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जब अनिल अंबानी की डील पर बिड़ला परिवार को हुई आपत्ति, कोर्ट तक पहुंचा मामला

साल 2016 में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (आर-इंफ्रा) ने सीमेंट कारोबार (आरसीसीपीएल) को बिड़ला कॉरपोरेशन को बेच दिया।

anil ambani, reliance, reliance infraअनिल अंबानी (Photo-PTI )

Anil Ambani, Reliance: बीते कुछ सालों से रिलायंस ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी अपने कर्ज के बोझ को कम करने में जुटे हैं। इसके लिए उन्होंने कई अहम कारोबार को बेच दिया है। इन्हीं में से एक सीमेंट का कारोबार है।

किसे बेचा कारोबार: साल 2016 में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (आर-इंफ्रा) ने सीमेंट कारोबार (आरसीसीपीएल) को बिड़ला कॉरपोरेशन को बेच दिया, तब यह सौदा करीब 4,800 करोड़ रुपये में हुआ था। कंपनी ने बताया था कि सौदे से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा। हालांकि, इस सौदे के खिलाफ बिड़ला परिवार कोलकाता हाईकोर्ट पहुंच गया।

क्यों कोर्ट पहुंचा मामला: असल में बिड़ला सीमेंट कॉरपोरेशन कारोबार का संचालन हर्ष वर्धन लोढ़ा करते हैं। संपत्ति को लेकर बिड़ला और लोढ़ा समूह के बीच एक दशक से भी ज्यादा वक्त से कानूनी विवाद चल रहा है। आपको यहां बता दें कि बिड़ला एस्टेट पर स्वामित्व की कानूनी लड़ाई हर्ष वर्धन के पिता स्व. राजेंद्र जी लोढ़ा द्वारा स्व. प्रियंवदा बिड़ला की वसीयत पेश करने के बाद शुरू हुई थी। (ये पढ़ें— अनिल अंबानी का कारोबार चला रहे हैं अडानी)

चार्टर्ड एकाउंटेंट राजेंद्र जी लोढ़ा को दी गई संपत्ति के वसीयत पर बिड़ला परिवार ने आपत्ति जताई थी। इसमें राजेंद्र जी लोढ़ा को 5,000 करोड़ रुपये के साम्राज्य का अकेला वारिस घोषित किया गया था। आज इस साम्राज्य का मूल्य 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।

क्या थी आपत्ति: अनिल अंबानी के सीमेंट कारोबार (आरसीसीपीएल) के अधिग्रहण को बिड़ला परिवार ने अनुचित माना। बिड़ला परिवार का दावा था कि यह अधिग्रहण परिवार या अदालत की अनुमति के बिना किया गया है। बिड़ला परिवार के सदस्यों ने कहा कि यह सौदा एम पी बिड़ला एस्टेट के हित में नहीं है। हालांकि, अब भी हर्ष वर्धन लोढ़ा की अगुवाई में बिड़ला सीमेंट कॉरपोरेशन का कामकाज देखा जा रहा है।

आपको बता दें कि बिड़ला कॉरपोरेशन मुख्य रूप से जूट और सीमेंट कारोबार से जुड़ी हुई है। हालांकि उसकी कुल आय में सीमेंट कारोबार की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी है। कंपनी के मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सीमेंट प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1 करोड़ टन से ज्यादा की सालाना उत्पादन की है। (ये पढ़ें—मुकेश अंबानी की रिलायंस को हो गया बड़ा नुकसान)

अनिल अंबानी की बात करें तो बीते कुछ सालों में उनकी कई कंपनियां बिक्री प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इस साल अब तक तीन संपत्तियों की बिक्री हो चुकी है। इसके जरिए अनिल अंबानी अपने कर्ज का बोझ कम करना चाहते हैं।

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