8वें वेतन आयोग को लेकर बहस अब तेजी से एक अहम पहलू फिटमेंट फैक्टर पर आकर सिमट गई है। कर्मचारी यूनियन और मार्केट के अनुमानों के बीच इस बात पर गहरा मतभेद उभर रहा है कि 50 लाख से ज्यादा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है।

जहां कर्मचारी प्रतिनिधि 3.83 जितना ऊंचा फिटमेंट फैक्टर रखने पर जोर दे रहे हैं, वहीं ब्रोकरेज के अनुमानों के मुताबिक यह दायरा काफी कम यानी 1.8 से 2.46 के बीच रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि सैलरी में होने वाली संभावित बढ़ोतरी में काफी बड़ा अंतर (लगभग 13% से लेकर 34% से भी ज़्यादा तक) हो सकता है।

यूनियन बनाम एक्सपर्ट: उम्मीदों में भारी अंतर

केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सर्वोच्च सलाहकार संस्था नेशनल काउंसिल-JCM (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग को दिए अपने ज्ञापन में 3.83 के फिटमेंट फैक्टर के साथ-साथ 69,000 रुपये के न्यूनतम वेतन की मांग की है। यह मांग 5 सदस्यों वाले परिवार के उपभोग के एक संशोधित मॉडल पर आधारित है। यह पहले के 3-यूनिट वाले नियम से एक बड़ा बदलाव है, जिससे वेतन की गणना का आधार काफ़ी ऊंचा हो गया है।

इन बातों को ध्यान में रखकर प्रस्तावित 3.83 का फिटमेंट फैक्टर निकाला गया है –

7वें वेतन आयोग द्वारा 2015-16 में उपयोग किए गए स्तरों की तुलना में जीवन निर्वाह लागत सूचकांक काफी अधिक है।
पिछले एक दशक से लगातार बढ़ती महंगाई के कारण वेतन की वास्तविक क्रय-शक्ति में आई कमी की भरपाई करने की जरूरत।
मौजूदा मूल वेतन पर छोटे-मोटे बदलावों के बजाय, एक ज़्यादा यथार्थवादी गुणांक (Multiplication Factor) लागू करने की मांग।

इस संस्था ने आगे यह भी तर्क दिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के वेतन और निजी क्षेत्र के मानकों के साथ समानता बनाए रखने के लिए, साथ ही रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पर्याप्त लाभों को सुनिश्चित करने के लिए भी एक ऊंचे फिटमेंट फैक्टर का होना बेहद ज़रूरी है , क्योंकि पेंशन सीधे तौर पर मूल वेतन से जुड़ी होती है।

कर्मचारियों के अन्य संगठनों ने इस मामले में थोड़ा नरम रुख अपनाया है। उदाहरण के लिए, डाक कर्मचारियों के संगठन FNPO ने 3.0 से 3.25 के दायरे में फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें न्यूनतम वेतन लगभग 54,000 रुपये तय करने की बात कही गई है। सभी संघों के बीच, 3.0 से ज़्यादा का फिटमेंट फैक्टर एक आम उम्मीद के तौर पर उभरा है, जिसकी मुख्य वजह महंगाई की चिंताएं और जीवन-यापन की बढ़ती लागत है।

इसके ठीक विपरीत, ब्रोकरेज कंपनियां वेतन बढ़ोतरी के काफ़ी कम आंकड़े पेश कर रही हैं। -कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ को लगभग 1.8 के फिटमेंट फैक्टर की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि सैलरी में 13% की बढ़ोतरी होगी।

एम्बिट कैपिटल को एक बड़ी रेंज दिख रही है, जिसमें बेस केस 1.82 (~14% बढ़ोतरी) है और ऊपरी रेंज 2.15–2.46 है, जिसका मतलब है कि सैलरी में 30–34% की बढ़ोतरी होगी।

इससे बातचीत के लिए एक साफ़ दायरा बन जाता है ( 1.8 बनाम 3.83) जो आखिरकार नई वेतन व्यवस्था के तहत सैलरी स्ट्रक्चर तय करेगा।

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का क्या होता है सैलरी पर असर?

