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FMCG में कौन सा करने जा रहे आसन? ऐंकर के सवाल पर क्या बोले योग गुरु रामदेव

Ruchi Soya FPO: बाबा रामदेव के नेतृत्व वाले पतंजलि ग्रुप की सहायक कंपनी रूचि सोया का एफपीओ के जरिये शेयर बाजार से 4300 करोड़ रुपए जुटा रही है।

Baba Ramdev| Ruchi Soya IPO| Ruchi Soya News
रूचि सोया का एफपीओ 28 मार्च को बंद हो जाएगा। (फाइल फोटो)

बाबा रामदेव इन दिनों पतंजलि की सहायक कंपनी रूचि सोया के एफपीओ के लिए जमकर प्रचार कर रहे हैं। इसी कड़ी में बाबा रामदेव आज तक पर पहुंचे, जहां उन्होंने रूचि सोया के भविष्य की योजनाओं के बारे में दर्शकों को बताया। कंपनी के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि कंपनी तेजी के साथ एफएमसीजी क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। जल्द पतंजलि का पूरा फूड पोर्टफोलियो रूचि सोया को हस्तांतरित किया जाएगा ।

इसी दौरान ऐंकर ने सवाल पूछा कि बाबा रामदेव अब एफएमसीजी क्षेत्र में कौन सा आसन करने वाले है। इस पर बाबा रामदेव ने जबाब दिया कि वह विजय का सिंहासन और भारत माता को परम वैभवशाली बनाने का आसान कर रहे हैं। आगे उन्होंने बताया कि वह सुबह 4 बजे जगकर सुबह 10 बजे तक योग करते है और फिर 10 बजे से रात तक वह कर्मयोग करते हैं।

4300 करोड़ रुपए जुटाने की योजना: बाबा रामदेव के नेतृत्व वाले पतंजलि ग्रुप की सहायक कंपनी रूचि सोया का एफपीओ के जरिये शेयर बाजार से 4300 करोड़ रुपए जुटा रही है। कंपनी का एफपीओ 28 मार्च तक खुला रहेगा। एफपीओ से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल रुचि सोया का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। फिलहाल कंपनी पर 3300 करोड़ रुपए का कर्ज है। एफपीओ से आने वाले बाकी बचे पैसे का इस्तेमाल कंपनी की कार्यशील पूंजी (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

एफपीओ से निवेशकों का मोह भंग: अब तक रुचि सोया के एफपीओ में निवेशक रुचि लेते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। गुरुवार को एफपीओ को खुलने के बाद से शुक्रवार को बाजार बंद होने तक के आंकड़ों की बात की जाए तो रुचि सोया का एफपीओ मात्र 37 फीसदी ही भरा है।

2019 में खरीदी रूचि सोया: पतंजलि के द्वारा रुचि सोया को दिसंबर 2019 में दिवालिया प्रकिया के तहत 4350 करोड़ रुपए मे खरीदा था। पतंजलि समूह का हिस्सा बनने के बाद कंपनी मुनाफे में आई है इसके साथ कंपनी की आय भी बढ़ी है।

पतंजलि के पास रुचि सोया की 98.9 फीसदी हिस्सेदारी है। बाजार नियामक सेबी के मुताबिक शेयर बाजार सूचीबद्ध किसी भी कंपनी के प्रवर्तकों के पास कंपनी में 75 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं हो सकती है। एफपीओ के बाद रुचि सोया ने पतंजलि की हिस्सेदारी 81 फीसदी रह जाएगी।

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