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मोदी सरकार को नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी की सलाह, गरीबों की मदद के लिए जेब और ढीली करें

अभिजीत बनर्जी ने कहा कि मनरेगा को किसी आपात स्थिति में मदद के लिहाज से डिजाइन नहीं किया गया है। इसलिए हमें पूरे वेलफेयर सिस्टम को लेकर ही सोचने की जरूरत है। हमें यह भी सोचना होगा कि गरीबों की बड़ी संख्या शहरों में भी है और शहरी गरीबों के लिए क्या किया जा सकता है।

abhijit banerjeeनोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी की मोदी सरकार को सलाह

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था और गरीबों को उबारने के लिए सरकार को अपना खर्च बढ़ाने की सलाह दी है। बनर्जी ने कहा कि सरकार को अपने सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर बदलाव करने चाहिए। कोरोना की आपदा ने हमारे सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संकट में मनरेगा को शॉर्ट टर्म इमरजेंसी टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इसे ऐसे किसी मकसद के साथ तैयार नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मनरेगा को किसी आपात स्थिति में मदद के लिहाज से डिजाइन नहीं किया गया है। इसलिए हमें पूरे वेलफेयर सिस्टम को लेकर ही सोचने की जरूरत है। हमें यह भी सोचना होगा कि गरीबों की बड़ी संख्या शहरों में भी है और शहरी गरीबों के लिए क्या किया जा सकता है।’

नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन कार्य़क्रम को संबोधित करते हुए अभिजीत बनर्जी ने ये सुझाव दिए। सरकार की ओर से लॉन्च ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ स्कीम को लेकर बनर्जी ने कहा कि इस योजना को यह सवाल पूछे बगैर ही लॉन्च करना चाहिए कि कौन इसके तहत लाभ का हकदार है और कौन नहीं।

बनर्जी ने कहा कि वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम को लेकर यह सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए कि क्या आप भारत के नागरिक हैं? या फिर आप इसके हकदार हैं? बनर्जी ने कहा कि मैं मानता हूं कि सिस्टम में भरोसा होना इस वक्त सबसे ज्यादा अहम है। मैं यही कहूंगा कि इस समय यह पूछना कि आप इस स्कीम के हकदार हैं या फिर नहीं, सिस्टम में भरोसे को कम करेगा।

हालांकि इवेंट में मौजूद देश के व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस सिस्टम के जरिए ही गरीब लोगों तक राशन पहुंचाने का काम किया है। सरकार किसी गरीब को फूड वाउचर देती, उससे बेहतर राशन मुहैया कराना है। कोई भी व्यक्ति फूड वाउचर नहीं खा सकता। टीवी सोमनाथन ने कहा कि भले ही इस सिस्टम में कुछ कमियां रही हैं, लेकिन बीते 4 महीनों में यह सबसे ज्यादा कारगर साबित हुआ है। हमने अपने खाद्यान्न के स्टॉक से इस स्कीम के जरिए गरीबों को बड़े पैमाने पर मदद दी है।

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