अब एथेनॉल को सिर्फ पेट्रोल में मिलाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। केंद्र सरकार इसे घरों में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक नई पॉलिसी पर काम कर रहा है।

अगर यह योजना लागू होती है तो एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश में तैयार हो रहे अतिरिक्त एथेनॉल का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पॉलिसी एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने और सप्लाई चेन बनाने के नियमों पर विचार करेगी।

ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फ्यूल सप्लायर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडस्ट्री संगठन भी इस फ्रेमवर्क पर सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने बताया कि खाना पकाने के लिए एक वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन पॉलिसी पर काम चल रहा है। इससे घरों में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर एलपीजी के साथ-साथ एथेनॉल को भी अपनाया जा सकेगा।

अप्रैल में आई थी रिपोर्ट

अप्रैल में रिपोर्ट आई थी कि सरकार के कहने पर एथेनॉल-बेस्ड कुकिंग स्टोव (Ethanol based cooking stove) का परीक्षण किया जा रहा था ताकि घरों में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का विकल्प मिल सके।

कितनी है एथेनॉल प्रोडक्शन क्षमता?

CareEdge रेटिंग्स की मई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एथेनॉल प्रोडक्शन क्षमता सालाना 20 बिलियन लीटर से अधिक हो गई है। इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में 4 बिलियन लीटर की अतिरिक्त क्षमता शुरू होने वाली है। जिससे कुल स्थापित क्षमता लगभग 24 अरब लीटर तक पहुंच जाएगी।

इसके विपरीत, सरकार का E20 मिश्रण कार्यक्रम प्रति वर्ष लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल की खपत करता है। शराब निर्माता, दवा कंपनियां और रसायन उत्पादक 3 – 3.5 अरब लीटर की मांग पूरी करते हैं। इसके बावजूद लगभग 7 अरब लीटर की अप्रयुक्त क्षमता शेष है।

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के अधिकारियों ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों में निर्यात के अवसरों की खोज शुरू कर दी है, जहां मिश्रण लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन क्षमता अपर्याप्त है।

एथेनॉल एटीएम

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि इस योजना को शुरू करने के लिए तेल मार्केटिंग कंपनियों से एथेनॉल एटीएम लगाने के लिए कहा जा सकता है। इससे यूजर स्टोव के लिए कनस्तर में एथेनॉल ले सकेंगे। ये एटीएम फ्यूल रिटेल आउटलेट पर लगाए जा सकते हैं।

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देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा व प्रदूषण कम करने के अहम उपाय के रूप में देख रही है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन और एथेनॉल ब्लेंडिंग दोनों पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है।

लेकिन आखिर एथेनॉल क्या होता है, इसे किन फसलों से बनाया जाता है। आइए समझते हैं…