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Reality क्षेत्र में आधे से ज्यादा निजी निवेश उप्र, गुजरात और महाराष्ट्र में : एसोचैम

राज्य स्तरीय विश्लेषण’ के मुताबिक वित्त वर्ष 2004-05 से 2014-15 के बीच रीयल एस्टेट क्षेत्र में निजी पक्षों के निवेश के मामले में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 0.1 फीसद से 16 फीसद हो गयी है।

Author लखनऊ | Published on: November 24, 2015 3:08 AM

देश में रीयल एस्टेट क्षेत्र में निजी पक्षों द्वारा निवेश के मामले में उत्तर प्रदेश और गुजरात ने लंबी छलांग लगाई है और देश में पिछले एक दशक के दौरान इस क्षेत्र में आकर्षित किए गए 12 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश में इन दोनों राज्यों और महाराष्ट्र का योगदान 50 फीसद से ज्यादा है।

प्रमुख उद्योग मंडल ‘एसोचैम’ के ताजा अध्ययन ‘रीयल एस्टेट निवेश : राज्य स्तरीय विश्लेषण’ के मुताबिक वित्त वर्ष 2004-05 से 2014-15 के बीच रीयल एस्टेट क्षेत्र में निजी पक्षों के निवेश के मामले में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 0.1 फीसद से 16 फीसद हो गयी है। इसके अलावा गुजरात ने भी पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में निजी निवेश के मामले में 10 फीसद का उछाल दर्ज किया है।

अध्ययन के मुताबिक पिछले एक दशक में निजी निवेश के मामले में महाराष्ट्र के प्रदर्शन में गिरावट आयी है। वर्ष 2004-05 में जहां इसकी हिस्सेदारी 25.5 फीसद थी, वहीं वित्त वर्ष 2014-15 में इसका योगदान 22 फीसद ही रहा। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि उत्तर प्रदेश में रीयल एस्टेट क्षेत्र में कुल आकर्षित निवेश में निजी पक्षों की 98 फीसद हिस्सेदारी है। उसके बाद गुजरात(92) फीसद और महाराष्ट्र (89.5)फीसद की बारी आती है। उन्होंने बताया कि एसोचैम के आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो की यह अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2004-05 से 2014-15 तक पूरे देश में रीयल एस्टेट क्षेत्र में आकर्षित कुल 14 लाख करोड़ रुपए के निवेश में निजी क्षेत्र की 85 फीसद और सार्वजनिक क्षेत्र की 15 फीसद हिस्सेदारी रही है।

रावत ने बताया कि व्यापक आर्थिक स्थितियों में सुधार, नीतिसंगत माहौल बनने, मांग की समुचित पूर्ति, आकर्षक मूल्यांकन और पूंजी आवश्यकताओं में बढ़ोत्तरी होने से निजी पक्षों का रीयल एस्टेट क्षेत्र के प्रति आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा रीयल्टी और निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ)संबंधी नियमों में रियायत दिए जाने के बाद हमें उम्मीद है कि इससे आवासों के निर्माण में बढ़ोतरी होगी, जिसके परिणामस्वरूप स्टील, सीमेंट और संबंधित अन्य उत्पादन क्षेत्रों को भी फायदा होगा। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ने के अलावा सकल घरेलू उत्पाद पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। एसोचैम ने अपने अध्ययन में देश में रीयल एस्टेट क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं।

उद्योग मंडल का कहना है कि सरकार ‘रीयल एस्टेट विधेयक’ को प्राथमिकता के आधार पर संसद में पारित कराये ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके। इसके अलावा केन््रद तथा राज्य सरकारों द्वारा रीयल एस्टेट से सम्बन्धित परियोजनाओं की मंजूरी के लिये एकल खिड़की प्रणाली लागू की जाए। साथ ही भूलेख प्रक्रिया को पूरा करके उसे कंप्यूटरीकृत किया जाए।

 

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