केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ा हुआ डीए मिलने में हो सकती है देरी, केरल में कटेगी एक महीने की सैलरी

माना जा रहा था कि इस महीने की सैलरी के साथ ही कर्मचारियों को जनवरी से लेकर मार्च तक का एरियर भी मिल जाएगा। हालांकि अब तक वित्त मंत्रालय की ओर से डीए को लेकर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।

7th pay commission
केंद्रीय कर्मचारियों का बढ़ा हुआ डीए मिलने में हो सकती है देरी

केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार की ओर से भले ही होली के बाद डीए में 4 फीसदी इजाफे के ऐलान का तोहफा दिया गया था, लेकिन यह राशि एंप्लॉयीज के खाते में पहुंचने में देर हो सकती है। दरअसल कोरोना वायरस के संकट के चलते हुए लॉकडाउन ने सरकारी राजस्व में भारी कमी की है। सरकार को टैक्स के जरिए मिलने वाला रेवेन्यू लगभग एक तिहाई ही रह गया है। ऐसे में सरकार की ओर से 1.13 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए में देरी की जा सकती है। 13 मार्च को डीए में 4 फीसदी इजाफे के ऐलान के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 21 फीसदी हो गया था। इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार को 14,510 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

डीए में यह इजाफा 1 जनवरी, 2020 से लागू किया गया है। केंद्रीय कर्मचारियों को अप्रैल महीने की सैलरी एक सप्ताह के बाद मिलने वाली है। माना जा रहा था कि इस महीने की सैलरी के साथ ही कर्मचारियों को जनवरी से लेकर मार्च तक का एरियर भी मिल जाएगा। हालांकि अब तक वित्त मंत्रालय की ओर से डीए को लेकर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि सामान्य स्थितियों में अब तक यह नोटिफिकेशन जारी हो जाना चाहिए था। देश में 24 मार्च से ही औद्योगिक गतिविधियों पर लगाम लगने के चलते सरकार को बड़े पैमाने पर रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। यहां तक कि कई विभागों के बजट में भी सरकार को 40 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ी है। इसके अलावा सरकार ने अपने कर्मचारियों से अप्रैल महीने में एक दिन की सैलरी को PM-CARES फंड में दान करने की भी अपील की गई है।

केरल में कटेगी एक महीने की सैलरी: इस बीच केरल सरकार ने अपने कर्मचारियों की सैलरी में बड़ी कमी करते हुए हर महीने 6 दिन का वेतन काटने का फैसला लिया है। मई से लेकर सितंबर तक यानी 5 महीनों के लिए यह कटौती लागू रहेगी। इस तरह कर्मचारियों को 5 महीनों में 30 दिन की सैलरी का त्याग करना होगा यानी एक महीने का वेतन काटा जाएगा। राज्य सरकार का यह फैसला सरकारी डॉक्टरों और नर्सों पर भी लागू होगा, जो कोरोना के संकट में आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात हैं। सूबे के सीएम पिनराई विजयन ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि 20,000 रुपये महीने से कम की सैलरी पाने वाले लोगों पर यह फैसला लागू नहीं होगा।

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