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल पे मैट्रिक्स के तहत बेसिक पे को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। इस मल्टीप्लायर में छोटे-मोटे बदलाव भी टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाली सैलरी) को काफी हद तक बदल सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

1.8 के फिटमेंट फैक्टर पर, न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 32,400 रुपये हो जाएगा।
2.46 पर (ब्रोकरेज का ऊपरी अनुमान), यह बढ़कर लगभग 44,000 रुपये से ज़्यादा हो सकता है।
3.83 पर (यूनियन की मांग), न्यूनतम वेतन बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है।

यानी कम और ज़्यादा बढ़ोतरी वाले मामलों के बीच का अंतर मौजूदा बेसिक पे से दोगुने से भी ज्यादा हो सकता है, जिससे 8वें वेतन आयोग के नतीजों में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम चीज बन जाता है।

क्यों ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं यूनियन?

कर्मचारियों के संगठनों ने अपनी मांगों को वेतन गणना में ढांचागत बदलावों से जोड़ा है:

– 3 सदस्यों वाले परिवार के बजाय 5 सदस्यों वाले परिवार को आधार बनाना।
– बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत।
– जरूरतों पर आधारित न्यूनतम वेतन के नियमों के हिसाब से चलना।
– समय-समय पर वेतन संशोधन और पेंशन में बेहतर समानता की मांग।

यूनियन का तर्क है कि ये सभी बातें 3.0 से काफी ज्यादा मल्टीप्लायर को सही ठहराती हैं।

8वां वेतन आयोग

सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जिसमें प्रो. पुलक घोष सदस्य और पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं।

मुख्य बातें:

– इसके दायरे में वेतन मैट्रिक्स, भत्ते और पेंशन में संशोधन शामिल है।
– रिपोर्ट की समय-सीमा: 18 महीने के भीतर (लगभग मई 2027 तक)।
– लागू होने की तारीख: 1 जनवरी, 2026 (संभवतः बकाया राशि के साथ)।
– मौजूदा स्थिति: परामर्श शुरू, यूनियनें दबाव बढ़ा रही हैं।

अप्रैल 2026 तक, आयोग ने शुरुआती काम शुरू कर दिया है –

– आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया गया।
– सलाहकारों को नियुक्त किया जा रहा है।
– दिल्ली, पुणे और देहरादून जैसे शहरों में हितधारकों के साथ परामर्श की योजना बनाई गई है।

कर्मचारी यूनियनों ने पहले ही ज्ञापन सौंप दिए हैं, जिसमें ‘फिटमेंट फैक्टर’ बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है; इससे संकेत मिलता है कि आने वाली चर्चाओं में यह मुख्य मुद्दा होगा।

कितना सैलरी हाइक वास्तविक माना जा सकता है?

अंतिम फैसला संभवतः वित्तीय अनुशासन (फिस्कल प्रूडेंस) और कर्मचारियों की मांगों के बीच संतुलन बनाते हुए लिया जाएगा।

– लो-एंड परिदृश्य (1.8–2.0): इस स्थिति में कर्मचारियों की सैलरी में करीब 10–15% तक बढ़ोतरी हो सकती है।
– मिड-रेंज परिदृश्य (2.15–2.46): अगर फैसला इस दायरे में आता है तो 20–34% तक सैलरी बढ़ने की संभावना बनती है।
– हाई-एंड परिदृश्य (3.0+): यदि इतना बड़ा फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो यह वेतन में बड़ा और परिवर्तनकारी उछाल साबित होगा।

पिछले ट्रेंड्स को देखते हुए, सरकारें आम तौर पर मांगों और वित्तीय वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाती रही हैं यानी 3.83 तक की बढ़ोतरी की संभावना कम है, लेकिन 2.0 से ऊपर थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग

केंद्र सरकार के 1.2 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जरूरी खबर है। नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को 51 पन्नों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कई मुख्य मांगें बताई गई हैं। इनमें सबसे अहम मांग 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो इससे वेतन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

[डिस्क्लेमर: बताए गए आंकड़े मौजूदा प्रस्तावों, विशेषज्ञों के अनुमानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा पर आधारित हैं। सैलरी में असल बदलाव 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और उसके बाद सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेंगे।]