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अडानी ग्रुप पर घपले का आरोप, डीआरआई ने मांगी डिटेल, तो आरबीआई ने कहा- बैंकों से कस्टमर की जानकारी नहीं मांग सकते

डीआरआई ने कथित 29000 हजार करोड़ रुपये के कोयला का मूल्य अधिक दर्शाने के मामले में दो सरकारी बैंकों से सूचना हासिल करने के लिए आरबीआई की मदद मांगी थी। आरबीआई ने इस पूरे मामले में हाथ खड़े कर दिए।

Author नई दिल्ली | June 24, 2019 8:44 AM
आरबीआई ने कहा, उसके पास बैंकों से ग्राहक की जानकारी मांगने की ताकत नहीं है। (फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक ने अडानी समूह पर घपले के लगे आरोपों के मामले में राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) की मदद के मामले में हाथ खड़े कर दिया है। डीआरआई अडानी समूह समेत अन्य कंपनियों की तरफ से इंडोनेशिया से आयात किए गए कोयले का मूल्य अधिक दर्शाने के मामले की जांच कर रही है।

यह मामला 29000 करोड़ रुपये के कोयला आयात का है। डीआरआई ने इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों से सूचना के लिए आरबीआई की मदद मांगी थी। आरबीआई का कहना है कि उसके पास ऐसी कोई ताकत नहीं है जिसके जरिये वह बैंकों से अपने ग्राहकों की सूचना किसी तीसरे पक्ष को उपलब्ध कराने के लिए बाध्य कर सके।

इस मामले में अडानी समूह के साथ ही अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप और एस्सार समूह की कंपनी भी शामिल है। आरबीआई ने डीआरआई के महानिदेशक डीपी दास को 24 मई को लिखे पत्र में कहा, ‘बताया जाता है कि ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं हो जो आरबीआई को किसी भी बैंक को यह कहने का अधिकार दे कि वह अपने ग्राहकों की सूचना को किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करे। भले ही वह बैंक के हित में या नहीं।’

आरबीआई का कहना है कि सूचना देने का निर्णय बैंक पर निर्भर है क्योंकि इस संबंध में किसी भी विवाद की स्थिति में बैंक ही जिम्मेदार होगा। वहीं दो प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए डीआरआई के साथ सभी सूचनाएं साझा की हैं। वहीं सरकारी क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व बैंक ऑफ बड़ौदा ने गोपनीयता क्लॉज का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था।

डीआईआई ने आरबीआई और बैंक से साल 2016 के बाद की संबंधित कंपनियों से जुड़ी सभी सूचनाएं साझा करने को कहा था। इससे पहले मई 2016 में राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन को पत्र लिखकर डीआरआई को जांच में सहयोग करने के लिए लिखा था। उस समय एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने बैंक की सिंगापुर शाखा से दस्तावेज साझा करने से इनकार कर दिया था।

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