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ब‍िल्‍डर अन‍िल शर्मा की कार तक ब‍िकेगी- आम्रपाली के फ्लैट खरीददारों को म‍िली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा ऑथरिटी को आदेश दिया है कि आम्रपाली की जिन सोसायटी का बिजली पानी रोका गया है, उनमें तुरंत बिजली पानी का कनेक्शन दिया जाए।

Author Updated: December 13, 2018 8:17 AM
सुप्रीम कोर्ट अब इस केस की सुनवाई जनवरी 2019 के दूसरे सप्ताह में करेगा।

आम्रपाली ग्रुप से घर खरीदने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आम्रपाली ग्रुप की रायपुर में प्रॉपर्टी आम्रपाली टेक पार्क का 10 दिन में मूल्यांकन किया जाए और जनवरी के आखिर तक इसे बेच दिया जाए। इससे आने वाले पैसे से आम्रपाली से घर खरीदने वाले खरीदारों को पैसा दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के मुख्‍य प्रबंध निदेशक (CMD) और डायरेक्टर अनिल शर्मा की लग्जरी कार को जब्‍त कर बेचने का निर्देश दिया है। साथ ही अन्‍य डायरेक्‍टर्स की कारों को भी जब्‍त कर बेचने का आदेश दिया गया है। शीर्ष अदालत ने इसके अलावा आम्रपाली सोसायटी में जिन घरवालों का बिजली-पानी रोक दिया गया था, उसे अविलंब बहाल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा ऑथरिटी को आदेश दिया है कि इन सोसायटी में तुरंत बिजली पानी का कनेक्शन दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट अब इस केस की सुनवाई जनवरी 2019 के दूसरे सप्ताह में करेगा।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने 5 दिसंबर को रीयल्टी क्षेत्र की इस कंपनी के पांच-सितारा होटल, सिनेमा हॉल, मॉल और देशभर में स्थित कारखानों को कुर्क करने और उनकी बिक्री करने के आदेश दिए। नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलाके में आम्रपाली समूह के चार आलीशान कंपनी कार्यालयों को भी कुर्क करने का आदेश दिया।

आम्रपाली के सैकड़ों हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स हैं, जिनमें नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के वे 170 टावर शामिल हैं जिनमें 46 हजार होम बायर्स ने निवेश कर रखा है। इन प्रॉजेक्ट्स के लिए कंपनी ने विभिन्न वित्तीय संस्थानों एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिए भी 4,040 करोड़ रुपये जुटाए। 2015 तक की बैलेंस शीट और कुछ कच्चे-पक्के आंकड़ों का हवाला देते हुए आम्रपाली ग्रुप ने दावा किया कि उसने इन हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स में 10 हजार 300 करोड़ रुपये निवेश किए।

सुप्रीम कोर्ट की धमकी के बाद आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी ने मान लिया कि 2,996 करोड़ रुपये दूसरी कंपनी का बिजनेस बढ़ाने में लगा दिए। इसी वजह से हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पूरा करने के लिए जरूरी रकम का अभाव हो गया और ये प्रॉजेक्ट्स लटक गए। कंपनी ने कहा कि 2,996 करोड़ रुपये के डायवर्जन का आंकड़ा मार्च 2015 तक का ही है क्योंकि उसके बाद से बैलेंसशीट अपडेट ही नहीं की गई है।

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