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पिछले साल 560 करोड़ का कालाधन पकड़ा गया

पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश के बाजारों में संदिग्ध लेन-देन, जाली नोट, सीमा पार से धन के अंतरण के पकड़े गए मामले बढ़कर दोगुना हो गए।

Author नई दिल्ली | July 31, 2017 01:52 am
इस एजंसी पर भारतीय बैंकिंग और अन्य वित्तीय चैनलों में संदिग्ध लेन-देन का विश्लेषण का जिम्मा है।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश के बाजारों में संदिग्ध लेन-देन, जाली नोट, सीमा पार से धन के अंतरण के पकड़े गए मामले बढ़कर दोगुना हो गए। इस दौरान 560 करोड़ रुपए से अधिक के कालेधन का पता चला। एक सरकारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वित्त मंत्रालय के प्रतिष्ठित तकनीकी जांच निकाय फाइनेंसियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआइयू) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी घटनाएं सामने आईं। सभी बैंक और वित्तीय कंपनियां देश के धनशोधन और आतंकवाद वित्तपोषण निरोधक उपायों के अनुपालन की बाध्यता के तहत ऐसे किसी भी प्रकार के लेन-देन की खबर इस यूनिट को देती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2015-16 में एफआइयू को ऐसी रिपोर्ट मिलने, उसके प्रोसेस और वितरण में खासी वृद्धि हुई।’ उसके मुताबिक नकद लेन-देन रिपोर्ट की संख्या 2014-15 के 80 लाख से बढ़कर 2015-16 में 1.6 करोड़ हो गया जबकि संदिग्ध लेन रिपोर्ट 58,646 से बढ़कर 1,05,973 हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जाली नोट के चलन संबंधी दर्ज रपटों में 16 फीसद और लाभ-निरपेक्ष संगठनों के लेनदेन की रिपोर्टों में 25 फीसद हो गई। इस दौरान सीमापार इलेक्ट्रानिक अंतरण के पकड़े गए संदिग्ध मामलों 850 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई।’ इस केंद्रीय एजंसी ने धनशोधन रोकथाम अधिनयम की विभिन्न धाराओं के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले निकायों को रिकार्ड 21 पाबंदियां भी जारी कीं। इस एजंसी पर भारतीय बैंकिंग और अन्य वित्तीय चैनलों में संदिग्ध लेन-देन का विश्लेषण का जिम्मा है।

 

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