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एयरसेल-मेक्सिस मामला: 24 जनवरी को आरोप पर आदेश सुनाएगी कोर्ट, मारन बंधुओं की ज़मानत टली

अदालत ने यह भी आदेश जारी किया था कि मारन बंधुओं और दो आरोपी कंपनियों के खिलाफ सुनवाई को मलेशिया आधारित आरोपियों- कृष्णन, मार्शल और दो कंपनियों से अलग रखा जाए।

Author नई दिल्ली | January 18, 2017 5:41 PM
पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन। (फाइल फोटो)

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज कराए गए एयरसेल-मेक्सिस सौदे के मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने के संबंध में एक विशेष अदालत अगले मंगलवार (24 जनवरी) को आदेश सुनाएगी। विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने आरोप तय करने और मारन बंधुओं एवं अन्य की जमानत याचिकाओं पर आज (बुधवार, 18 जनवरी) को आदेश पारित करना था लेकिन आदेश अभी तैयार न होने की बात कहते हुए इसे 24 जनवरी के लिए टाल दिया गया है। सभी आरोपियों ने जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और जमानत याचिकाएं दायर की हैं। आरोप तय करने से जुड़ी दलीलों के दौरान विशेष लोक अभियोजक आनंद ग्रोवर ने दावा किया कि दयानिधि ने वर्ष 2006 में चेन्नई के एक टेलीकॉम प्रमोटर सी शिवशंकरन पर ‘दबाव’ बनाया था कि वह एयरसेल और दो सहायक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को मलेशियाई कंपनी मेक्सिस समूह को बेच दें। दयानिधि ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था।

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सीबीआई ने मारन बंधुओं, राल्फ मार्शल, टी आनंद कृष्णन, मेसर्स सन डायरेक्ट टीवी (प्रा) लि, ब्रिटेन की मेसर्स एस्ट्रो ऑल एशिया नेटवर्क्स पीएलसी, मलेशिया की मेसर्स मेक्सिस कम्यूनिकेशन बेरहाड, मलेशिया की मेसर्स साउथ एशिया एंटरटेनमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड और तत्कालीन अतिरिक्त सचिव (दूरसंचार) दिवंगत जे एस सरमा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दंडनीय अपराधों एवं भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दर्ज किया गया है। धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मारन बंधुओं, कलानिधि की पत्नी कावेरी, साउथ एशिया एफएम लिमिटेड (एसएएफएल) के प्रबंध निदेशक के. शणमुगम, और सन डायरेक्ट टीवी प्रा लि के खिलाफ धन शोधन रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए छह आरोपियों को तलब किया था और कहा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री है।

अपने खिलाफ आरोप तय होने के मुद्दे पर दयानिधि ने दावा किया था कि सीबीआई के दावे के अनुसार, जिस अवधि में यह कथित अपराध अंजाम दिया गया, तब शिवशंकरन एयरसेल में अपनी भागीदारी को बेचने के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ बात कर रहे थे। उनके वकील ने कहा कि अक्तूबर 2005 में एयरसेल और मेक्सिस के बीच कारोबारी लेनदेन को अंतिम रूप दिया गया था। उनके भाई कलानिधि ने भी कहा कि सीबीआई का दावा झूठा था और शिकायतकर्ता खुद कारोबार करने के लिए उतावला था और उन्हें इस मामले में झूठे तरीके से फंसाया जा रहा है। अदालत ने सीबीआई की याचिका के आधार पर 24 सितंबर को कृष्णन और मार्शल के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी किए थे और कहा था कि उन्हें भेजे गए समनों की तामील नहीं की गई। अदालत ने यह भी आदेश जारी किया था कि मारन बंधुओं और दो आरोपी कंपनियों के खिलाफ सुनवाई को मलेशिया आधारित आरोपियों- कृष्णन, मार्शल और दो कंपनियों से अलग रखा जाए। अदालत का कहना था कि उनके पेश होने में लंबा समय लग सकता है, जिससे कार्यवाही में देरी हो सकती है।

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