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अण्णा ने भूमि अधिग्रहण पर मोदी सरकार को चेताया

प्रतिभा शुक्ल केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे गांधीवादी नेता अण्णा हजारे ने सोमवार को केंद्र को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि इस अध्यादेश को तुरंत वापस लिया जाए, नहीं तो इसके खिलाफ देश भर में जेल भरो आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने सरकार से दो-टूक कहा […]

Author February 24, 2015 09:15 am
77 वर्षीय अन्ना हजारे अध्यादेश के माध्यम से भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ बदलाव किए जाने को लेकर मोदी सरकार के घोर आलोचक रहे हैं। (फ़ोटो-पीटीआई)

प्रतिभा शुक्ल

केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे गांधीवादी नेता अण्णा हजारे ने सोमवार को केंद्र को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि इस अध्यादेश को तुरंत वापस लिया जाए, नहीं तो इसके खिलाफ देश भर में जेल भरो आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने सरकार से दो-टूक कहा कि अगर वह किसानों को तबाह करने वाले इस अध्यादेश को वापस नहीं लेती तो लोगों के आक्रोश को झेलने के लिए तैयार रहे। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने सोमवार को अण्णा से मुलाकात की। वे मंगलवार को धरने में शामिल होंगे।

सोमवार को हरियाणा ,पंजाब ,महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश राजस्थान सहित देश के कोने-कोने से किसान व अन्य लोग अण्णा के समर्थन में पहुंचे। भारतीय किसान संघ सहित तमाम संगठनों ने भी इस अध्यादेश का विरोध किया है। वहीं अण्णा आंदोलन के कई ऐसे चेहरे, जो अब आप का हिस्सा हैं, वे भी जंतर मंतर पर नजर आए।

अण्णा ने लोगों का आह्वान किया कि वे एक मकसद के लिए खड़े हों और जेल जाने तक को भी तैयार रहें। उन्होंने कहा, यह कानून न केवल किसान विरोधी है बल्कि यह शहरी गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के भी खिलाफ है। चिंतक केएन गोविंदाचार्य व उनका राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन भी इस लड़ाई में साथ आया है। इस बीच कई राज्यों से बड़ी संख्या में आ रहे किसान सोमवार को दिल्ली-हरियाणा सीमा पर पहुंचे। वे मंगलवार सुबह जंतर-मंतर की ओर मार्च करेंगे।

गोविंदाचार्य ने कहा है कि सरकार लोगों से बिना राय मशविरा किए यह अध्यादेश लाई है, इससे लोगों में सरकार की मंशा को लेकर अविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने खेती व चरागाह की जमीन को भूमि अधिग्रहण कानून के दायरे से बाहर रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि औद्योगिक कारीडोर को जनहित के मसले से बाहर किया जाए।

क्योंकि यह औद्योगिक विकास का मसला है। इसकी परिभाषा बदली जाए। भूमि सुधार पर बने विशेष कार्यदल को और सशक्त बनाया जाए। इस बीच एकता परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने भी गृहमंत्री से मुलाकात कर किसानों की मांगे उठाईं।
अध्यादेश के खिलाफ सोमवार को जंतर-मंतर की ओर जाने वाली तमाम सड़कों पर सैकड़ों किसान जमे रहे। खाद, बीज, पानी सहित उनकी कई दूसरी समस्याएं भी हैं। महाराष्ट्र से आए किसान सिंचाई के लिए पानी की किल्लत की बात करते हैं तो राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसान बिजली की कमी और उर्वरकों के दाम बढ़ने की समस्या बताते हैं। किसान अपनी डूब की जमीन के बदले जमीन पाने को दशकों से संघर्ष कर रहे हैं।

नर्मदा आंदोलन की अगुआ व आप के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं मेधा पाटकर ने कहा कि वे किसानों व डूब प्रभावितों के हकों की लड़ाई लड़ती हैं तो उन्हें विकास विरोधी कहा जाता है। लेकिन मोदी सरकार तो किसानों की जमीन छीन कर उद्योगपतियों को देने पर आमादा है। इसे आप क्या कहेंगे।

भारतीय सामाजिक न्याय मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर धुरंधर सिंह रघुवंशी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर जो कदम अण्णा हजारे ने उठाया है उससे देश के किसानों को समय रहते न्याय मिल जाएगा। धुरंधर सिंह ने कहा कि जिस प्रकार यह सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है और पूंजीपतियों को फायदा देने में लगी है उससे देश में असमानता बढ़ेगी।

राजस्थान के किसान कुलवंत सिंह कहते हैं कि किसानों की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है। हमारी समस्याओं को संसद और विधानसभाओं में बहुत कम उठाया जाता है। अण्णा हमारे लिए नई उम्मीद हैं। उनका कहना है कि वे बिजली और पानी की किल्लत और उर्वरक के दाम बढ़ने से पहले ही परेशानी का सामना कर रहे थे, अब यह अध्यादेश और मुश्किल लेकर आ गया है। उत्तर प्रदेश से आए किसान महेंद्र सिंह का कहना है- चुनाव से पहले हमें लगा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से किसानों के हित में फैसले होंगे। परंतु इस अध्यादेश के आने के बाद से हमारी उम्मीद टूट गई। हम ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सुना है, सरकार का कोई भी काम होगा तो बिना किसी मंजूरी के हमारी जमीनें ले ली जाएंगी। हम इससे काफी परेशान हैं।

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