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कर्ज से नहीं उबर पा रहे अनिल अंबानी, अब इन कंपनियों को बेचने का लिया फैसला, मुनाफे वाली फर्म भी शामिल

अनिल अंबानी ने जिन कंपनियों की सेल के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं, उनमें रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस निप्पोन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस सिक्योरिटीज, रिलायंस फाइनेंशियल लिमिटेड और रिलायंस एसेट रीकंस्ट्रक्शन लिमिटेड शामिल हैं।

anil ambani reliance groupकर्ज में बेतहाशा डूबे अनिल अंबानी ने लिया इन कंपनियों को बेचने का फैसला

बुरी तरह से कर्ज में डूबे रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने अब एक और बिजनेस बेचने का फैसला लिया है। अनिल अंबानी ने अब रिलायंस कैपिटल लिमिटेड कंपनी की सहायक फर्मों रिलायंस जनरल इंश्योरेंस और रिलायंस निप्पो लाइफ इंश्योरेंस को बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। अनिल अंबानी को इन कंपनियों की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपये के करीब रकम जुटने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों के लिए 31 अक्टूबर को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाने का फैसला लिया गया है। दरअसल अनिल अंबानी इन कंपनियों को बेचकर रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के कर्ज को निपटाने की कोशिश में हैं।

अनिल अंबानी ने जिन कंपनियों की सेल के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं, उनमें रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस निप्पोन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस सिक्योरिटीज, रिलायंस फाइनेंशियल लिमिटेड और रिलायंस एसेट रीकंस्ट्रक्शन लिमिटेड शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया डिबेंचर होल्डर्स ऐंड डिबेंचर ट्रस्ट्री विस्ट्रा ITCL इंडिया लिमिटेड की ओर से पूरी की जा रही है, जिसके पास रिलायंस कैपिटल लिमिटे़ड की 93 फीसदी हिस्सेदारी है।

रिलायंस कैपिटल ने अपनी सहायक कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 252 करो़ड़ रुपये के एवज में बाहर निकलने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा कंपनी ने रिलायंस निप्पोन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से भी बाहर होने की बात कही है। जापान की बीमा कंपनी Nippon Life के साथ जॉइंट वेंचर में चलने वाली Reliance Nippon Life Insurance Company की कुल पेड-अप कैपिटल 1,196 करोड़ रुपये के करीब है।

इस कंपनी में जापानी फर्म Nippon Life की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। बता दें कि इस कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में 35 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। अनिल अंबानी ने रिलायंस एसेट रीकंस्ट्रक्शन लिमिटेड में भी अपनी 49 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने का फैसला लिया है।

बता दें कि अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की कंपनी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने जुलाई में ही शेयर मार्केट को दी गई जानकारी में बताया था कि जून तिमाही में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। वह कर्जदाताओं को लोन की बकाया रकम नहीं चुका पा रही है और डिफॉल्टर साबित हो रही है। कंपनी की ओर से यह जानकारी दिए जाने के बाद ही इस बात के कयास लगाए जाने लगे थे कि रिलायंस ग्रुप की ओर से इसकी कुछ कंपनियों को बेचने का फैसला लिया जा सकता है।

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