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UIDAI ने किया साफ- इस सहूलियत के लिए जारी रहेगा आधार का इस्तेमाल

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण(यूआईडीएआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि लाभार्थी आधार सत्यापन के जरिये माइक्रो एटीएम से एलपीजी सब्सिडी और अन्य सरकारी भुगतान निकालना जारी रख सकते हैं।

Author October 19, 2018 1:03 PM
आधार के इस्तेमाल को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले से जुड़ी कानूनी राय में कहा गया है कि बैंक सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) की सुविधा देना जारी रख सकते हैं।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण(यूआईडीएआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि लाभार्थी आधार सत्यापन के जरिये माइक्रो एटीएम से एलपीजी सब्सिडी और अन्य सरकारी भुगतान निकालना जारी रख सकते हैं। आधार के इस्तेमाल को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले से जुड़ी कानूनी राय में कहा गया है कि बैंक सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) की सुविधा देना जारी रख सकते हैं। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा विकसित एईपीएस एक भुगतान सेवा है। इसके जरिये वित्तीय संस्थाएं आधार संख्या एवं उसके प्रमाणन के माध्यम से वित्तीय लेनदेन की सेवा उपलब्ध कराती हैं। आधार जारी करने वाले यूआईडीएआई ने बयान जारी कर कहा है, ‘‘कानूनी सलाह लेने के बाद यूआईडीएआई ने बैंकों को एईपीएस सुविधा का निर्बाध इस्तेमाल जारी रखने को कहा है क्योंकि इस तरह की लेनदेन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के अंतर्गत आता है, जहां आधार का इस्तेमाल किया जा सकता है।’’ बयान में कहा गया है, ‘‘एईपीएस सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए काफी मददगार साबित होता है। पहल और उज्ज्वला योजना के करीब 14 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने बैंक खाते में गैस सिलेंडर की सब्सिडी प्राप्त होती है।

इसी के साथ केंद्र सरकार ने बुधवार को उन खबरों को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि करीब 50 करोड़ मोबाइल फोन नंबरों के डिसकनेक्शन का खतरा पैदा हो गया है। सरकार ने इसे पूरी तरह से ‘झूठ और मनगढंत’ खबर बताया है। संचार मंत्रालय ने कहा, “ऐसी खबरों से मोबाइल यूजर्स के बीच भय का माहौल पैदा किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि आधार वेरिफिकेशन के माध्यम से खरीदे गए सिम कार्ड्स डिसकनेक्ट हो जाएंगे, अगर उसे दुबारा वेरिफाई नहीं किया गया।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आधार पर दिए गए फैसले में कहीं भी यह निर्देश नहीं दिया है कि आधार केवाईसी के आधार पर जारी किए गए नंबरों को डिसकनेक्ट कर दिया जाए। इन रिपोर्टो में जिन मोबाइल नंबरों के डिसकनेक्शन की बात कही गई थी, वे देश के करीब आधे मोबाइल नंबर हैं। दूरसंचार विभाग (डीओटी) और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आज एक संयुक्त वक्तव्य में स्पष्ट किया कि मीडिया में कुछ रिपोर्टे बताती हैं कि 50 करोड़ मोबाइल नंबरों के बंद होने का जोखिम है। यह कुल सक्रिय मोबाइलों का लगभग आधा हिस्सा है। ऐसी रिपोर्टे पूरी तरह से असत्य और काल्पनिक हैं।

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