एयर इंडिया के बाद अब इन कंपनियों के विनिवेश की तैयारी में सरकार, मार्च तक 1.75 लाख करोड़ जुटाने का टारगेट

केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी सरकार 26,369 करोड़ रुपये ही जुटा पाई है। ऐसे में मार्च तक कई कंपनियों में तेजी से विनिवेश किया जा सकता है।

PSU Disinvestment
सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। (Express Photo)

टाटा समूह (Tata Group) को एयर इंडिया (Air India) की नीलामी से सरकार को विनिवेश (Disinvestment) के मोर्चे पर बड़ी सफलता हाथ लगी है। हालांकि सरकार अभी इस वित्त वर्ष में 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने के लक्ष्य से बहुत पीछे है। ऐसे में मार्च 2022 तक कई सरकारी कंपनियों का विनिवेश हो सकता है। इनमें कुछ कंपनियों का निजीकरण (Privatisation) किया जाएगा, जबकि कुछ कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करेगी। इन कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) जैसे बड़े नाम समेत दो सरकारी बैंक (PSB) भी शामिल हैं।

अभी तक विनिवेश से मिले हैं 26,369 करोड़

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने 2021-22 का बजट पेश करते हुए इस वित्त वर्ष में 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य तय किया था। अभी तक सरकार को इस लक्ष्य की तुलना में छोटी सफलता ही हाथ लगी है। एक्सिस बैंक (Axis Bank), एनएमडीसी (NMDC) और हुडको (HUDCO) में ससरकारी हिस्सेदारी की बिक्री से 8,369 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। एयर इंडिया की बिक्री से सरकार को करीब 18 हजार करोड़ रुपये मिले हैं। इस तरह सरकार अभी 26,369 करोड़ रुपये ही जुटा पाई है। यह लक्ष्य से करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये कम है।

LIC IPO से एक लाख करोड़ रुपये तक मिलने के अनुमान

प्रस्तावित विनिवेश में सबसे बड़ा नाम है एलआईसी। इस वित्त वर्ष में एलआईसी का आईपीओ (LIC IPO) लाकर सरकार अपनी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत कम करने के प्रयास में है। इसे अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है, जिसमें एलआईसी की वैल्यूएशन 8 से 10 लाख करोड़ रुपये आंके जाने के अनुमान हैं। इस डील से सरकार को 80 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक हासिल हो सकते हैं।

BPCl का होगा प्राइवेटाइजेशन

सरकारी तेल विपणन कंपनी बीपीसीएल का पूरी तरह से निजीकरण (BPCL Privatisation) करने का प्रस्ताव है। इसमें सरकार की 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके लिए वेदांता, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और थिंक गैस जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इस सौदे से सरकार को 28 हजार करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं।

CEL, IDBI Bank भी लिस्ट में

सरकार सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) में भी पूरी हिस्सेदारी बेचने के प्रयास में है। इसके लिए सरकार को बोलियां प्राप्त हो चुकी हैं। मंत्रिमंडल से आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के रणनीतिक विनिवेश की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। इसमें सरकार और एलआईसी की 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इसे भी पढ़ें: पतंजलि की रुचि सोया ने साल भर में डबल कर दिया इंवेस्टर्स का पैसा, आने वाला है शानदार ऑफर

इन कंपनियों में भी हिस्सा बेचेगी सरकार

मार्च 2022 से पहले जिन कंपनियों का निजीकरण करने की योजना है, उनमें शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Shipping Corporation Of India) भी शामिल है। इसमें सरकार की 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) भी निजीकरण की कतार में है। इसमें सरकार की 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष हिस्सेदारी है। शेष 49 प्रतिशत शेयर ओएनजीसी (ONGC) के पास हैं, जिन्हें भी बेचा जाना है। सरकार को नीलाचल इस्पात (Neelachal Ispat) के लिए कई कंपनियों से प्रस्ताव हासिल हुआ है। भारी मशीनें बनाने वाली सरकारी कंपनी बीईएमएल (BEML) भी इस सूची में शामिल है। इसमें सरकार की 54.03 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनमें से 26 प्रतिशत हिस्सा बेचने की योजना है।

पढें व्यापार समाचार (Business News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट