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7th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रैच्युटी के क्या हैं नियम और कैसे होता है कैलकुलेशन, जानिए- सब कुछ

7th Pay Commission (CPC) Latest News Today: ग्रैच्युटी दरअसल वह बचत होती है, जिसके बारे में कर्मचारियों को अंदाजा भी नहीं होता है। रिटायरमेंट के बाद जब यह रकम मिलती तो एक अच्छी खासी बचत हो जाती है, जो किसी भी जरूरी काम के लिए अहम हो सकती है।

जानें, कैसे होता है केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन

7th Pay Commission: यदि आप केंद्र सरकार की नौकरी में हैं तो आपके लिए ग्रैच्युटी का फॉर्मूला अन्य कर्मचारियों से थोड़ा अलग है। यूं तो नौकरी की शुरुआत में ही एंप्लॉयीज को अपनी सैलरी से लेकर तमाम अन्य चीजों के बारे में जानकारी दी जाती है। लेकिन कई बार ग्रैच्युटी जैसी कई चीजें होती हैं, जिनके कैलकुलेशन को कर्मचारी अकसर नहीं समझ पाते। आइए जानते हैं, आखिर कैसे होता है केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन…

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए क्या होती है ग्रैच्युटी?: ग्रैच्युटी दरअसल किसी भी कर्मचारी की वह बचत होती है, जिसके बारे में आमतौर पर उनको अंदाजा भी नहीं होता है। रिटायरमेंट के बाद जब यह रकम मिलती तो एक अच्छी खासी बचत हो जाती है, जो किसी भी जरूरी काम के लिए अहम हो सकती है। कई मामलों में यह रकम आपको रिटायरमेंट से पहले भी मिल सकती है। हालांकि इसका कैलकुलेशन करना हमेशा ही कर्मचारियों के लिए थोड़ा जटिल मसला रहा है। आइए आगे के बिंदुओं में जानते हैं कि आखिर कैसे केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन किया जाता है।

आखिर कैसे जोड़ी जाती है ग्रैच्युटी की रकम?: ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन दरअसल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते को जोड़कर, उसको 15 दिनों और नौकरी के वर्षों से गुणा करने और फिर 26 से भाग देकर निकाला जाता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं- (बेसिक सैलरी+ डीए) x 15 दिन x नौकरी के वर्ष/26 दिन।

आखिर 31 या 30 दिन की बजाय 26 दिन क्यों?: ग्रैच्युटी आपको वर्किंग डेज के आधार पर दी जाती है। इसलिए यह 30 दिनों की बजाय 26 दिनों के आधार पर कैलकुलेट होती है।

यह भी समझना जरूरी है कि ग्रैच्युटी सिर्फ रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम ही नहीं होती है। इसके भी तीन प्रकार होते हैं-

रिटायरमेंट ग्रैच्युटी: यह रिटायरमेंट के बाद सरकारी कर्मियों को मिलती है। कम से कम 5 साल की नौकरी या फिर तय शर्तें पूरी करने पर ही आप एक निश्चित रकम हासिल करते हैं। रिटायरमेंट ग्रैच्युटी को रिटायरमेंट के महीने में उठाई गई सैलरी के बेसिक पे के एक चौथाई और डीए को जोड़ते हुए कैलकुलेट किया जाता है। नौकरी के कुल सालों के हर छह महीने के आधार पर जोड़ते हुए ग्रैच्युटी की यह रकम दी जाती है। इसके लिए कोई न्यूनमत राशि तय नहीं है। 33 सालों की नौकरी के आधार पर या फिर बेसिक पे और डीए को जोड़ने के बाद उसके 16 गुना तक रकम दी जाती है। यह 20 लाख रुपये तक ही हो सकती है।

मौत पर मिलने वाली ग्रैच्युटी: कर्मचारी की मौत पर उसके नॉमिनी को ग्रैच्युटी की रकम मिलती है। लेकिन यह फॉर्मूला कुछ अलग है। इसका सीधा संबंध नौकरी के वर्षों से है। जैसे एक साल से कम की अवधि में मौत पर बेसिक पे का दोगुना मिलता है। एक साल से ज्यादा और 5 साल से कम के समय में मृत्यु होने पर बेसिक पे का 6 गुना, 5 साल से लेकर 11 साल की अवधि पर 12 गुना मिलता है। इसके अलावा 11 साल से 20 साल की अवधि के दौरान मौत पर बेसिक पे का 20 गुना मिलता है। 20 साल या उससे ज्यादा के समय पर हर साल के 6 महीने की अवधि का आधा मिलता है।

सर्विस ग्रैच्युटी: यदि कोई कर्मचारी 10 साल से कम की अवधि में ही नौकरी छोड़ देता है तो उसे सर्विस ग्रैच्युटी मिलेगी, लेकिन वह पेंशन का हकदार नहीं होगा। इसमें भी वही ग्रैच्युटी का वही फॉर्मूला लागू होगा, जैसे- (बेसिक सैलरी+ डीए) x 15 दिन x नौकरी के वर्ष/26 दिन।

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