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इकॉनमी के लिए खतरे की घंटी? L&T चीफ के बाद HDFC प्रमुख बोले- मंद पड़ रही अर्थव्यवस्था की रफ्तार

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा कि नकदी संकट की वजह से बहुत सारी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां कर्ज देने से झिझक रही हैं।

Author मुंबई | Published on: August 3, 2019 8:12 AM
Deepak ParekhHDFC के चेयरमैन दीपक पारेख। (इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश की अर्थव्यवस्था की हालत को लेकर लार्सन ऐंड टुब्रो के चेयरमैन एएम नाइक द्वारा चिंता जताए जाने के बाद कुछ ऐसे ही विचार एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने जाहिर किए हैं। पारेख ने शुक्रवार को कहा कि इकॉनमी की रफ्तार में सुस्ती साफ तौर पर नजर आ रही है। उनके मुताबिक, समस्याओं को बढ़ाने में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFCs) के समक्ष नकदी की कमी और बैंकों द्वारा कर्ज देने के प्रति अड़ियल रुख अपनाना बड़ी वजहें हैं।

पारेख ने कहा, ‘मेरे हिसाब से जरूरी यह है कि इकॉनमी में ग्रोथ के लिए कर्जदाताओं में दोबारा से विश्वास पैदा किया जाए।’ पारेख के मुताबिक, फिलहाल बड़ी चुनौती कर्जदाताओं द्वारा रिस्क लेने से झिझकना है। उन्होंने कहा, ‘बैंकों ने कर्ज देने को लेकर अड़ियल रुख अपना रखा है।’ एचडीएफसी के एनुअल जनरल मीटिंग में पारेख ने कहा कि नकदी संकट की वजह से बहुत सारी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां कर्ज देने से झिझक रही हैं। इसका कई सेक्टरों पर बुरा असर पड़ा है। एचडीएफसी चेयरमैन ने उम्मीद जताई कि त्योहारों का मौसम नजदीक आते-आते हालात सामान्य होंगे।

उन्होंने माना कि इकॉनमी में सुस्ती साफ तौर पर नजर आती है, जो वित्त वर्ष 2019 में 6.8 प्रतिशत के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों से भी जाहिर होता है। हालांकि, आर्थिक रफ्तार में यह सुस्ती अस्थाई है। बता दें कि पारेख और नाइक के विचार इसलिए भी प्रासंगिक हो जाते हैं क्योंकि जीडीपी ग्रोथ मार्च की तिमाही में घटकर 5.8 प्रतिशत रह गई। वहीं, आठ कोर इंडस्ट्रीज की ग्रोथ 50 महीने के न्यूनतम स्तर पर गिरते हुए जून में 0.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। मई में यह आंकड़ा 4.3 प्रतिशत का था।

गुरुवार को एलएंडटी के चेयरमैन नाइक ने कहा था कि हमें खुद को खुशकिस्मत समझना चाहिए अगर जीडीपी का आंकड़ा 6.5 प्रतिशत पर टिका रहता है। उन्होंने धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए गुजरात में नरेंद्र मोदी के सीएम रहने के दौरान इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी देने के तरीका को अपनाने का सुझाव दिया।

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