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अमेरिका की 1,000 कंपनियों को चीन से भारत बुलाने की तैयारी में नरेंद्र मोदी सरकार, ट्रेड वॉर का मिलेगा फायदा

Companies moving out of china: सरकारी अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने अपने ओवरसीज मिशन के जरिए 1,000 से ज्यादा अमेरिकी कंपनियों से अप्रैल में संपर्क साधा है। सरकार ने इन कंपनियों को यह जानकारी दी कि यदि वे चीन की बजाय भारत में आती हैं तो उन्हें क्या रियायतें मिल सकती हैं।

us companiesअमेरिका की 1,000 कंपनियों को लुभाने की कोशिश में जुटी सरकार

Companies moving out of china: कोरोना वायरस का संक्रमण भले ही भारत में लंबे लॉकडाउन के चलते मंदी का सबब बना हो, लेकिन इससे एक बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। कोरोना की वजह से दुनिया भऱ की तमाम कंपनियां चीन की बजाय कहीं और अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को स्थापित करने की योजना बना रही हैं। इसे भारत सरकार एक बड़ा मौका मानते हुए इन कंपनियों को लुभाने में जुट गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले अमेरिका की 1,000 कंपनियों को भारत में बुलाने की योजना पर मोदी सरकार काम कर रही है। इन कंपनियों में अमेरिका की दिग्गज मेडिकल डिवाइस कंपनी एबॉट लैबोरेट्रीज भी शामिल है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने अपने ओवरसीज मिशन के जरिए 1,000 से ज्यादा अमेरिकी कंपनियों से अप्रैल में संपर्क साधा है। सरकार ने इन कंपनियों को यह जानकारी दी कि यदि वे चीन की बजाय भारत में आती हैं तो उन्हें क्या रियायतें मिल सकती हैं। इनमें से भी भारत की नजर सबसे ज्यादा मेडिकल डिवाइस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, टेक्सटाइल, लेदर और ऑटो पार्ट्स मेकर कंपनियों पर हैं। शुरुआती बातचीत में कुल 550 उत्पादों के निर्माण में जुटी कंपनियों को भारत आने का न्योता दिया गया है। दरअसल कोरोना के संकट के बाद से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार चीन पर वार कर रहे हैं। कई बार वह कोरोना को चीनी वायरस भी कह चुके हैं।

ऐसे में यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी कंपनियां यदि चीन से किसी और देश का रुख करती हैं तो भारत सरकार की नजर अपने देश को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने पर है। यहां तक जापान ने अपनी कंपनियों को चीन से बाहर शिफ्ट होने के लिए 2.2 अरब डॉलर का पैकेज भी जारी किया है। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के देश भी चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के उपायों पर काम कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय व्यापार मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनियों से विस्तार से बातचीत की है और पूछा है कि वह भारत में किन सुविधाओं की अपेक्षा रखती हैं। इस दौरान कई कंपनियों ने लेबर लॉ में सुधार की बात कही है। यही नहीं भारत सरकार राज्यों के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण जैसे मसलों पर पहले ही काम शुरू कर चुकी है। हाल ही में ब्लूमबर्ग की ही एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार विदेशों से आने वाली कंपनियों को लग्जमबर्ग से दोगुनी भूमि देने को तैयार है।

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