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बुलंदशहर और ग्रेटर नोएडा के बीच बसेगा नया नोएडा

करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर एकीकृत न्यू नोएडा शहर को बसाने की योजना है। बुलंदशहर की सीमा तक लगने वाले इस क्षेत्र से नोएडा का आकार मौजूदा के मुकाबले करीब दोगुना हो जाएगा।

Author नोएडा | Updated: January 7, 2021 9:19 AM

इस क्षेत्र में भी रिहायशी, हरित क्षेत्र, बाजार एवं औद्योगिक तथा वाणिज्यिक गतिविधियां नोएडा की तर्ज पर शामिल होंगी। एकीकृत न्यू नोएडा के लिए जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने नोएडा प्राधिकरण को दी है।

प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक नया नोएडा बसाने के लिए शासन स्तर से दो माह पहले ही काम शुरू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में विकास का नया प्रारूप तैयार कर इसे नोएडा प्राधिकरण को सौंपे जाने की उम्मीद है। जिसके बाद जमीनी स्तर पर एकीकृत शहर बसाने का काम शुरू होगा।

इसके लिए ग्रेटर नोएडा से बुलंदशहर के बीच करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। किसानों से आपसी समझौते के आधार पर जमीन खरीदने के बाद एकीकृत शहर बसने के बाद निवेश और रोजगार के मार्ग प्रशस्त होंगे। मौजूदा औद्योगिक महानगर नोएडा करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर बसा है।

1976 में न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के अस्तित्व में आने के बाद इस क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। नोएडा की सफलता के बाद ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास क्षेत्र का गठन किया गया।

वर्तमान नोएडा के अधिकांश क्षेत्रफल को विकसित किया जा चुका है। मास्टर प्लान 2021 और 2031 के आधार पर समूची जमीन का अलग-अलग श्रेणी में समायोजन किया जा चुका है। करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल शहरीकरण की श्रेणी में है। जिसमें 18 फीसद पर औद्योगिक, 37 फीसद पर आवासीय और अन्य में संस्थागत, हरित और वाणिज्यिक उपयोग अच्छांदित है।

बताया गया है करीब 250 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अभी किया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक दिल्ली से सटे और यमुना एक्सप्रेस वे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे, डीएफसीसी से सीधा जुड़ा होने और जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की वजह से देश- विदेश की नामचीन कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश करना चाहती हैं।

हाल ही में शासन स्तर पर बुलंदशहर और ग्रेटर नोएडा के बीच करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन को विकसित करने पर विचार किया गया। करीब दस साल पहले चोला इलाके में यूपीएसआइडीसी ने इसे अधिसूचित किया था। चूंकि यूपीएसआइडीसी और अब यूसीसीडा केवल औद्योगिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराता है, न कि समूचे अधिसूचित क्षेत्र का विकास करता है। ऐसे में नोएडा को इस एकीकृत शहर को बसाने की जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। भविष्य की विकास योजनाओं और राजस्व के लिए यह एकीकृत शहर बड़ी राहत दे सकता है।

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