Advance Tax Deadline: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए एडवांस टैक्स भरने की आखिरी तारीख 15 मार्च है। जिन टैक्सपेयर्स की कुल टैक्स देनदारी (TDS एडजस्ट करने के बाद) 10,000 रुपये से ज्यादा बनती है, उन्हें साल के अंत में एक साथ टैक्स देने के बजाय फाइनेंशियल ईयर के दौरान एडवांस टैक्स जमा करना होता है। अगर यह डेडलाइन मिस हो जाती है, तो टैक्सपेयर्स को ब्याज के रूप में पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।
क्या है एडवांस टैक्स?
एडवांस टैक्स को “पे-एज-यू-अर्न” टैक्स सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम के तहत, टैक्सपेयर्स को फाइनेंशियल ईयर के दौरान अपनी अनुमानित टैक्स लायबिलिटी को इनकम कमाने के साथ इंस्टॉलमेंट में भरना होता है।
यह नियम तब लागू होता है जब किसी टैक्सपेयर्स की TDS एडजस्ट करने के बाद कुल टैक्स लायबिलिटी एक फाइनेंशियल ईयर में 10000 रुपये से ज्यादा हो जाती है। वर्ष के आखिर में पूरा टैक्स भरने के बजाय, टैक्स को तय इंस्टॉलमेंट में जमा करना होगा।
किसे देना होता है एडवांस टैक्स?
– वेतन पाने वाले लोग जो किराया, ब्याज, कैपिटल गेन या फ्रीलांस इनकम जैसी एक्स्ट्रा इनकम कमाते हैं।
– फ्रीलांसर और कंसल्टेंट
– प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेंट
– बिजनेस ओनर
– कोई भी टैक्सपेयर जिसकी TDS के बाद टैक्स लायबिलिटी 10000 से ज्यादा हो।
हालांकि, 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटिजन को एडवांस टैक्स देने से छूट है, अगर उनकी बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम नहीं है।
एडवांस टैक्स इंस्टॉलमेंट शेड्यूल
एडवांस टैक्स आमतौर पर फाइनेंशियल ईयर के दौरान चार इंस्टॉलमेंट में दिया जाता है-
– 15 जून: टोटल टैक्स लायबिलिटी का कम से कम 15%
– 15 सितंबर: कम से कम 45% (कुल मिलाकर)
– 15 दिसंबर: कम से कम 75% (कुल मिलाकर)
– 15 मार्च: टोटल टैक्स लायबिलिटी का 100%
15 मार्च की डेडलाइन यह पक्का करने का आखिरी मौका है कि पूरा एडवांस टैक्स अमाउंट पे कर दिया गया है।
एडवांस टैक्स की डेडलाइन मिस करने पर क्या होता है?
- – अगर आप समय पर एडवांस टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग इनकम टैक्स एक्ट के खास प्रोविजन के तहत ब्याज लगाता है।
- – अगर टैक्सपेयर शेड्यूल के हिसाब से एडवांस टैक्स की किस्त पे करने में देरी करते हैं या फेल होते हैं तो सेक्शन 234C के तहत ब्याज लगता है।
- – अगर टैक्सपेयर 31 मार्च तक टोटल टैक्स लायबिलिटी का कम से कम 90% पे करने में फेल होते हैं तो सेक्शन 234B के तहत ब्याज लगता है।
- – दोनों ही मामलों में बकाया कर राशि पर प्रति माह या महीने के कुछ हिस्से के लिए 1% ब्याज के रूप में जुर्माना लगाया जाता है, जब तक कि देनदारी का भुगतान नहीं हो जाता।
एडवांस टैक्स और नॉर्मल टैक्स पेमेंट में क्या है अंतर?
एडवांस टैक्स और रेगुलर टैक्स पेमेंट के बीच मुख्य अंतर टाइमिंग में है। एडवांस टैक्स वित्त वर्ष के दौरान आय होने पर इंस्टॉलमेंट में भुगतान किया जाता है। इसका उद्देश्य वर्ष के आखिर में एक बार में बड़ी टैक्स रकम पे करने के बोझ को कम करना है।
रेगुलर टैक्स पेमेंट का मतलब आमतौर पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले, फाइनल टैक्स लायबिलिटी कैलकुलेट करने के बाद सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पे करना होता है।
एडवांस टैक्स का भुगतान कैसे करें?
– सबसे पहले आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
– यहां पर ई-पे टैक्स पर क्लिक करें।
– अब एडवांस टैक्स (चालान 100) चुनें।
– इसके बाद जरूरी डिटेल्स दर्ज करें।
– अब ऑनलाइन पेमेंट कर दें।
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