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‘सितंबर तक कम होंगी नौकरियां पर, उसके बाद अच्छे दिन आने के आसार’

रिपोर्ट के मुताबिक केपीओ सेक्टर में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है। उम्मीद का जा रही है कि अगले वित्त वर्ष तक इस सेक्टर में करीब डेढ़ लाख प्रोफेशनल्स को नौकरियां मिलेंगी।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के बाद नौकरियों के मामले में अच्छे दिन आ सकते हैं। हालांकि, पहली छमाही यानि सिंतबर तक नौकरियों में करीब 6 फीसदी की गिरावट आने का अंदेशा है। इसकी वजह छोटे और मझोले किस्म के व्यापार में कमी बताई जा रही है। टीम लीज इम्प्लॉयमेंट आउटलुक रिपोर्ट 2017-18 के मुताबिक एन्ट्री और मिडिल लेवेल के जॉब में क्रमश: 8 और पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की जा रही है जबकि सीनियर लेवेल के पदों पर नौकरियों में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

टीम लीज सर्विसेज एग्जिक्यूटिव के वाइस प्रेसिडेंट और को-फाउंडर रितुपर्णा चक्रबर्ती का कहना है, “सरकार की डिजिटल मुहिम, खासकर छोटे और मध्यम इन्टरप्राइजेज की वजह से साल की दूसरी छमाही में नौकरियों के लिहाज से बेहतर रहने का अनुमान है।” उनके मुताबिक, मोबाइल वैलेट और फिनटेक कंपनियां हायरिंग का प्लान बना रही हैं जबकि फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर की बड़ी एमएनसी कंपनियां भी विदेशी निवेश के सहारे कारोबार बढ़ाने और हायरिंग प्रोसेस को मजबूत करने में जुट गई हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक केपीओ सेक्टर में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है। उम्मीद का जा रही है कि अगले वित्त वर्ष तक इस सेक्टर में करीब डेढ़ लाख प्रोफेशनल्स को नौकरियां मिलेंगी। इस बीच नोटबंदी का वजह से रियल एस्टेट और कन्सट्रक्शन सेक्टर लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। वहां नौकरी के अवसर फिलहाल कम ही दिखाई देते हैं।

मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी फिलहाल नई नौकरियों के लिए अनुकूल नहीं है। एफएमसीजी, एफएमसीडी, बीपीओ, आईटीज और पॉवर एंड इनर्जी सेक्टर में भी नौकरियां नहीं हैं। हालांकि, ट्रेवेल एंड हॉस्पिटलिटी, एग्रीकल्चर, एग्रोकेमिकल्स और शिक्षा सेवा के क्षेत्र में भी मामूली रूप से नौकरियों के अवसर उपलब्ध हैं।

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