भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली थी, लेकिन देश में कई ऐसे कारोबार थे जो उससे दशकों पहले शुरू हो चुके थे। इनमें से कुछ कारोबार बदलते समय और बाजार की चुनौतियों के बीच आज भी बड़े ब्रांड और कारोबार के रूप में मौजूद हैं।

टाटा से लेकर डाबर और ब्रिटानिया तक, इन कंपनियों की शुरुआत आजादी से काफी पहले हुई थी और आज इनका कारोबार देश-विदेश तक फैला हुआ है। यहां हम ऐसी ही 5 कंपनियों के बारे में बता रहे हैं…

टाटा ग्रुप

साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने एक ट्रेडिंग फर्म के रूप में टाटा ग्रुप की शुरुआत की थी। टाटा ग्रुप के मुताबिक, उस समय कारोबार की शुरुआत 21,000 रुपये की पूंजी से हुई थी। आगे चलकर समूह ने टेक्सटाइल, स्टील, पावर, होटल, ऑटोमोबाइल और कई दूसरे क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया।

आज टाटा ग्रुप एक ग्लोबल एंटरप्राइज है। कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में टाटा कंपनियों का कुल राजस्व 180 अरब डॉलर से ज्यादा था।

डाबर

इसकी कहानी 1884 में शुरू हुई थी। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, डॉ. एस.के. बर्मन ने कलकत्ता में स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद बनाने का काम शुरू किया था। बढ़ती मांग के बाद 1896 में उत्पादन के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी लगाया गया।

समय के साथ डाबर ने आयुर्वेदिक दवाओं से आगे बढ़कर हेयर केयर, ओरल केयर, हेल्थ केयर और पर्सनल केयर जैसे क्षेत्रों में अपना कारोबार फैलाया। आज डाबर देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है।

ब्रिटानिया

ये देश के पुराने फूड ब्रांड्स में शामिल है। इसकी स्थापना 1892 में कोलकाता में हुई थी। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इसकी शुरुआत महज 295 रुपये के निवेश से हुई थी।

आज कंपनी के बिजनेस का विस्तार भारत से बाहर भी है और इसकी मौजूदगी 80 से अधिक देशों में है।

गोदरेज

गोदरेज की शुरुआत 1897 में हुई थी। गॉडरेज इंडस्ट्रीज की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, अरदेशिर गोदरेज ने शुरुआत में भारत में सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स बनाने का प्रयास किया था। बाद में 7 मई 1897 को मुंबई के लालबाग में गॉडरेज की पहली फैक्ट्री में ताले बनाने का उत्पादन शुरू हुआ।

इसके बाद कंपनी ने साबुन, उपभोक्ता उत्पाद, रियल एस्टेट और कई दूसरे क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाया। करीब 130 साल के सफर के बाद भी गॉडरेज नाम भारतीय कारोबार जगत में प्रमुख ब्रांडों में बना हुआ है।

रेमंड

रेमंड का इतिहास भी आजादी से पहले का है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, Raymond Limited की शुरुआत 1925 में Raymond Woollen Mill के रूप में ठाणे क्रीक के पास हुई थी। बाद में यह भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल कारोबार का बड़ा नाम बनी।

आज कंपनी का कारोबार सिर्फ सूटिंग-शर्टिंग फैब्रिक तक सीमित नहीं है। कंपनी टेक्सटाइल और अपैरल के साथ कई संबंधित कारोबारों में भी सक्रिय है।

यह भी पढ़ें: रतन टाटा के ‘राइट हैंड’ माने जाते थे एन चंद्रशेखरन, जानें उनकी पढ़ाई, करियर और 40 साल का सफर

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। रतन टाटा के राइट हैंड माने जाने वाले एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…