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7th Pay Commission: दिल्ली के 85% स्कूलों में शिक्षकों को नहीं मिल रही सातवें वेतन आयोग की सैलरी, HC में बोली सरकार

7th Pay Commission, 7th CPC Latest News Today 2019, 7th Pay Commission Latest Hindi News: दिल्ली HC में दिए हलफनामे में DoE ने कहा है कि 12 प्रशासनिक जिलों में से आठ में कुल 1,145 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल संचालन में है और इनमें सिर्फ 169 में ही सातवें वेतन आयोग के हिसाब से मेहनताना दिया जा रहा है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 20, 2019 6:11 PM
7th Pay Commission: जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के उत्तरी पूर्वी जोन में 302 निजी स्कूल में महज सात में 7th Pay Commission के हिसाब से सैलरी दी जा रही है। (फोटोः Freepik)

7th Pay Commission, 7th CPC Latest News Today 2019, 7th Pay Commission Latest Hindi News: नई दिल्ली के 85 फीसदी स्कूलों में शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुकूल वेतन नहीं दिया जा रहा है। यह बात हाल ही में सरकार ने हाईकोर्ट से कही है। शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) के मुताबिक, देश की राजधानी के आठ जिलों में लगभग 1,145 निजी स्कूलों में से करीब 976 में शिक्षकों को 7th Pay Commission के हिसाब से तनख्वाह नहीं मिल रही है।

हैरत की बात है कि यह स्थिति तब है, जब शिक्षा विभाग इन सभी स्कूलों के लिए कारण बताओ नोटिस भी दे चुकी है। हालांकि, भारी संख्या में स्कूलों का दावा है कि उनकी फीस इतनी अधिक नहीं है कि वे अपने शिक्षकों को तनख्वाह बढ़ाकर दे सकें।

दिल्ली HC में दिए हलफनामे में DoE ने कहा है कि 12 प्रशासनिक जिलों में से आठ में कुल 1,145 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल संचालन में है और इनमें सिर्फ 169 में ही सातवें वेतन आयोग के हिसाब से मेहनताना दिया जा रहा है।

DoE ने कहा कि इन स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कानून के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग के हिसाब से सैलरी न देने पर उनकी मान्यता छिनने के साथ ही उसके प्रबंधन को भी कोई और संभाल सकता है।

दरअसल, यह हलफनामा सरकार की तरफ से उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया था जिसमें कोर्ट से स्कूल में संशोधित वेतन देने का निर्देश देने के लिए कहा गया था। याचिका में हवाला देते हुए कहा गया था कि सरकारी और निजी स्कूल टीचरों के वेतन में भेदभाव होता है।

एफेडेविट में कुछ स्कूलों का जवाब भी शामिल था, जिनमें से लगभग सभी ने दावा किया था कि उनके यहां इतनी फीस नहीं ली जाती कि वे सातवें वेतन आयोग के अनुसार टीचर्स को वेतन चुका सकें।

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