव-खेती और गरीब की चिंता करती दिखी है। किसी खास तबके को खुश करने के लिए रेवड़ियां भले न बांटी हों पर आर्थिक विकास में ढांचागत क्षेत्र के महत्व को स्वीकारा है। साथ ही आम आदमी पर किसी तरह का बोझ बढ़ाने के बजाए उसकी बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट आबंटन बढ़ाया है।

जहां एक तरफ आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाई वहीं एक करोड़ रुपए से अधिक की कमाई करने वालों पर अधिभार तीन फीसद बढ़ाने का प्रस्ताव कर दिया। साथ ही यात्री कारों पर अलग-अलग दर से प्रदूषण उपकर व देश में कालाधन रखने वालों के लिए 45 फीसद कर और जुर्माने के साथ एक बारगी अनुपालन खिड़की का प्रस्ताव किया गया है। अपने तीसरे बजट में जेटली ने खेती, किसान, गरीब और गांव की सबसे ज्यादा चिंता की है। कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सभी कर योग्य सेवाओं पर 0.5 फीसद ‘कृषि कल्याण’ उपकर लगाने का भी प्रस्ताव किया। साथ ही शीत गृह, रेफ्रिजरेटेड कंटेनर्स व अन्य वस्तुओं पर परियोजना आयात पर शुल्क में छूट की घोषणा की। सिगरेट और तंबाकू उत्पाद अब और भी महंगे होंगे। इस पर उत्पाद शुल्क 10 से 15 फीसद बढ़ाया गया है। पर गरीब के इस्तेमाल वाली बीड़ी को इससे मुक्त रखा है।

बजट में 2016-17 में रक्षा क्षेत्र के लिए 162,759 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो चालू वर्ष के संशोधित अनुमान 143,236 करोड़ रुपए से 13 फीसद अधिक है। रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय मद में 86,340 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है जो चालू वर्ष में संशोधित अनुमान के अनुसार 81,400 करोड़ रुपए था। ब्याज भुगतान के लिए 492,670 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो चालू वर्ष में 442,620 करोड़ रुपए था। सबसिडी 2016-17 में थोड़ा कम रहेगा। इसके 250,433 करोड़ रुपए रहने का प्रस्ताव किया गया है जो चालू वर्ष में संशोधित अनुमान 257,801 करोड़ रुपए से मामूली कम है।

छोटे करदाताओं को राहत देते हुए बजट में पांच लाख रुपए तक सालाना आय वालों के लिए धारा 87 (ए) के तहत कर छूट सीमा 2,000 रुपए से बढ़ा कर 5,000 रुपए करने का प्रस्ताव किया गया है। बकौल जेटली इस श्रेणी में दो करोड़ करदाता हैं जिन्हें कर देनदारी में 3,000 रुपए की राहत मिलेगी। जिनके पास अपना मकान नहीं है और नियोक्ताओं से एचआरए भी नहीं मिलता है, उन्हें 60,000 रुपए का छूट मिलेगा जो फिलहाल 24,000 रुपए है।

पहली बार मकान खरीदने वालों को 35 लाख रुपए तक के कर्ज पर 50,000 रुपए सालाना अतिरिक्त ब्याज छूट का लाभ मिलेगा। लेकिन इसके लिए शर्त है कि मकान का मूल्य 50 लाख रुपए से अधिक नहीं हो। जिन पेशेवरों की सकल प्राप्ति 50 लाख रुपए तक है, उन्हें यह मानते हुए कि उनका लाभ 50 फीसद रहता है, अनुमान के आधार पर कराधान की योजना के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया गया है।

जेटली ने देश में कालाधन और बिना हिसाब-किताब वाली संपत्ति रखने वालों के लिए सीमित अवधि में कर अनुपालन का अवसर देने भी पेशकश की है ताकि वे अपनी अघोषित आय एवं संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत कर सकें। ऐसे लोग पर आय के 30 फीसद के बराबर कर के साथ 7.5 फीसद जुर्माना व 7.5 फीसद ब्याज यानी कुल 45 फीसद का भुगतान कर नियमों के उल्लंघन के दायरे से बाहर निकल आएं। इस आवधि में अपने धन संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ उस धन-संपत्ति को लेकर आयकर व संपत्ति कर कानून के तहत कोई जांच नहीं होगी और अभियोजन से छूट मिलेगी।

घरेलू कालेधन की घोषणा के लिए इस सीमित अवधि की नई योजना के तहत 7.5 फीसद अधिभार को कृषि कल्याण अधिभार कहा जाएगा और उसका उपयोग कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा- हमारी आय खुलासा योजना के तहत धन संपत्ति घोषणा की मोहलत एक जून से 30 सितंबर 2016 तक देने की योजना है। इसमें घोषणा के दो महीने के भीतर उस पर निर्धारित देय राशि का भुगतान करना होगा। प्रस्तावित 0.5 फीसद कृषि कल्याण उपकर सभी सेवाओं पर लागू होगा। इससे प्राप्त राशि का उपयोग कृषि में सुधार एवं किसानों के कल्याण के लिए किया जाएगा। उपकर एक जून से प्रभाव में आएगा।

