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राजस्थान खनन नीति में संशोधन, सभी खानों की होगी ई-नीलामी

सभी नए खनन पट्टे 50 वर्ष की अवधि के लिए तथा नए क्वारी लाइसेंस 30 वर्ष के लिए जारी किए जाएंगे।
Author जयपुर | February 21, 2017 18:08 pm
राजस्थान की सीएम वसुधंरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की अध्यक्षता में मंगलवार (21 फरवरी) को सम्पन्न हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में राज्य की खनिज नीति-2015 में संशोधन और सभी खानों की ई-नीलामी सहित कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने संवादाताओं को राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खनन पट्टों के वितरण में पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सभी प्रकार के पट्टों का आवंटन ई-टेंडरिंग के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि निजी खातेदारी की जमीन पर पट्टे जारी करने पर खनन का पहला हक खातेदार का होगा। निजी खातेदारी के पट्टे की नीलामी भी ई-टेंडरिंग के जरिए की जाएगी। राठौड़ ने बताया कि राजस्थान खनिज नीति-2015 में मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृत संशोधनों के तहत सभी नए खनन पट्टे 50 वर्ष की अवधि के लिए तथा नए क्वारी लाइसेंस 30 वर्ष के लिए जारी किए जाएंगे। जिन खनन पट्टों एवं क्वारी लाइसेंस की अवधि 31 मार्च, 2022 तक समाप्त हो रही है, उनकी अवधि 31 मार्च, 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि खनन पट्टे हस्तांतरण के लिए लॉक-इन-अवधि 2 साल की बजाय एक साल रहेगी। दो खनन पट्टों के बीच कोई फासला नहीं छोड़ा जाएगा, ताकि अवैध खनन को रोका जा सके। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा 31 प्रधान खनिजों को गैर-प्रधान खनिज की श्रेणी में परिवर्तित करने के बावजूद इन खनिजों के लिए पहले से जारी हो चुके 657 आशय पत्र के लिए पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। प्रदेश के 8 नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राजस्थान मेडिकल कॉलेज सोसायटी का गठन करने का निर्णय लिया गया है। सोसायटी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती के लिए वेतन-भत्ते एवं अन्य शर्तें तथा विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस आदि का निर्धारण करेगी। राठौड़ ने कहा कि इन सभी कॉलेजों के लिए मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा प्रथम निरीक्षण किया जा चुका है। अगले सत्र से इन कॉलेजों में कक्षाएं प्रारम्भ हो जाएंगी।

राठौड़ ने बताया कि बैठक में राजस्थान सामूहिक विवाह नियमन एवं अनुदान नियम-2009 में संशोधन कर विवाह के पंजीकरण के लिए प्राधिकृत अधिकारी की जिम्मेदारी जिला कलक्टर के साथ-साथ एसडीएम, महिला अधिकारिता विभाग की कार्यक्रम अधिकारी को देने का निर्णय भी लिया गया। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह में भागीदार प्रत्येक जोड़े को अनुदान 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 15 हजार रुपए तथा आयोजन करने वाली संस्था का अनुदान 2,500 रुपए से बढ़ाकर 3,000 रुपए किया गया है। आयोजक संस्था के लिए प्रति वर्ष अधिकतम अनुदान की सीमा भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए करने का निर्णय लिया गया है। राठौड़ ने बताया कि मंत्रिमण्डल ने राजस्थान कृषि अधीनस्थ सेवा नियम-1978 में संशोधन का भी निर्णय लिया है। इसके तहत सहायक कृषि अधिकारी के पद पर पदोन्नति में ग्राम सेवकों का पांच प्रतिशत कोटा समाप्त कर पदोन्नति के सभी 50 प्रतिशत पद कृषि पर्यवेक्षक से भरे जाएंगे।

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