अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से होने वाले आयात पर नए शुल्क लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को घोषित इस योजना के तहत 10% अतिरिक्त टैरिफ और 12.5% अतिरिक्त ड्यूटी लगाने की बात कही गई है।
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि जांच में पता चलता है कि इन देशों से आने वाले कुछ उत्पाद जबरन मजदूरी (Forced Labor) के जरिए बनाए जा रहे हैं।
कौन से देश है लिस्ट में शामिल?
(संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि) USTR ने 54 इकोनॉमी को लिस्ट किया है, जिनके बारे में उसने दावा किया है कि वे जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इम्पोर्ट पर रोक लगाने और उसे असरदार तरीके से लागू करने में नाकाम रही हैं।
इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, इजराइल, जापान, कतर और रूस जैसे देश शामिल हैं। लिस्ट में शामिल दूसरे देशों में सऊदी अरब, सिंगापुर, साउथ कोरिया, श्रीलंका; स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड, तुर्की UAE, यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, यूएस ऑफिस ऑफ ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने एक प्रेस स्टेटमेंट में यह जानकारी दी।
इन देशों पर 10% एडिशनल टैरिफ
अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) के मुताबिक, जिन इकोनॉमी में पहले से ही किसी तरह की जबरदस्ती मजदूरी इम्पोर्ट पर रोक है या जिन्होंने ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए ऐसे तरीकों को लागू करने का वादा किया है, उन्हें 10% का एडिशनल टैरिफ लग सकता है।
दूसरी इकोनॉमी को 12.5% की एडिशनल ड्यूटी लग सकती है। प्रस्तावित कार्रवाई में एक टेक्सटाइल मैकेनिज्म भी शामिल है, जो कुछ इकोनॉमी से कुछ मात्रा में कपड़ों और टेक्सटाइल इंपोर्ट को कम सेक्शन 301 टैरिफ रेट पर यूएस में आने देगा।
यह भी पढ़ें: टैरिफ के नए दांव से भारत पर ट्रेड डील के लिए दबाव बना रहा अमेरिका
USTR के अनुसार, यह कार्रवाई 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत आती है, जो 60 इकोनॉमी पर उनके कामों, पॉलिसी और प्रैक्टिस के खिलाफ कदम उठाने की अनुमति देता है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों पर रोक लगाने और उन्हें लागू करने में नाकाम रहने से संबंधित हैं इसे गलत और यूएस कॉमर्स पर बोझ बताया गया है।
इन जांचों के नतीजे में, USTR ने जांच की गई इकोनॉमी के सभी प्रोडक्ट पर अतिरिक्त ड्यूटी का प्रस्ताव रखा और इस कदम पर जनता से कमेंट मांगे। बयान में कहा गया, “जिन इकोनॉमी ने जबरदस्ती मजदूरी के इम्पोर्ट पर रोक लगाई है, जिन्होंने रेसिप्रोकल ट्रेड पर एक एग्रीमेंट के जरिए ऐसी रोक लगाने और लागू करने का वादा किया है या जिन इकॉनमी ने कुछ जबरदस्ती मजदूरी वाले सामानों के इम्पोर्ट को रोकने के लिए कुछ हद तक रोक लगाई है, उनके लिए यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव 10% एक्स्ट्रा ड्यूटी का प्रस्ताव करता है। बाकी सभी इकोनॉमी के लिए यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव 12.5% एक्स्ट्रा ड्यूटी का प्रस्ताव करता है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एक टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी प्रस्ताव करता है जो कुछ इकोनॉमी से कुछ मात्रा में कपड़ों और टेक्सटाइल इम्पोर्ट को कम सेक्शन 301 टैरिफ रेट पर अमेरिका में आने देगा।”
USTR ने जबरदस्ती मजदूरी से बने सामानों के इम्पोर्ट पर रोक को असरदार तरीके से लागू करने में नाकाम रहने के लिए 6 इकोनॉमी को चिह्नित किया। इनमें यूरोपियन यूनियन, पाकिस्तान और कनाडा शामिल हैं।
एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, “हमारे सबसे जरूरी ट्रेडिंग पार्टनर्स का जबरदस्ती मजदूरी से बने सामानों के इम्पोर्ट को रोकने में नाकाम रहना मंजूर नहीं है। इससे एक ऐसा माहौल बनता है जहां अमेरिकी वर्कर्स को दुनिया भर में एक जैसे नहीं होने पर मुकाबला करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।”
यह भी पढ़ें: सेविंग्स अकाउंट से FD की ओर शिफ्ट हो रहे भारतीय, RBI डेटा ने बताई बड़ी वजह
भारत में लोग अब अपने बैंक खातों में पैसा रखने का तरीका बदल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच सालों में बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं ने कम ब्याज वाले सेविंग्स अकाउंट से पैसा निकालकर अधिक रिटर्न देने वाले टर्म डिपॉजिट (FD) में लगाना शुरू कर दिया है। इससे देश में बैंक डिपॉजिट की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
