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रिलायंस को टक्कर देने अंत समय में उतरी अडानी की कंपनी, भारतीय नेवी सबमरीन प्रोजेक्ट के लिए भर दिया 45,000 करोड़ का टेंडर

इस प्रोजेक्ट के लिए पुराने खिलाड़ियों लार्सन एंड टूब्रो, मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के बीच मुकाबला धा। इन तीनों कंपनियों के पास अपने-अपने शिपयार्ड है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 12, 2019 10:47 AM
अडानी ग्रुप ने पिछले साल रक्षा क्षेत्र की अल्फा टेक्नोलॉजी कंपनी का अधिग्रहण किया था। (फाइल फोटो)

डिफेंस सेक्टर में भारतीय दिग्गज कंपनियों के बीच काफी कड़ा मुकाबला होने वाला है। इसकी एक बानगी भारतीय नौसेना के सबमरीन (पनडुब्बी) प्रोजेक्ट को निविदा को लेकर देखने को मिली। ईटी की खबर के अनुसार इस मेक इन इंडिया के तहत इस परियोजना के लिए अडानी ग्रुप ने सभी को चौंकाते हुए अंतिम समय में 45000 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए टेंडर भरा।

अडानी ग्रुप ने इस टेंडर को भर कर रिलायंस को सीधे-सीधे टक्कर दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए पुराने खिलाड़ियों लार्सन एंड टूब्रो, मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के बीच मुकाबला धा। मालूम हो कि इन तीनों कंपनियों के पास अपने-अपने शिपयार्ड है। आखिरी समय में अडानी ग्रुप के उतरने से डिफेंस सेक्टर में मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।

ईटी की खबर के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि गुजरात के इस ग्रुप ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ मिलकर स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) तैयार कर सकता है। मालूम हो कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को पनडुब्बियों की मरम्मत और उनके रख-रखाव का अनुभव है।

इसमें खास बात यह है कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की तरफ से अलग से निविदा दाखिल की गई है। इससे पहले अडानी समूह ने अपनी महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं के लिए पिछले साल बेंगलुरु की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण किया था। अल्फा कंपनी का रूस और इस्राइल की कंपनियों के साथ समझौता है।

खबर के अनुसार इस बारे में अडानी ग्रुप की तरफ से इस बारे में पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया गया। अडानी ग्रुप अब सरकार की सामरिक साझेदारी मॉडल के तहत तीन बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में प्रतिभागी बन गया है। इसमें भविष्य के लिए फाइटर जेट, नेवल हेलिकॉप्टर्स और पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। इस कॉन्ट्रेक्ट के तहत विदेशी सहयोगी के साथ मिलकर छह पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है।

हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण में है। रक्षा मंत्रालय अगले दो महीने में उपयुक्त भारतीय प्रतिभागियों को शॉर्टलिस्ट करेगा। इस प्रोजेक्ट में विदेशी साझीदारी के रूप में रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और स्वीडन हो सकते हैं। इन विदेशी साझीदारों को चुनने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है। इस साल के अंत तक विदेशी साझीदार का नाम तय होने की उम्मीद है।

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