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अरब डॉलर का दांव खेलने के बाद नरेंद्र मोदी से भंग हो रहा मोह, 1999 के बाद पहली बार इतनी तेजी से बाजार से बाहर हुए वैश्‍व‍िक निवेशक

कार की बिक्री रिकॉर्ड कमी देखी जा रही है, पूंजी निवेश गिर गया है, बेरोजगारी दर 45 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और देश की बैंकिंग प्रणाली दुनिया के सबसे खराब ऋण अनुपात से प्रभावित है।

Author Updated: September 19, 2019 3:44 PM
pm modi, photo source- indian express

वैश्विक निवेशकों का नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से मोह भंग होता जा रहा है। बीते 6 सालों में भारतीय स्टॉक मार्केट में 45 अरब डॉलर (32 खरब रुपये से अधिक) की रकम उड़ेलने के बाद उम्मीद थी कि इससे मोदी देश की आर्थिक क्षमता में इजाफा करेंगे। लेकिन, अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रबंधक इन रकमों को रिकॉर्ड गति से बाहर निकाल रहे हैं। जून से लेकर अब तक उन्होंने 4.5 बिलयन डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए हैं। वैश्निक निवेशकों का यह पलायन 1999 के बाद सबसे बड़ा है। इस मामले में ‘ब्लूमबर्ग’ से बातचीत में लंदन में कार्यरत प्रमुख निवेश रणनीतिकार सलमान अहमद ने बताया है, “मोदी के ईर्द-गिर्द मंडराने वाला 2014 से पहले का सुख-लाभ अब बीच चुका है।”

निवेशकों का विश्वास खोने के पीछे किसी गलती को निकालना कठिन है। मोदी के प्रधानमंत्री बनने से एक साल पहले, 2013 की शुरुआत से भारत की आर्थिक वृद्धि पांच सबसे कम स्तर के कमजोर तिमाही पर आ टिकी थी। इसके बाद दूसरी तिमाही में 5 फीसदी के विकास दर वाले आंकड़े से मंदी का अंदाजा लगाया जा सकता है। कार की बिक्री रिकॉर्ड कमी देखी जा रही है, पूंजी निवेश गिर गया है, बेरोजगारी दर 45 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और देश की बैंकिंग प्रणाली दुनिया के सबसे खराब ऋण अनुपात से प्रभावित है। सोमवार का तेल-मूल्य में वृद्धि से अर्थव्यवस्था को एक और झटका लगा है। क्योंकि, भारत क्रूड आयल का आयात काफी मात्रा में करता है।

हालांकि, अर्थव्यवस्था के कमजोर होने पर मोदी सरकार बैठी नहीं है। निवेशकों का कहना है कि वह जरूरी सुधारों के प्रति बहुत धीमी गति से काम कर रहे हैं। इसमें राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के स्टेक को बेचना और देश के श्रम कानूनों में बदलाव करना शामिल है। सबसे चिंता की बात यह है कि भारत एक स्ट्रक्चरल स्लोडाउन की ओर बढ़ सकत है, जिससे देश के स्टॉक मार्केट से 2 ट्रिलयन डॉलर बाहर आ सकते हैं। इससे Amazon.com से लेकर Netflix जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के ग्रोथ प्लान पर रेड-सिग्नल लग जाएगा। इस वजह से मोदी की भारतीय जनता पार्टी की सरकार को देश के युवाओं को रोजगार मुहैया कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

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