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डाक कर्मचारी की कोरोना से मौत पर परिजनों को मिलेंगे 10 लाख रुपये, वेरिफिकेशन होगा जरूरी

नोटिफिकेशन में आदेश दिया गया है कि यदि किसी कर्मचारी की कोरोना से मौत की बात सामने आती है तो संबंधित सर्कल के अधिकारियों को उसका वेरिफिकेशन करना होगा। इसके बाद मुआवजे का क्लेम किया जाएगा।

7th pay commission7th pay commission: कोरोना से मौत पर डाक विभाग के कर्मचारियों के परिजनों को मिलेगा 10 लाख का मुआवजा

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए डाक विभाग ने वायरस से कर्मचारियों की मौत की स्थिति में उनके परिजनों को 10 लाख रुपये की राहत राशि दिए जाने का फैसला लिया है। यह फैसला डाक विभाग के सभी कर्मचारियों और सभी ग्रामीण डाक सेवकों पर लागू होगा। डाक विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक अब तक नौकरी के दौरान किसी दुर्घटना में मौत होने पर कर्मचारियों के परिजनों को 10 लाख रुपये का जो मुआवजा दिया जाता है, उसे अब कोरोना से मौत पर भी लागू किया जाएगा। डाक विभाग के दफ्तरों के सभी कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों के तौर पर काम करने वाले लोगों को भी इस दायरे में रखा गया है।

इस फैसले को 17 अप्रैल, 2020 से लागू माना जाएगा। नोटिफिकेशन में आदेश दिया गया है कि यदि किसी कर्मचारी की कोरोना से मौत की बात सामने आती है तो संबंधित सर्कल के अधिकारियों को उसका वेरिफिकेशन करना होगा। इसके बाद मुआवजे का क्लेम किया जाएगा। आदेश में सभी सर्कल अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि कोरोना के संक्रमण के चलते मौत के मामले में क्लेम से पहले पूरा वेरिफिकेशन किया जाए। विभाग की ओर से यह आदेश जारी किए जाने के बाद कर्मचारियों के परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी। अब तक कोरोना से मौत के मामले को ड्यूटी के दौरान दुर्घटना नहीं माना गया था। ऐसे में इस आदेश के बाद अब भ्रम दूर हो गया है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को गाइडलाइंस जारी की हैं। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि 20 से ज्यादा कर्मचारियों की दफ्तर में मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। आदेश के मुताबिक अन्य कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम जारी रखेंगे और इसे ध्यान में रखते हुए ही रोस्टर तैयार किए जाएं।

मंत्रालय ने कहा कि दफ्तरों में ऐसे कर्मचारी ही मौजूद होने चाहिए, जिनमें कोरोना के कोई भी लक्षण मौजूद न हों। यही नहीं ऐसे कर्मचारियों को भी दफ्तर आने से राहत दी गई है, जिनका घर कंटेनमेंट जोन में है। इलाके के कंटेनमेंट जोन से हटने पर ही ऐसे कर्मचारियों को दफ्तर आना होगा।

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