Mutual Fund Industry Data February 2026 : फरवरी 2026 के लिए जारी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा इक्विटी फंड्स पर बना हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के मुताबिक, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो महीने दर महीने करीब 8% बढ़कर 25,978 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, दूसरी ओर सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिये निवेश में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 4% घटकर 29,845 करोड़ रुपये रह गया। आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि निवेशक खास तौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

लेटेस्ट आंकड़ों की चर्चा करते हुए AMFI के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट चलासानी ने कहा कि फरवरी के डेटा से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की लगातार स्थिरता और मज़बूती का पता चलता है। उन्होंने कहा कि फरवरी लगातार 60वां महीना है, जब इक्विटी फंड्स में नेट इनफ्लो पॉजिटिव रहा है। इससे बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बाजार का सेंटिमेंट कॉर्पोरेट के मज़बूत तिमाही नतीजों और घरेलू व विदेशी, दोनों तरह के संस्थागत निवेशकों के लगातार अच्छे इनफ्लो से मज़बूत हुआ है।

इक्विटी फंड्स में दो महीने बाद लौटी तेजी

AMFI के डेटा के अनुसार फरवरी में इक्विटी फंड्स में 25,978 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ, जबकि जनवरी में यह 24,029 करोड़ रुपये था। यानी महीने दर महीने इसमें करीब 8% की बढ़ोतरी हुई। पिछले दो महीनों से गिरावट का जो ट्रेंड था, वह इस बार टूटता नजर आया।

आनंद राठी वेल्थ के ज्वाइंट सीईओ फिरोज अजीज ने कहा कि AMFI के फरवरी 2026 के आंकड़े भारतीय रिटेल निवेशकों की बढ़ती समझदारी को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि निवेशक अब बाज़ार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ावों से आगे बढ़कर लॉन्ग टर्म ग्रोथ में हिस्सा ले रहे हैं। निवेशक इक्विटी में निवेश बनाए रखने के साथ ही धीरे-धीरे अलग-अलग तरह के एसेट्स में निवेश करके पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रहे हैं।

एक्विरस वेल्थ के एमडी अंकुर पुंज के मुताबिक “इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के नेट इनफ्लो में पिछले महीने के मुकाबले 8% की बढ़ोतरी से पता चलता है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम है।”

SIP के जरिये निवेश में कमी

हालांकि फरवरी में SIP के जरिये होने वाले निवेश में गिरावट देखने को मिली। जनवरी में जहां SIP के जरिये निवेश 31,002 करोड़ रुपये था, वहीं फरवरी में यह 3.73% घटकर 29,845 करोड़ रुपये रह गया। AMFI के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट चलासानी ने कहा कि फरवरी के SIP इनफ्लो में हाल के महीनों की तुलना में जो थोड़ी-बहुत कमी आई है, उसका मुख्य कारण फरवरी का महीना छोटा होना है, जिसके कारण महीने के आखिरी हिस्से की कुछ SIP आमतौर पर मार्च के शुरुआत में प्रोसेस होती हैं। इससे पहले लगातार दो महीनों तक SIP निवेश 30,000 करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ था।

फ्लेक्सी कैप फंड्स एक बार फिर सबसे आगे

पिछले कई महीनों की तरह फरवरी 2026 में भी इक्विटी फंड्स की अलग-अलग कैटेगरी में फ्लेक्सी कैप फंड्स ने सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित किया। फरवरी में इस कैटेगरी में 6,925 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया। हालांकि जनवरी के 7,672 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें करीब 10% की कमी देखने को मिली।

फ्लेक्सी कैप फंड्स की खासियत यह होती है कि फंड मैनेजर को लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश की पूरी फ्लेक्सिबिलिटी और छूट रहती है, इसलिए डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में इन्हें काफी पसंद किया जाता है।

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मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में निवेश बढ़ा

फरवरी के आंकड़ों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स सबसे बड़े गेनर के रूप में उभरे। मिडकैप फंड्स में नेट इनफ्लो जनवरी के 3,185 करोड़ रुपये से बढ़कर फरवरी में 4,003 करोड़ रुपये हो गया, जो करीब 26% की बढ़ोतरी है।

इसी तरह स्मॉलकैप फंड्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। इस कैटेगरी में फरवरी में 3,881 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया, जबकि जनवरी में यह 2,942 करोड़ रुपये था। यानी इसमें करीब 32% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में उछाल

फरवरी में सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में भी निवेश तेजी से बढ़ा। इन फंड्स में नेट इनफ्लो जनवरी के 1,043 करोड़ रुपये से बढ़कर फरवरी में 2,987 करोड़ रुपये हो गया। यानी एक महीने में यह लगभग तीन गुना हो गया।

इसके अलावा लार्ज कैप फंड्स में 2,112 करोड़ रुपये और मल्टी कैप फंड्स में 1,934 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया। वहीं फोकस्ड फंड्स में 901 करोड़ रुपये और वैल्यू/कॉन्ट्रा फंड्स में 727 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

हालांकि टैक्स बचत वाली स्कीम ELSS में लगातार दूसरे महीने आउटफ्लो रहा। फरवरी में इस कैटेगरी से करीब 650 करोड़ रुपये निकले।

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डेट फंड्स में नेट इनफ्लो घटा

डेट म्यूचुअल फंड्स में फरवरी के दौरान नेट इनफ्लो में कमी आई। इन स्कीम्स में नेट इनफ्लो जनवरी के 74,827 करोड़ रुपये से घटकर फरवरी में 42,106 करोड़ रुपये रह गया, यानी करीब 44% की गिरावट दर्ज की गई।

इस गिरावट की एक बड़ी वजह शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी कैटेगरी में उतार-चढ़ाव रही। उदाहरण के तौर पर ओवरनाइट फंड्स में फरवरी में करीब 14,006 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज हुआ, जबकि जनवरी में इसमें 46,280 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया था।

हाइब्रिड और इंडेक्स फंड्स का रुझान

हाइब्रिड फंड्स में भी फरवरी में निवेश थोड़ा धीमा पड़ा। इस सेगमेंट में कुल नेट इनफ्लो 11,983 करोड़ रुपये रहा, जो जनवरी के 17,356 करोड़ रुपये से कम है।

हाइब्रिड फंड्स में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स इस महीने भी सबसे आगे रहे, जिनमें 8,476.26 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया। जनवरी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स में नेट इनफ्लो 10,485.38 करोड़ रुपये रहा था। यानी इसमें नेट इनफ्लो पिछले महीने के मुकाबले करीब 19% घटा  है, फिर भी यह हाइब्रिड फंड्स में नंबर वन बना हुआ है।

क्लाइंस एसोसिएट्स के को-फाउंडर रोहित सरीन का मानना है कि “ताजा आंकड़े भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की पॉजिटिव तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि मल्टी एसेट एलोकेशन फंड जैसे डायवर्सिफाइड ऑप्शन्स में घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।”

इंडेक्स फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और फरवरी में इसमें 3,233 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जनवरी में यह महज 27 करोड़ रुपये था।

दूसरी ओर गोल्ड ETF में नेट इनफ्लो घटकर 5,254 करोड़ रुपये रह गया, जो जनवरी के 24,039 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है।

उद्योग का AUM रिकॉर्ड स्तर पर

AMFI के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 82.03 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो जनवरी में 81.01 लाख करोड़ रुपये था।

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं। निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें।)