ताज़ा खबर
 

नोटबंदी के दो साल: नकदी 9.5 फीसदी बढ़ी और निकासी भी, पर एटीएम लगाने की रफ्तार घटी

दिसंबर 2016 में महज 1.06 लाख करोड़ रुपये ही एटीएम से निकाले गए। एक दिलचस्प चीज यह भी है कि एटीएम से ज्यादा कैश विदड्रॉल होने के बावजूद देश में नए एटीएम की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo: PTI)

देश में नोटबंदी लागू किए जाने की दूसरी सालगिरह गुरुवार 8 नवंबर को है। इसी दिन 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि 500 और 1000 के नोट तत्काल प्रभाव से मान्य नहीं होंगे। उस वक्त बाजार में चल रही कुल करेंसी का 86 प्रतिशत हिस्सा यही नोट थे। कहा गया कि नोटबंदी लागू करने का एक मकसद कैश के कम इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। हालांकि, दो साल बाद भी ऐसा लगता है कि इस मकसद को हासिल नहीं किया जा सके। रिजर्व बैंक की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, 26 अक्टूबर 2018 तक बाजार में करेंसी का चलन बढ़कर कुल 19.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जोकि दो साल पहले के मुकाबले 9.5 पर्सेंट ज्यादा है। नोटबंदी को लागू करने के हफ्ते भर पहले यानी 4 नवंबर 2016 को बाजार में कुल 17.9 लाख करोड़ रुपये की करेंसी ही चलन में थी।

बाजार में नकदी के पूरी तरह लौटते ही एटीएम से पैसे की निकासी में उछाल आया। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2018 में एटीएम से कैश विदड्रॉल 2.75 लाख करोड़ रुपये था। यह अक्टूबर 2016 में 2.54 लाख करोड़ रुपये की नकद निकासी के मुकाबले 8 पर्सेंट ज्यादा था। अक्टूबर 2018 में एटीएम से कितना पैसा निकाला गया, इसके आंकड़े दिसंबर में आएंगे। माना जा रहा है कि यह और ज्यादा हो सकता है क्योंकि त्योहारों के मौसम में लोग एटीएम से अमूमन ज्यादा पैसे निकालते हैं।

बता दें कि नोटबंदी लागू करने के एक महीने बाद एटीएम से धन निकासी में तेज गिरावट हुई। दिसंबर 2016 में महज 1.06 लाख करोड़ रुपये ही एटीएम से निकाले गए। एक दिलचस्प चीज यह भी है कि एटीएम से ज्यादा कैश विदड्रॉल होने के बावजूद देश में नए एटीएम की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ी। बीते दो साल में तकरीबन 8 हजार नए एटीएम ही लगे। वहीं, मोबाइल बैंकिंग के जरिए पैसे के लेनदेन में भी जबर्दस्त उछाल आया है। अगस्त 2018 में मोबाइल बैंकिंग के जरिए 2.06 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ जोकि अक्टूबर 2016 के 1.13 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 82 प्रतिशत ज्यादा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App