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सिर्फ 4 महीनों में बेरोजगार हुए 66 लाख इंजीनियर, टीचर, अकाउंटेंट जैसे पेशवर लोग, मजदूरों पर भी बड़ी मार

50 लाख औद्योगिक मजदूरों को इन 4 महीनों के दौरान अपने रोजगार खोना पड़ा है। सीएमआईई के कन्ज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार इस दौरान नौकरियों का सबसे ज्यादा नुकसान वाइट कॉलर प्रोफेशनल्स को उठाना पड़ा है।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 18, 2020 10:34 AM
unemployment in india4 महीने में 66 लाख पेशेवर हुए बेरोजगार

कोरोना काल में महज 4 महीनों में ही 66 लाख पेशेवर लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं। इन लोगों में इंजीनियर, फिजीशियन, अध्यापक आदि शामिल हैं। CMIE के डाटा के मुताबिक मई से अगस्त महीने के दौरान यह स्थिति पैदा हुई है। इस तरह से पेशेवर लोगों के रोजगार का आंकड़ा 2016 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। साफ है कि बीते 4 सालों में रोजगार के मामले में जो भी ग्रोथ हुई थी, वह खत्म हो गई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के डाटा के मुताबिक 50 लाख औद्योगिक मजदूरों को इन 4 महीनों के दौरान अपने रोजगार खोना पड़ा है। सीएमआईई के कन्ज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार इस दौरान नौकरियों का सबसे ज्यादा नुकसान वाइट कॉलर प्रोफेशनल्स को उठाना पड़ा है।

बीते 4 महीनों में जिन लोगों पर सबसे ज्यादा असर हुआ है, उनमें इंजीनियर, फिजीशियन, टीचर्स, अकाउंटेंट्स, एनालिस्ट्स और ऐसे ही कई अन्य पेशे से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि इस डाटा में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया गया है, जो सेल्फ एंप्लॉयड हैं। यदि उसे भी शामिल किया जाता तो यह आंकड़ा और अधिक हो सकता था। सीएमआईई के मुताबिक मई-अगस्त 2019 के दौरान ऐसे 18.8 मिलियन यानी 1.88 करोड़ पेशेवर लोग नौकरियां कर रहे थे। अब यह आंकड़ा 12.2 मिलियन के लेवल पर आ गया है। साफ है कि 66 लाख पेशेवर लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा है। इन पेशेवरों के रोजगार का 2016 के बाद यह सबसे कमजोर आंकड़ा है।

इसके बाद सबसे बड़ा नुकसान औद्योगिक मजदूरों को उठाना पड़ा है। बीते साल की तुलना में इस वर्ष मई से अगस्त के दौरान 50 लाख औद्योगिक मजदूरों को अपना रोजगार खोना पड़ा है। इसका अर्थ यह है कि एक साल में ही औद्योगिक मजदूरों के रोजगार में 26 पर्सेंट की कमी आई है। हालांकि इंडस्ट्रियल वर्कर्स के रोजगार में सबसे ज्यादा गिरावट स्मॉल इंडस्ट्रियल यूनिट्स में हुई है। CMIE का एनालिसिस वर्तमान में मीडियम स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्रियल यूनिट्स (MSME’s) के संकट को दिखा रहा है।

वैसे लॉकडाउन ने वाइट कॉलर क्लर्कियल नौकरियों को ज्यादा प्रभावित नहीं किया। जिनमें डेस्क वर्क कर्मचारियों से लेकर सेक्रेटरी, ऑफिस क्लर्क, बीपीओ/केपीओ कर्मचारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि हैं। इसका कारण उनकी नौकरियों का वर्क फ्रॉम होम शिफ्ट होना है। CMIE डाटा के अनुसार 2016 से इन वर्कर्स की कैटेगरी में कोई ग्रोथ नहीं दिख रही है बल्कि 2018 से नौकरियों में भारी गिरावट आई है । जो 2018 में 1.5 करोड़ से घटकर 2020 में 1.2 करोड़ रह गई है। हालांकि इसमें लॉकडाउन के दौरान कोई ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिली।

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