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केवल 87 लोग दबाए बैठे हैं बैंकों के 85 हजार करोड़ रुपए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्यों नहीं पब्लिक कर देते इनके नाम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने 500 करोड़ रुपए से अधिक के कर्जदारों की सूची मांगी थी तो यह आंकड़ा सामने आया है। अगर हमने 100 करोड़ रुपए बकाया वालों की लिस्ट मांगी होती तो यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ के पार होता।
Author October 25, 2016 08:45 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से उन लोगों के बारे में जानकारी मांगी थी जिन पर 500 करोड़ रुपए अधिक का बैंक लोन बकाया है। जानकारी में यह बात निकलकर आई है कि केवल 87 लोगों पर पब्लिक सेक्टर बैंक का 85 हजार करोड़ रुपया बकाया है। इस संबंध में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से इन लोगों के नाम सार्वजनिक करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई को बैंको के लिए नहीं, बल्कि देश की भलाई के लिए काम करना चाहिए और इन सबसे बड़े बकायदारों के नाम समाने लाने चाहिए।

भारत के चीफ जस्टिस टी. एस. ठाकुर ने आरबीआई द्वारा सौंपी गई बकायदारों की एक लिस्ट पढ़ने के बाद यह खुलासा किया कि ऐसे 87 लोग हैं जिनपर बैंकों के 500 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है, इस तरह इन लोगों पर कुल 85 हजार करोड़ रुपए बकाया है। पीठ ने कहा कि हमने 500 करोड़ रुपए से अधिक के कर्जदारों की सूची मांगी थी तो यह आंकड़ा सामने आया है। अगर हमने इससे नीचे के कर्जदारों की सूची मांगी होती तो यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए से अधिक होता।

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टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, “इस अमाउंट को देखिए, अगर हमने 100 करोड़ रुपए बकाया वालों की लिस्ट मांगी होती तो यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ के पार होता। क्यों ना हमें इन डिफॉल्टर्स के नाम पब्लिक कर देने चाहिए? आरबीआई हर साल जानबूझकर बैंक लोन पचाने वालों की सूची जारी करता है। इससे फर्क नहीं पड़ता है कि इन लोगों ने जानबूझ कर बैंक लोन बचाया है या नहीं, हकीकत यह है कि इन पर 500 करोड़ रुपए से अधिक बैंक लोन नहीं चुकता किया है और लोगों को इनके नाम जानने का हक है।” बता दें कि आरबीआई से बड़े राशि वाले बकायदारों की सूची कोर्ट ने हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए मांगी थी। दरअसल 8 फरवरी 2016 को आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में देश के 29 बैंकों से दिया गया करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज डूब गया है।

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वहीं आरबीआई ने डिफॉल्टर के नाम सार्वजनिक करने का विरोध किया। आरबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि कानून के तहत गोपनीयता का प्रावधान है, जो नाम सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं देता। इस दलील पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कैसी गोपनीयता। किसी ने बैंक से कर्ज लिया लेकिन उसे नहीं चुकाया। ऐसे लोगों के नामों को सार्वजनिक करने से आरबीआई को क्या फर्क पड़ेगा। इससे तो उन लोगों की साख खराब होगी, जिन्होंने कर्ज नहीं चुकाया।

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  1. D
    Darpan
    Oct 28, 2016 at 12:10 pm
    कलकत्ता के भरत जैन - मनोज लखोटिया-बलकरण भुल्लर-देवेंद्र ओझा ने मिल कर स्टेट बैंक से ७०० - ८०० करोड़ रुपया झाड़ रखा है। मजे की बात यह है कि इनके तहत २० - ३० स्टाफ भी नहीं है। सिर्फ कागची कंपनियों, फर्जी लें-दें के माध्यम से सारा का सारा रूपया हवा कर अब सब साधू बने फिर रहे है और स्टेट बैंक इनके विरुद्ध सिर्फ दिखावे कागची कार्यवाही कर अपना धर्म निभा रहा है।
    (5)(0)
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    1. H
      Hemant Chauhan
      Nov 22, 2016 at 2:38 pm
      ये वही लोग है जिन्होंने अपने ऐशोआराम के पैसे खर्च कर दिए और कर भी रहे है । ये अपने मकानों और आने जाने के लिए जो संसाधन उपयोग करते है किस हक़ से । और तो और जो एक आम आदमी बैंक का लोन नहीं चूका पाता उसका नाम पेपर में छाप कर उसकी नीलामी की जाती है । बड़े लोगो के लिए अलग और छोटे लोगो के लिए अलग नियम । ये कहाँ का इंसाफ है
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      1. K
        kk
        Nov 30, 2016 at 4:01 pm
        पूंजीवाद सब घृणित सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक आधार! इस सादे व्यवस्था को दफ़न करें!
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        Reply
        1. Om Parkash Puri
          Nov 12, 2016 at 12:34 pm
          सुप्रीम कोर्ट के कथन के अनुसार देश के ८७ आदमी एेसे हैं जिन्ह की तरफ ५०० करोड़ से अधिक रक़म के बैंकों के डिफ्ल्टर हैं, जिन्ह की तरफ ८५ हज़ार करोड़ रूपया बक़ाया है , बहुत से उद्योगपतियों के क़र्ज़े माफ कर दिये हैं, टैक्स में रायतें, क़र्ज़ लिया रूपया घाटा दिखा कर,सब काला धन बना लिया है, यह लोग सरकार व जनता को दोखा दे रहे है, सरकार को इन्ह से तमाम रक़म ब्याज समेत, इन की जायदाद निलाम करक से वसूल करें यह पब्लिक का धन है,कहा जाता था विदेशों के बैकों में कालाधन छुपा रखा है, विदेशों से कालाधन लाया जावें
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          1. Ps Bansude
            Nov 13, 2016 at 3:41 am
            87 लोग दबाए बैठे हैं बैंकों के 85 हजार करोड़ रुपए
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          2. O.p. Verma
            Nov 18, 2016 at 10:53 am
            वही लोग हैं जिन्होने सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी पार्टी को चुनावी चंदा दिया है
            (3)(0)
            Reply
            1. Load More Comments