शहरों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात की स्थिति पर चिंता जताते हुए जेटली ने कहा कि वे पेट्रोल, एलपीजी, सीएनजी से चलने वाली छोटी कारों पर एक फीसद, निश्चित क्षमता वाली डीजल कारों पर 2.5 फीसद व उच्च इंजन क्षमता वाले वाहनों पर एसयूवी पर 4.0 फीसद की दर से बुनियादी ढांचा उपकर लगाने का प्रस्ताव करते हैं। अपने पिछले साल के बजट में कंपनी कर को निश्चित समयावधि में 30 फीसद से घटा कर 25 फीसद करने के साथ छूट व प्रोत्साहनों को युक्तिसंगत एवं उसे समाप्त करने के वादे को याद करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर कानून के तहत उपलब्ध कराए जा रहे त्वरित मूल्य ह्रास को एक अप्रैल 2017 से अधिकतम 40 फीसद पर सीमित करने का प्रस्ताव किया गया है।

अनुसंधान के लिए कटौती का लाभ एक अप्रैल 2017 से 150 फीसद व अप्रैल 2020 से 100 फीसद पर सीमित होगा। घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के लिए उन्होंने एक मार्च 2016 या उसके बाद गठित नई इकाइयों को 25 फीसद की दर से कर जमा अधिभार व उपकर देने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया। लेकिन यह इस शर्त पर है कि वे लाभ या निवेश से जुड़े छूट को लेकर दावा नहीं करेंगे।

वित्त मंत्री ने पांच करोड़ रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे उद्यमों के लिए कंपनी कर की दर वित्त वर्ष 2016-17 से कम कर 29 फीसद करने का भी प्रस्ताव किया। इसके अलावा अधिभार और उपकर लगेगा। फिलहाल वे 30 फीसद कंपनी कर व अधिभार एवं उपकर देते हैं। ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत स्टार्ट-अप के जरिए रोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत बजट में उनके विस्तार को बढ़ावा देने के इरादे से अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के बीच गठित कंपनियों को उनके लाभ पर पांच साल में से तीन साल के लिए आय में सौ फीसद कटौती की छूट देने का प्रस्ताव किया गया है।

जेटली ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में घरेलू मूल्य वर्द्धन को प्रोत्साहित करने के प्रयास के तहत कुछ कच्चे माल, मध्यवर्ती वस्तुएं व कल-पुर्जों पर सीमा शुल्क व उत्पाद शुल्क दरों से बदलाव का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद आइटी, आइटी हार्डवेयर, पूंजीगत वस्तु, रक्षा उत्पादन, विमानों एवं जहाजों के एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत ओवरहालिंग) व कपड़ा समेत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उद्योग के लिए लागत कम करना व प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बेहतर बनाना है।

एक करोड़ रुपए से अधिक के व्यक्तिगत आयकर पर 12 फीसद अधिभार को बढ़ा कर 15 फीसद कर दिया गया है। बजट में दस लाख रुपए से अधिक के मूल्य की लग्जरी कारों की खरीद व दो लाख रुपए से अधिक की वस्तुओं एवं सेवाओं की नकद खरीद पर एक फीसद की दर से स्रोत पर कर कटौती का प्रस्ताव किया गया है। हीरा या अन्य मूल्यवान पत्थर जड़ित चांदी के आभूषणों को छोड़ कर अन्य आभूषणों पर विनिर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर ‘इनपुट टैक्ट क्रेडिट’ के बिना एक फीसद या ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ के साथ 12 फीसद उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए वित्त मंत्री ने दस लाख रुपए सालाना से अधिक लाभांश प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) व कंपनियों पर 10 फीसद अतिरिक्त लाभांश वितरण कर लगाने का प्रस्ताव किया है। बेनामी जमा योजना की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार व्यापक कानून बनाएगी। वित्त मंत्री ने बैंकों में पूंजी डालने के लिए 25,000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया और कहा कि सरकार अपनी हिस्सेदारी 50 फीसद से नीचे लाने के विकल्प पर भी विचार करेगी।

वित्त मंत्री के कर प्रस्तावों से जहां प्रत्यक्ष कर मद में 1,060 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होगा वहीं अप्रत्यक्ष कर प्रस्ताव से 20,670 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व हासिल होगा। कुल मिला कर कर प्रस्तावों से 19,610 करोड़ रुपए की शुद्ध राजस्व प्राप्ति होगी। वैश्विक नरमी से अर्थव्यवस्था को उबारने के प्रयास के तहत बजट में 2016-17 में 19.78 लाख करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव किया गया है। जो चालू वित्त वर्ष से 15.3 फीसद अधिक है। इसमें 5.50 लाख करोड़ रुपए योजना व्यय व 14.28 लाख करोड़ रुपए गैर-योजना व्यय है।

गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के मामले में दीर्घकालीन पूंजी लाभ व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए तीन साल की अवधि को घटा कर दो वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है। विवादास्पद सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) को एक अप्रैल 2017 से लागू किया जाएगा। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में सुधार के तहत कई उपायों का प्रस्ताव किया जिसमें वित्तीय कंपनियों के समाधान पर संहिता (काम्प्रिहेन्सिव कोड आन रिजोल्यूशंस आफ फाइनेंशियल फर्म) को पारित कराना शामिल हैं जिसमें बैंक, बीमा कंपनियों एवं वित्तीय क्षेत्र की इकाइयों में दिवालिया की स्थिति से निपटने का प्रावधान होगा।

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता 2015 के साथ यह संहिता कानून का रूप लेने के बाद अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक समाधान प्रणाली उपलब्ध कराएगा। अन्य कदमों में वित्त विधेयक 2016 के जरिए मौद्रिक नीति मसौदे व मौद्रिक नीति समिति के लिए सांविधिक आधार उपलब्ध कराने को लेकर रिजर्व बैंक कानून में संशोधन का प्रस्ताव शामिल हैं।

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