टाटा ग्रुप केरल में एक बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने राज्य में जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) परियोजना शुरू करने के लिए करीब 10,000 करोड़ रुपये (लगभग 1 अरब डॉलर) के निवेश को मंजूरी दिलाने के लिए आवेदन किया है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह केरल के औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ा निवेश साबित हो सकता है।

ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में केरल के मुख्यमंत्री ने बताया कि टाटा ग्रुप राज्य में शिपबिल्डिंग कारोबार में निवेश करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार आवश्यक जमीन उपलब्ध कराएगी, ताकि कंपनी जल्द से जल्द काम शुरू कर सके। सरकार इस निवेश को राज्य में उद्योग और रोजगार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य प्रशासन इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है। उम्मीद है कि अगले एक महीने के भीतर इस निवेश योजना को मंजूरी मिल सकती है।

टाटा के लिए एक नया कारोबार क्षेत्र

अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो शिपबिल्डिंग टाटा ग्रुप के लिए एक नया कारोबार क्षेत्र होगा। फिलहाल समूह स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग, कॉफी, एयरलाइंस और लग्जरी कारों समेत कई सेक्टरों में कारोबार करता है। ऐसे में जहाज़ निर्माण के क्षेत्र में एंट्री टाटा के कारोबार के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए टाटा ग्रुप के प्रवक्ता से संपर्क किया गया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई थी।

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रतिद्वंद्वी ग्रुप अडानी ग्रुप के विझिनजम स्थित डीप-वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब को MSC मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी से 1.4 अरब डॉलर का कमिटमेंट मिला है; यह डील अभी सतीसन सरकार की समीक्षा के दायरे में है।

ब्लूमबर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित क्षमता या उत्पादन की समय-सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

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