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अडानी समूह को झटका! शेयर धांधली केस में निचली अदालत ने दी थी AEL को क्लीन चिट; अब सेशन कोर्ट ने पलटा फैसला

अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अडानी और कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अडानी पर कथित तौर पर कंपनी के शेयर की कीमतों में धांधली का आरोप है।

Author Translated By नितिन गौतम मुंबई | Updated: January 10, 2020 12:11 PM
गौतम अडानी।

मुंबई की सेशन कोर्ट ने अडानी समूह को झटका देते हुए शेयर हेरा-फेरी के केस में 2014 को दिए गए निचली अदालत के फैसले को बदल दिया है। निचली अदालत ने अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी थी। बता दें कि आरोप है कि साल 1999-2000 में अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अडानी और कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अडानी ने कथित तौर पर कंपनी के शेयर की कीमतों में धांधली की थी। आरोप है कि कंपनी ने केतन पारिख द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के साथ मिलकर यह धांधली की थी। गौरतलब है कि केतन पारिख एक स्टॉक ब्रोकर है, जो कि देश के सबसे बड़े शेयर मार्केट घोटाले में आरोपी है।

बता दें कि सरकार ने करीब 3 साल पहले निचली अदालत के फैसले के खिलाफ इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सेशन जज डीई कोथालिकार ने कहा कि सरकार के फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की जांच में ‘प्रथम दृष्टया’ यह साबित होता है कि अडानी समूह के प्रमोटर्स और केतन पारिख ने गैरकानूनी रूप से करीब 388.11 करोड़ और 151.40 करोड़ रुपए अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी AEL के शेयर्स की कथित धांधली से बनाए।

वकील राजेंद्र पी.पारकर ने बताया कि सेशन कोर्ट के आदेश पर अतिरिक्त सेशन जज द्वारा 27 नवंबर को हस्ताक्षर किए गए और 1 दिसंबर, 2019 को जारी किया गया। फिलहाल केस फिर से सुनवाई के लिए निचली अदालत भेज दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सुनवाई के दौरान डायरेक्टर गौतम अडानी और राजेश अडानी भी अतिरिक्त चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश हों।

सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस द्वारा कोर्ट में दी गई शिकायत के अनुसार, AEL प्रमोटर्स ने केतन पारिख द्वारा नियंत्रित संस्थाओं को गलत नीयत से फंड और शेयर मुहैया कराया। एजेंसी का आरोप है कि ‘जब कंपनी के शेयर के दाम चरम पर थे, तो प्रमोटर्स ने शेयरहोल्डिंग रोक दी और जब कीमत कम हुई तो फिर से शेयर्स की खरीद शुरू कर दी। इस कवायद का उद्देश्य शेयरहोल्डिंग को बरकरार रखना और कंपनी को लाभ पहुंचाना था।’

आरोप है कि केतन पारिख ने सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए प्रमोटर्स की मदद से शेयर की कीमतों को गिरने से रोका। बता दें कि सर्कुलर ट्रेडिंग गैरकानूनी है। सेशन कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि निचली अदालत ने अपने आदेश में गलती की और SFIO को सबूत पेश करने का मौका नहीं दिया।

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