8th Pay Commission के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन संशोधन से जुड़ा डेटा जमा करने की समय-सीमा आज समाप्त हो रही है। आयोग ने मंत्रालयों, विभागों, सरकारी संगठनों और अन्य संबंधित कार्यालयों को अपने आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 30 जून 2026 तक जानकारी भेजने के निर्देश दिए थे। फिलहाल डेडलाइन बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, “8वें वेतन आयोग की डेटा जरूरतें बहुत ज्यादा हैं। आयोग के लिए इस पोर्टल पर डेटा जमा करने का अनुरोध सिर्फ इसी पोर्टल के जरिए किया गया है। कमीशन फिजिकल डेटा/स्टैंड एबव एक्सेल शीट/हार्ड कॉपी/ईमेल वगैरह पर विचार नहीं करेगा/उनका ध्यान नहीं रखेगा।”

सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल से ही जमा करना होगा डेटा

आयोग ने साफ कर दिया है कि सारी जानकारी तय ऑनलाइन पोर्टल से ही अपलोड करनी होगी। उसने डेटा जमा करने के लिए एक खास लिंक भी दिया है। जरूरी जानकारी जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून यानी आज है।

स्वीकार नहीं किया जाएगा फिजिकल सबमिशन

आयोग ने साफ किया है कि वह प्रिंटेड डॉक्यूमेंट, स्टैंडअलोन एक्सेल शीट, हार्ड कॉपी या ईमेल से भेजी गई जानकारी सहित फिजिकल फ़ॉर्म में जमा किया गया डेटा स्वीकार नहीं करेगा।

कमीशन के मुताबिक, सिर्फ तय समय-सीमा के अंदर ऑफिशियल पोर्टल से अपलोड किए गए डेटा पर ही रिव्यू के लिए विचार किया जाएगा।

सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र को मंजूरी दी और आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया।

8वें वेतन आयोग का कार्यक्षेत्र

8वें वेतन आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा कर जरूरी बदलावों की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग सिफारिश करते समय मौजूदा जरूरतों, अलग-अलग विभागों की आवश्यकताओं और सरकार की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगा।

यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों, रक्षा बलों, अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFoS), केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों, भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग, RBI को छोड़कर अन्य नियामक संस्थाओं, सुप्रीम कोर्ट, कुछ हाई कोर्ट और केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को कवर करेगा।

सिफारिशें करने से पहले इन बातों पर विचार किया जाएगा

– देश के आर्थिक हालात और फिस्कल समझदारी की जरूरत।
– डेवलपमेंट के खर्च और भलाई के कामों के लिए जरूरी रिसोर्स मौजूद हों।
– बिना पैसे वाली पेंशन स्कीम की बिना पैसे वाली लागत।
– राज्य सरकारों के फाइनेंस पर सिफारिशों का संभावित असर, जो आमतौर पर कुछ बदलावों के साथ सिफारिशों को अपनाती हैं।

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केंद्र सरकार ने हाल ही में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स और ब्याज आय पर कर को खत्म करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।

इसके बाद Government Securities (G-Sec) एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। लेकिन आखिर Government Securities क्या होती हैं और सरकार इनके जरिए पैसा कैसे जुटाती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं…