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कर्ज उतारने के लिए अनिल अंबानी ने दो बिजली कंपनियों की 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का लिया फैसला, 8 खरीददारों ने दिखाई दिलचस्पी

अनिल अंबानी इन कंपनियों में 51 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने का प्लान बना रहे हैं। राजधानी दिल्ली में दोनों कंपनियों के मिलाकर 44 लाख ग्राहक हैं। बिजली कंपनी बेचने का अनिल अंबानी का यह पहला फैसला नहीं है।

anil ambaniअनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। (फाइल फोटो)

रिलायंस ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी ने कर्ज से निपटने के लिए अब अपनी दो बिजली कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है। अब तक उनकी इन कंपनियों में हिस्सेदारी के लिए ब्रूकफील्ड एसेट मैनेजमेंट, ग्रीनको एनर्जी, टॉरेंट पावर समेत 8 कंपनियां दिलचस्पी दिखा चुकी हैं। अनिल अंबानी ने दिल्ली में बिजली वितरण का काम कर रहीं BSES राजधानी और यमुना डिस्कॉम्स को की हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है। Mint की रिपोर्ट के मुताबिक अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप का हिस्सा रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इन दोनों कंपनियों को बेचने के लिए केपीएमजी को हायर किया गया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी ने इन कंपनियों को बेचने के लिए केपीएमजी को उपयुक्त खरीददार तलाशने और डील कराने की जिम्मेदारी दी है।

अनिल अंबानी इन दोनों ही कंपनियों में 51 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने का प्लान बना रहे हैं। राजधानी दिल्ली में दोनों कंपनियों के मिलाकर 44 लाख ग्राहक हैं। बिजली कंपनी बेचने का अनिल अंबानी का यह पहला फैसला नहीं है। इससे पहले वह मुंबई में अपनी बिजली वितरण कंपनी को अडानी ग्रुप की अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड को बेच चुके हैं।

मुंबई की बिजली कंपनी भी बेच चुके हैं अनिल अंबानी: 2018 में अनिल अंबानी को इस डील से 18,800 करोड़ रुपये की बड़ी रकम हासिल हुई थी। बता दें कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप का हिस्सा रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़े कर्ज से जूझ रही है और उससे निपटने के लिए ही तमाम कंपनियों और उनकी हिस्सेदारी को बेचने पर काम चल रहा है।

कभी दुनिया के छठे अमीर थे, आज दिवालिया होने की कगार पर: कभी दुनिया के छठे सबसे अमीर शख्स रहे अनिल अंबानी इन दिनों कर्ज के संकट से जूझ रह हैं। यहां तक कि फरवरी में ब्रिटेन में एक मामले की सुनवाई के दौरान तो उन्होंने अपनी संपत्ति शून्य बताई थी। उन्होंने ब्रिटेन की एक अदालत से कहा था कि उनकी नेटवर्थ जीरो है और वह दिवालिया हो चुके हैं। चीन के बैंकों के 68 करोड़ डॉलर (4,760 करोड़ रुपये) के कर्ज के मामले की सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कहा था कि एक समय था जब वह बेहद अमीर कारोबारी थे, लेकिन भारतीय टेलिकॉम सेक्टर में मची उथल-पुथल के बाद सब बर्बाद हो गया और वह अब अमीर नहीं रहे।

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