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कोरोना काल में दुनिया भर में गईं 50 करोड़ नौकरियां, अकेले भारत में ही सैलरीड क्लास के 2 करोड़ लोगों पर गाज

दुनिया भर में इस संकट के चलते 50 करोड़ लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा है। इसमें से 2 करोड़ लोग अकेले भारत से ही हैं। हालांकि भारत का यह आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है क्योंकि CMIE के डाटा में संगठित उद्योग को लेकर ही यह बात कही गई है।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 24, 2020 10:30 AM
job loss due to coronavirusकोरोना काल में दुनिया भर में गईं 50 करोड़ नौकरियां

कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हुई तो करोड़ों लोगों की आजीविका भी छिनी है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक दुनिया भर में इस संकट के चलते 50 करोड़ लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा है। इसमें से 2 करोड़ लोग अकेले भारत से ही हैं। हालांकि भारत का यह आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है क्योंकि CMIE के डाटा में संगठित उद्योग को लेकर ही यह बात कही गई है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक कोरोनावायरस उम्मीद से कहीं ज्यादा भयानक साबित हो रहा है। ILO का कहना है कि कोरोनावायरस से ग्लोबल वर्किंग ऑवर्स को जितने नुकसान की उम्मीद थी वास्तविक नुकसान अनुमान से कहीं ज्यादा है।

दूसरी तिमाही में वर्किंग ऑवर 2019 के अंत से 17 फ़ीसदी कम है। इस आंकड़े में लगभग 500 मिलियन नौकरियां आती हैं जो जून के अनुमानित आंकड़े 400 मिलियन से 100 मिलियन ज्यादा हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन ने यह भी अनुमान लगाया है कि सरकार समर्थित प्रोग्राम्स को छोड़कर विश्वभर में लेबर इनकम लॉस 3.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। दूसरे हॉफ में स्थितियों के सुधरने की उम्मीद है, लेकिन जून से लगातार आउटलुक बेहाल हुआ है। बेसलाइन सिनेरियो में चौथी तिमाही में होने वाला नुकसान 245 मिलियन नौकरियों के बराबर होगा है।

इस निराशाजनक परिणाम के अनुसार यह नुकसान 500 मिलियन नौकरियों के बराबर भी हो सकता है। कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के कारण दूसरे हॉफ में नुकसान इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के पिछले अनुमान से ज्यादा होगा। आईएलओ के अनुसार उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नौकरियों को ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि वहां पर वर्क फ्रॉम होम और इनफार्मल वर्क के कम अवसर उपलब्ध हैं।

लंबी अवधि के लिए भी इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े चिंताजनक हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्था के मुताबिक रोजगार में गिरावट ने इनएक्टिविटी को भी बढ़ाया है। इसके कारण लोगों का लेबर मार्केट से कटाव हो सकता है। जिसकी वज़ह से जॉब रिकवरी में देरी होगी और असमानता बढ़ेगी। गौरतलब है कि CMIE के डाटा में भारत में कोरोना काल में 2 करोड़ सैलरीड क्लास की नौकरियां छिनने की बात कही गई। इनमें से 81 लाख लोग जुलाई और अगस्त महीने में ही बेरोजगार हुए हैं।

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