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फ्यूचर ग्रुप से डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अमेजन, जानें क्यों हो गई मुकेश अंबानी से ‘दुश्मनी’

किशोर बियानी के फ्यूचर रिटेल और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच होने वाली डील पर रोक लगवाने के लिए अमेजन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। जेफ बेजोस के ग्रुप को दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच का वह फैसला रास नहीं आ रहा है, जिसमें उसने फ्यूचर और रिलायंस के बीच होने वाली डील को हरी झंडी दिखाई थी।

अमेजन के सीईओ जेफ बेजॉस और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी (फोटो सोर्सः ट्विटर/@Reuters)

किशोर बियानी के फ्यूचर रिटेल और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच होने वाली डील पर रोक लगवाने के लिए अमेजन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। जेफ बेजोस के ग्रुप को दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच का वह फैसला रास नहीं आ रहा है, जिसमें उसने फ्यूचर और रिलायंस के बीच होने वाली डील को हरी झंडी दिखाई थी। यह फैसला सोमवार को आया था। अमेजन की लीगल टीम भारत की सर्वोच्च अदालत को अब बताएगी कि सिंगापुर की आर्बिट्रेशन कोर्ट ने जो फैसला अक्टूबर में दिया था, वह हर मायने में दुरुस्त क्यों है।

जेफ बेजोस की अमेजन और मुकेश अंबानी की रिलायंस के बीच विवाद की असली वजह दरअसल भारत के 1 ट्रिलियन डॉलर के रिटेल बाजार पर प्रभुत्व को लेकर है। दुनिया के दो सबसे बड़े रईस इस होड़ में एक दूसरे से पीछे नहीं रहना चाहते हैं। अमेजन अभी पूरी तरह से ऑनलाइन कारोबार के भरोसे ही है। उसे भारत के ऑफलाइन रिटेल तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए फ्यूचर रिटेल के बिग बाजार जैसे ब्रांड और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। उधर, रिलायंस अब खुद को ई-कॉमर्स के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। रिलायंस के पास पहले से ही 12 हजार से ज्यादा स्टोर्स हैं। फ्यूचर के साथ उसकी ये डील अगर फाइनल हो जाती है तो उसे भारत के विभिन्न शहरों में स्थापित फ्यूचर रिटेल के 17 सौ से ज्यादा स्टोर्स और मिल जाएंगे।

दो साल पहले तक बेजोस और अंबानी एक दूसरे के रास्ते का कांटा नहीं बन रहे थे, लेकिन 2019 में जो हुआ उसने दोनों को एक दूसरे का सबसे बड़ा दुश्मन बना दिया है। अगस्त 2019 में अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स में 49% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप को 1,431 करोड़ रुपए चुकाए। फ्यूचर कूपन्स के पास फ्यूचर रिटेल में करीब 10% की हिस्सेदारी थी। अमेजन ने एक तरह से फ्यूचर रिटेल पर अधिकार जमाने की शुरुआत कर दी थी। अमेजन और फ्यूचर कूपन्स के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें तय हुआ कि अमेजन 3 से 10 साल बाद फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी खरीदने की हकदार होगी। दोनों के बीच यह भी तय हुआ कि फ्यूचर रिटेल अपनी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज को नहीं बेचेगी।

यहां तक सब दुरुस्त था। हालात तब बिगड़े जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगाया गया। इसमें फ्यूचर रिटेल की हालत खराब हो गई। इस दौरान कंपनी को 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। आर्थिक दुश्वारियों से उबरने के लिए बियानी ने आखिरकार इस कंपनी को बेचने का फैसला लिया। अगस्त 2020 में रिलायंस ने (3.38 बिलियन डॉलर) 24,713 करोड़ रुपए में फ्यूचर रिटेल खरीदने का ऐलान किया। भारत में फ्यूचर ग्रुप की रिटेल संपत्ति लगभग 3.4 बिलियन डॉलर की है। रिलायंस के साथ जो डील कंपनी ने की है, उसमें फ्यूचर के कर्जे भी रिलायंस को चुकाने होंगे। डील सिरे चढ़ पाती, उससे पहले ही अमेजन ने सिंगापुर की कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सिंगापुर की कोर्ट ने इस डील पर रोक लगा दी। आर्बिट्रेशन कोर्ट का फाइनल फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन सिंगापुर की कोर्ट के फैसले को रिलायंस और फ्यूचर ने मानने से इनकार कर दिया। इसी वजह से रिलायंस-फ्यूचर की डील को रुकवाने के लिए अमेजन को दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करनी पड़ी।

दिल्ली हाईकोर्ट की एकल बेंच ने सिंगापुर की कोर्ट के फैसले को ठीक मानते हुए फ्यूचर ग्रुप को इस डील पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। कोर्ट के फैसले तक फ्यूचर ग्रुप इस डील को लेकर कुछ नहीं कर सकता। बियानी ग्रुप ने इस फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी तो डबल बेंच ने पिछले आदेश पर रोक लगाते हुए रिलायंस-फ्यूचर की डील को हरी झंडी दिखा दी। डबल बेंच का फैसला अमेजन की सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है। इससे भारत के रिटेल बाजार पर उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है। लिहाजा उसने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की दरखास्त की है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि 25 अक्टूबर 2020 को सिंगापुर की कोर्ट का फैसला आने के बाद जो कानूनी लड़ाई बेजोस और अंबानी की कंपनियों के बीच शुरू हुई, अब वह अंतिम पड़ाव पर है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला दोनों कंपनियों के लिए बाध्यकारी होगा। लड़ाई लंबी खिंचने के आसार हैं, क्योंकि कोई भी कंपनी तभी हार मानेगी जब उसके सामने मौजूद सारे कानूनी विकल्प खत्म हो जाएंगे।

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