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BPCL में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने में वेदांता ने दिखाई दिलचस्पी, जानें- किसकी है यह कंपनी

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) के निजीकरण के लिए सरकार को कई बोलियां प्राप्त हुईं।

Author नई दिल्ली | November 18, 2020 7:57 PM
Anil Agarwal Vedanta Groupभारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड। (ट्विटर)

अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह ने बुधवार को कहा कि उसने भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए प्रारंभिक अभिरुचि पत्र (ईओआई) दाखिल कर दिया है। भारत के दूसरे सबसे बड़े ईंधन रिटेलर कंपनी में वेदांता की दिलचस्पी उसके अपने मौजूदा तेल और गैस कारोबार के साथ तालमेल रहने के कारण है।

सरकार बीपीसीएल में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है और इसके लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 नवंबर थी। कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘बीपीसीएल के लिए वेदांत का ईओआई हमारे मौजूदा तेल और गैस कारोबार के साथ संभावित तालमेल का मूल्यांकन करने के लिए है।’ सरकार ने बोली लगाने के समाप्ति के मौके पर कहा था कि कई अभिरुचि पत्र प्राप्त हुए हैं। हालांकि, उसने बोली लगाने वालों की पहचान उजागर नहीं की।

बता दें कि भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) के निजीकरण के लिए सरकार को कई बोलियां प्राप्त हुईं। हालांकि देश की इस दूसरी सबसे बड़ी ईंधन कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज, सऊदी अरामको, बीपी और टोटल जैसी बड़ी तेल कंपनियों ने बोलियां नहीं लगाईं हैं। हालांकि निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्वीट कर कहा कि बीपीसीएल में सरकार की 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी की खरीद में कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

उन्होंने कहा कि अब दूसरे चरण में लेनदेन परामर्शक द्वारा इन बोलियों का आकलन किया जाएगा। पांडे इस बिक्री का प्रबंधन देख रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ट्वीट किया, ‘बीपीसीएल का रणनीतिक निवेश जारी है। कई कंपनियों के रुचि दिखाने के बाद अब यह दूसरे दौर की प्रक्रिया में हैं।’ दोनों में किसी ने भी ना तो बोलियों की संख्या बताई और ना ही बोली लगाने वालों के नाम बताए हैं। अलग से उद्योग जगत से जुड़े चार अधिकारियों ने बताया तीन-चार बोलियां मिली हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बीते सोमवार को रुचि पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि तक अपने प्रस्ताव जमा नहीं कराए। जबकि कंपनी को बीपीसीएल की खरीद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। बीपीसीएल कंपनी के खुदरा ईंधन कारोबार में 22 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी जोड़ती और इसे देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी बनाती।

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